बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत को छह साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन यह मामला आज भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। करणी सेना मुंबई के अध्यक्ष सुरजीत सिंह राठौड़ जयपुर आए। निकाय चुनाव में मतदान के लिए जयपुर पहुंचे राठौड़ ने दैनिक भास्कर से बातचीत में सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े अपने दावों, कूपर अस्पताल की मॉर्च्युरी में उनके पार्थिव शरीर को देखने के दौरान सामने आई बातों, दिशा सालियान से जुड़े कथित कनेक्शन और मामले की जांच को लेकर अपनी मांगों पर बात की। राठौड़ का दावा है कि सुशांत के पार्थिव शरीर को देखने के दौरान मैंने शरीर पर कुछ ऐसी चीजें देखीं, जिन्हें लेकर मेरे मन में सवाल पैदा हुए। उनका कहना है कि मैंने उस समय पुलिस और संबंधित अधिकारियों को शिकायत भी दी, लेकिन मेरा बयान दर्ज नहीं किया गया। मैं अब महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग से दोबारा जांच की मांग करूंगा। राठौड़ ने कहा- सुशांत के पार्थिव शरीर को देखकर उस समय रिया के मुंह से सिर्फ एक शब्द निकला- ‘सॉरी बाबू।’ सवाल: आखिर छह साल बाद सुशांत सिंह राजपूत केस को आप क्यों उठा रहे हैं? सुरजीत सिंह राठौड़: मेरे लिए यह सिर्फ एक मामला नहीं है। जब किसी परिवार को लगता है कि उसे न्याय नहीं मिला है तो उसकी आवाज उठाना जरूरी है। मैं 15 जून 2020 को कूपर अस्पताल पहुंचा था। वहां मैंने जो कुछ देखा, उसके बाद मेरे मन में कई सवाल पैदा हुए। मैंने उस समय भी अपनी बात रखी और आज भी उसी बात पर कायम हूं। मेरा कहना है कि अगर किसी व्यक्ति ने कोई गंभीर बात सामने रखी है तो कम से कम उसका बयान तो दर्ज होना चाहिए। मेरा बयान ही दर्ज नहीं किया गया। आज भी मैं चाहता हूं कि मेरी बात सुनी जाए और तथ्यों की दोबारा जांच हो। 15 जून 2020 को मैं कूपर अस्पताल पहुंचा था। वहां धोनी एंटरटेनमेंट के निर्माता संदीप सिंह भी आए थे। इसी दौरान रिया चक्रवर्ती वहां आईं और उन्होंने सुशांत के अंतिम दर्शन की इच्छा जताई। मॉर्च्युरी के स्टाफ से अनुमति लेने के बाद मैं और रिया अंदर गए। सुशांत का पार्थिव शरीर डीप फ्रीजर से बाहर निकाला गया। मैंने उनके चेहरे से कपड़ा हटाया। उस समय रिया के मुंह से सिर्फ एक शब्द निकला- ‘सॉरी बाबू।’ मैं उस समय हैरान हुआ कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा। मेरे मन में सवाल आया कि आखिर वह किस बात के लिए माफी मांग रही थीं? हालांकि यह उनकी व्यक्तिगत भावना हो सकती है और इसका अर्थ मैं निश्चित तौर पर नहीं बता सकता। उस वक्त मेरे मन में यह बात जरूर आई थी। जब हम मॉर्च्युरी से बाहर आए तो रिया की मां, पिता और भाई अंदर जाना चाहते थे, लेकिन मॉर्च्युरी स्टाफ ने उन्हें अनुमति नहीं दी। इसके बाद वे वहां से चले गए। बाद में एक चैनल के माध्यम से रिया की ओर से यह कहा गया कि उन्होंने मॉर्च्युरी के अंदर सुशांत को नहीं देखा था। मेरा कहना है कि मैं उनके साथ अंदर गया था, इसलिए इस बात को लेकर मेरे मन में सवाल है। सवाल: महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग को लेकर भी आपने सवाल उठाए हैं। अब आपने दोबारा पत्र क्यों लिखा? सुरजीत सिंह राठौड़: मैंने वर्तमान महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को पत्र और ई-मेल भेजकर दोबारा अपनी बात रखी है। मेरी मांग है कि मेरे बयान को दर्ज किया जाए और यह देखा जाए कि उस समय कूपर अस्पताल और रिया चक्रवर्ती को किस आधार पर क्लीन चिट दी गई थी। मेरा सवाल सिर्फ इतना है कि अगर मैं उस घटना का प्रत्यक्षदर्शी होने का दावा कर रहा था तो मेरा बयान क्यों नहीं लिया गया? कम से कम मुझे बुलाकर पूछा तो जाता कि आपने क्या देखा था। सवाल: आप सुशांत और दिशा सालियान की मौत के बीच कनेक्शन की बात भी करते हैं। आपका आधार क्या है? सुरजीत सिंह राठौड़: मेरा मानना है कि दोनों घटनाओं की कड़ियों को भी जांच के दायरे में देखा जाना चाहिए। सुशांत और दिशा दोनों दोस्त थे। सुशांत को दिशा से जुड़ी कुछ बातें पता थीं और वे इसको लेकर नाराज थे। इसमें आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली और डीनो मोरिया से दिशा परेशान थी। इस पर सुशांत भी इन सभी से नाराज थे। मेरा दावा है कि सुशांत ने कुछ लोगों के सामने इस मामले को उठाने की बात कही थी। मुझे लगता है कि इन दोनों मामलों के बीच जो भी तथ्यात्मक कड़ियां हैं, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मैं चाहता हूं कि जांच एजेंसी सभी तथ्यों को सामने रखे और जो सच है, वह देश के सामने आए। मैंने पहले भी कुछ लोगों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसी को ही निकालना चाहिए। अगर कोई साजिश थी तो उसका पता लगाया जाना चाहिए और अगर नहीं थी तो यह भी स्पष्ट रूप से सामने आना चाहिए कि सुशांत की मौत से जुड़े हर सवाल का जवाब क्या है। सवाल: आपकी सुशांत से व्यक्तिगत मुलाकात कितनी थी? सुरजीत सिंह राठौड़: मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मेरी सुशांत से कोई गहरी व्यक्तिगत दोस्ती नहीं थी। मुंबई में फिल्म प्रीमियर और दूसरे कार्यक्रमों में एक-दो बार मुलाकात हुई थी। एक प्रोजेक्ट को लेकर फोन पर भी बातचीत हुई थी। जब फिल्म पद्मावत को लेकर राजस्थान में आंदोलन चल रहा था। उस समय सुशांत ने राजपूत समाज को लेकर कुछ बयान दिए थे। बाद में उन्होंने अपने नाम से सरनेम भी हटाया था। तब मैंने उन्हें फोन करके कहा था कि आप अपना काम कीजिए। इस मामले में आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने मुझसे कहा था कि वे फिल्म इंडस्ट्री में हैं और कई बार इंडस्ट्री में रहकर कुछ बातें समझनी पड़ती हैं। सवाल: अब आप सुशांत सिंह राजपूत पर फिल्म बनाने की तैयारी भी कर रहे हैं। इसकी वजह क्या है? सुरजीत सिंह राठौड़: हां, हम सुशांत पर फिल्म बनाने की तैयारी कर रहे हैं। अभी इसकी स्टोरी पर काम चल रहा है। इस फिल्म का मेरा उद्देश्य पैसा कमाना नहीं है। मैं चाहता हूं कि इस पूरे मामले में जो सवाल उठे, जो घटनाएं सामने आईं और मैंने जो कुछ देखा या जाना, उसे सिनेमा के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाए। हम जल्दबाजी नहीं करना चाहते। अगर हम वास्तविक घटनाओं पर फिल्म बना रहे हैं तो हर तथ्य को जिम्मेदारी से दिखाना जरूरी है, इसलिए पटकथा पर काफी काम किया जा रहा है। मैं दिखाना चाहता हूं कि सुशांत की जिंदगी में कौन-कौन लोग आए, उनके आसपास क्या घटनाएं हुईं और उनकी मौत के बाद किस तरह का घटनाक्रम सामने आया।
‘सुशांत सिंह मामले में मेरे बयान आज भी दर्ज नहीं’:सुरजीत सिंह बोले- मानवाधिकार आयोग को दोबारा जांच के लिए पत्र लिखा; रिया को सॉरी बाबू कहते सुना

