उन्नाव PWD में 34 साल से एक पटल पर बाबू:दूसरे कर्मचारी की तैनाती भी 26 साल से, शिकायत के बाद विभाग ने शुरू की रिकॉर्ड की जांच

उन्नाव PWD में 34 साल से एक पटल पर बाबू:दूसरे कर्मचारी की तैनाती भी 26 साल से, शिकायत के बाद विभाग ने शुरू की रिकॉर्ड की जांच

उन्नाव के लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रांतीय खंड कार्यालय में लंबे समय से एक ही जगह और एक ही पटल पर तैनात कर्मचारियों को लेकर तबादला नीति पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि बाबू अंजनी कुमार पांडेय करीब 34 साल से एक ही पटल पर काम कर रहे हैं। वहीं, बाबू कमल बाजपेयी की भी इसी कार्यालय में करीब 26 साल से तैनाती बताई जा रही है। दोनों की लंबे समय से एक ही जगह तैनाती को लेकर शिकायत सामने आने के बाद विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं। तबादले के लिए हर साल 10% कर्मचारियों की व्यवस्था शिकायत के मुताबिक विभाग में हर साल करीब 10 प्रतिशत कर्मचारियों के तबादले की व्यवस्था है। यह प्रक्रिया कर्मचारियों की वरिष्ठता के आधार पर की जाती है। इसके बावजूद दोनों बाबुओं के वर्षों से एक ही कार्यालय और महत्वपूर्ण पटल पर बने रहने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लंबे समय तक एक पटल पर रहने से पारदर्शिता पर सवाल विभागीय सूत्रों का कहना है कि किसी कर्मचारी के लंबे समय तक एक ही पटल पर तैनात रहने से उसके कामकाज की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ सकते हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दोनों बाबू लंबे समय से महत्वपूर्ण सीटों पर तैनात हैं और पहुंच व सांठगांठ के चलते उनका तबादला नहीं हो सका। हालांकि, इन आरोपों की विभाग ने पुष्टि नहीं की है। दोनों बाबू बोले- नियमों के मुताबिक हो रही तैनाती मामला सामने आने के बाद दोनों कर्मचारियों ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत बताया। उनका कहना है कि वे विभागीय नियमों के अनुसार काम कर रहे हैं और उनकी तैनाती भी नियमों के तहत ही हुई है। एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बोले- रिकॉर्ड खंगाल रहे प्रांतीय खंड के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एचडी अहिरवार ने शुक्रवार को बताया कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि सूचना के अधिकार के तहत भी संबंधित जानकारी सामने आई है। फिलहाल दोनों कर्मचारियों के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि रिकॉर्ड की जांच के दौरान यदि किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि दोनों कर्मचारियों की इतने लंबे समय तक तैनाती किन परिस्थितियों में रही।

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