एआई की दुनिया से आई एक ऐसी खबर ने नई बहस छेड़ दी है, जिसमें तकनीक को बनाने वाले एक शोधकर्ता ने ही उसकी रफ्तार और संभावित खतरे पर सवाल उठाए हैं। एंथ्रोपिक के शोधकर्ता जैकब कॉक्सन ने कंपनी से इस्तीफा देते हुए आरोप लगाया है कि एआई क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां बेहद शक्तिशाली और खुद को बेहतर बनाने वाली सिस्टम विकसित करने की रेस में सुरक्षा को पीछे छोड़ रही हैं।
जैकब कॉक्सन ने 9 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने इस्तीफे की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में उन्होंने ओपनएआई और एंथ्रोपिक, दोनों कंपनियों में एआई के प्रशिक्षण से जुड़े रिसर्च पर काम किया है। कॉक्सन के मुताबिक, दोनों कंपनियां जिम्मेदारी से काम नहीं कर रही हैं और ऐसी तकनीक विकसित करने की दौड़ में शामिल हैं, जो आगे चलकर खुद को बेहतर बनाने में सक्षम हो सकती है।
कॉक्सन ने लोगों से एआई की क्षमता को कम करके नहीं आंकने की अपील की है। उनका कहना है कि आने वाली अत्यधिक शक्तिशाली सिस्टम्स कंप्यूटर सिस्टम में सेंध लगाने, अलग-अलग क्षेत्रों में बहुत तेजी से बदलाव लाने और वास्तविक दुनिया में संसाधनों तथा प्रभाव तक पहुंच हासिल करने में सक्षम हो सकती हैं। उन्होंने दावा किया कि तकनीक में हो रही प्रगति की रफ्तार फिलहाल कम होती नजर नहीं आ रही है।
सबसे गंभीर दावा करते हुए कॉक्सन ने कहा कि एआई विकसित करने वाले कई लोग निजी तौर पर इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यह तकनीक दशक खत्म होने से पहले ही पूरी मानवता के लिए घातक साबित हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक मंचों पर कई अधिकारी और वरिष्ठ शोधकर्ता अपनी भाषा को ज्यादा संतुलित रखते हैं, जबकि निजी बातचीत में उनके बीच कहीं ज्यादा गंभीर चिंता दिखाई देती है।
गौरतलब है कि कॉक्सन की चिंता सिर्फ उनकी व्यक्तिगत राय तक सीमित नहीं रही। एंथ्रोपिक के अलाइन्मन्ट विज्ञान विभाग के प्रमुख इवान ह्यूबिंगर ने उनकी बात का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें भी मानव विनाश की संभावना गंभीर लगती है। ह्यूबिंगर ने अपने व्यक्तिगत आकलन में अगले दशक के भीतर ऐसी घटना की संभावना दस प्रतिशत से अधिक बताई, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा एआई प्रणालियों से तत्काल मानव विनाश का जोखिम कम माना जाता है और मुख्य चिंता भविष्य की सुपरइंटेलिजेंस को लेकर है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, एआई सुरक्षा को लेकर यह बहस अब केवल बाहरी आलोचकों तक सीमित नहीं है। जिन संस्थानों में अत्याधुनिक एआई विकसित हो रही है, वहीं के कुछ शोधकर्ता भी इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि तकनीकी विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। असली चिंता यह है कि अगर एआई प्रणालियां इंसानों की क्षमता से आगे निकलकर खुद को लगातार सुधारने लगती हैं, तो उनके व्यवहार और नियंत्रण को सुनिश्चित करना कितना संभव होगा।
बता दें कि जैकब कॉक्सन इससे पहले ओपनएआई में भी काम कर चुके हैं। उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब दुनिया की बड़ी एआई कंपनियां अधिक सक्षम सिस्टम्स विकसित करने की होड़ में हैं। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि एआई की दौड़ में आगे निकलना ज्यादा जरूरी है या यह सुनिश्चित करना कि विकसित की जा रही तकनीक मानव नियंत्रण से बाहर न हो जाए।

