Vanakkam Poorvottar: Manipur Musician Chongtham Vikram Singh की दिल्ली में हुई निर्मम हत्या ने कई सवाल खड़े कर दिये

Vanakkam Poorvottar: Manipur Musician Chongtham Vikram Singh की दिल्ली में हुई निर्मम हत्या ने कई सवाल खड़े कर दिये
नई दिल्ली में मणिपुर के चर्चित गिटारवादक चोंगथाम विक्रम सिंह की कथित मॉब लिंचिंग ने सिर्फ एक परिवार को नहीं तोड़ा है, बल्कि राजधानी में पूर्वोत्तर के लोगों की सुरक्षा और उनके साथ होने वाले भेदभाव पर फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हम आपको बता दें कि 55 वर्षीय चोंगथाम विक्रम सिंह की 6 सितंबर की देर रात अश्रम इलाके में कथित तौर पर आठ लोगों ने बेरहमी से पिटाई की। अगले दिन सुबह उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया। पुलिस ने सात लोगों और एक 15 वर्षीय किशोर को गिरफ्तार किया है और मामले की जांच मॉब लिंचिंग के तौर पर कर रही है।
चोंगथाम विक्रम सिंह की पत्नी जोशना चोंगथाम ने मंगलवार को चाणक्यपुरी में मीडिया के सामने जो घटनाक्रम बताया, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। उनके मुताबिक, 6 सितंबर की रात करीब 11.30 बजे चोंगथाम विक्रम सिंह नीचे गए थे। कुछ देर बाद वह आठ लोगों से पीछा छुड़ाते हुए सीढ़ियां चढ़कर घर पहुंचे। हमलावरों ने उन्हें घर के दरवाजे तक पीटा। पत्नी और बेटे के सामने हुई इस हिंसा के बाद चोंगथाम विक्रम सिंह को सांस लेने में तकलीफ हुई और परिवार उन्हें होली फैमिली अस्पताल ले गया। उनका ब्लड प्रेशर बेहद कम था और करीब सुबह छह बजे उन्होंने दम तोड़ दिया। जोशना ने कहा कि उन्होंने अपना पति और उनके बेटे ने अपना पिता खो दिया।

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पुलिस के मुताबिक विवाद की शुरुआत घर के आसपास स्थित ढाबों से आने वाले तेज शोर को लेकर हुई थी। परिवार का कहना है कि चोंगथाम विक्रम सिंह ने पहले भी इस शोर और इलाके में होने वाली आवाजाही पर आपत्ति जताई थी और कुछ लोगों ने उन्हें धमकाया भी था। बेटे याइफाबा के पुलिस बयान के अनुसार, हमले के दौरान उसके पिता ने बताया था कि वह कुछ हमलावरों को पहचानते हैं और वे पहले भी उन्हें धमका चुके थे। याइफाबा ने पुलिस को यह भी बताया कि उसने दरवाजा खोलकर हमलावरों को अपने पिता को लात-घूंसों से पीटते देखा था और वह उनके चेहरों की पहचान कर सकता है। अस्पताल ले जाते समय सिंह ने कथित तौर पर बताया कि हमलावर सामने वाले ढाबे की तरफ से आए थे।
बताया जा रहा है कि यह परिवार करीब नौ वर्षों से उसी मकान की तीसरी मंजिल पर रह रहा था। पड़ोसी के मुताबिक उस रात अचानक चीख-पुकार सुनाई दी। सामान्य तौर पर सिंह रात के खाने के बाद टहलने या कूड़ा बाहर डालने निकलते थे और माना जा रहा है कि उस रात भी वह इसी तरह नीचे गए थे। लेकिन वापस लौटते समय सीढ़ियां उनके लिए मौत का रास्ता बन गईं। घटना के बाद असली विवाद सिर्फ हत्या के आरोपियों तक सीमित नहीं रहा। पूर्वोत्तर के नागरिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे व्यापक नस्ली भेदभाव के संदर्भ में देखने की मांग की है। मणिपुर वीमेन गन सर्वाइवर्स नेटवर्क की संस्थापक सदस्य बिनालक्ष्मी नेप्राम ने आरोप लगाया कि यह नस्ली हिंसा का मामला है और सवाल उठाया कि आखिर पूर्वोत्तर के लोगों को अपने ही देश की राजधानी में ऐसी हिंसा का सामना क्यों करना पड़ता है। वहीं दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने घटना को भयावह बताते हुए इसमें नस्ली कोण से इंकार किया और विपक्ष पर ‘गंदी राजनीति’ नहीं करने की अपील की।
उधर, मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने इसे बेहद पीड़ादायक घटना बताते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखा और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निगरानी में निष्पक्ष, समयबद्ध और उच्चस्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने पूर्वोत्तर के छात्रों और कामकाजी लोगों की बड़ी आबादी वाले इलाकों में सुरक्षा मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि ऐसी घटनाओं को महज अलग-थलग अपराध मानकर छोड़ना ठीक नहीं होगा।
हत्या के बाद नागरिक संगठनों के विरोध-प्रदर्शन के बीच एफआईआर में मॉब लिंचिंग से संबंधित प्रावधान लगाए जाने की बात सामने आई। दरअसल, भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103(2) में पांच या उससे अधिक लोगों द्वारा मिलकर किसी व्यक्ति की हत्या करने की स्थिति में, यदि आधार नस्ल, जाति, समुदाय, लिंग, जन्मस्थान, भाषा, व्यक्तिगत विश्वास या अन्य आधार हो, तो कठोर सजा का प्रावधान है, जिसमें उम्रकैद से लेकर मृत्युदंड तक की सजा हो सकती है।
देखा जाये तो चोंगथाम विक्रम सिंह की हत्या ने पूर्वोत्तर के लोगों के बीच पुराने डर और असुरक्षा की भावना को फिर सामने ला दिया है। नागरिक संगठनों ने इस घटना को इसी वर्ष फरवरी में मालवीय नगर में अरुणाचल प्रदेश की कुछ युवतियों के साथ कथित नस्ली गाली-गलौज जैसी घटनाओं के संदर्भ में देखने की अपील की है। सोशल मीडिया पर पूर्वोत्तर के लोगों ने सवाल उठाया कि दिल्ली जैसे महानगर में आखिर उनकी सुरक्षा कितनी सुनिश्चित है।
परिवार की मांग हालांकि बेहद साफ है कि बदला नहीं, न्याय चाहिए। उधर पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। दिल्ली बीजेपी ने जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल करने और सरकार की ओर से मुकदमे को विशेष अदालत में तेजी से चलाने की सिफारिश की बात कही है। अब असली कसौटी यही है कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है, आरोपियों के खिलाफ कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और क्या यह मामला सिर्फ एक और सनसनीखेज खबर बनकर रह जाएगा।
क्योंकि सवाल अब सिर्फ चोंगथाम विक्रम सिंह की हत्या का नहीं है। सवाल यह है कि दिल्ली में रहने वाला कोई व्यक्ति अगर अपने आसपास के शोर पर आपत्ति जताता है, तो क्या उसकी शिकायत का जवाब लात-घूंसों और भीड़ की हिंसा से दिया जाएगा? और अगर पीड़ित पूर्वोत्तर से आता है, तो क्या समाज को उसके साथ होने वाली हिंसा के नस्ली पहलू पर भी उतनी ही गंभीरता से विचार नहीं करना चाहिए?

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