Sensory Activities For Kids: बच्चों के लिए खेलना सिर्फ समय बिताने का तरीका नहीं है, बल्कि इससे उन्हें नई चीजें सीखने और अपने आसपास की चीजों को समझने में भी मदद मिलती है। आज के समय में सोशल मीडिया पर पैरेंट्स बच्चों के विकास के लिए कई तरह की एक्टिविटीज से जुड़े वीडियो शेयर करते रहते हैं। इनमें चना, दाल, गेहूं, चावल जैसे अनाजों के साथ खेलने के अलावा कई तरह की एक्टिविटीज कराई जाती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस तरह की एक्टिविटी बच्चों के लिए कितनी सही होती हैं और इन्हें कराते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
बच्चों के लिए Sensory Play क्यों है जरूरी?
बच्चे खेलते समय अलग-अलग चीजों को छूकर, देखकर, सुनकर और महसूस करके सीखते हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, संवेदी खेल या इंद्रिय आधारित खेल (Sensory Play) में बच्चे देखने, सुनने, छूने, सूंघने और स्वाद जैसी इंद्रियों का इस्तेमाल करते हैं। इससे उनके विकास में मदद मिल सकती है। इस तरह के खेल से बच्चों की भाषा सीखने, हाथों और उंगलियों की छोटी मांसपेशियों का इस्तेमाल करने, शरीर का संतुलन बनाने और नई चीजों को समझने की क्षमता विकसित हो सकती है। इसके अलावा, बच्चों को दूसरों के साथ खेलने से भावनाओं को समझने में भी मदद मिल सकती है।
घर पर कैसे कराएं Sensory Play?
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, घर में मौजूद कई चीजों से बच्चों के लिए ऐसी गतिविधियां कराई जा सकती हैं। पानी से खेलना, उंगली से पेंटिंग करना, आटे या प्ले डो से खेलना, संगीत सुनना, रेत में खेलना या बाहर जाकर घास पर खेलने जैसी एक्टिविटीज कराई जा सकती हैं। इस तरह की एक्टिविटीज में बच्चे अलग-अलग चीजों को छूकर और महसूस करके उनके बारे में समझने की कोशिश करते हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
Sensory Play में कई बार बच्चे छोटी-छोटी चीजों के साथ खेलते हैं, इसलिए इस दौरान बच्चों पर नजर रखना जरूरी है। बच्चों के लिए Sensory Play की एक्टिविटी चुनते समय उनकी उम्र और सुरक्षा का ध्यान रखने के हिसाब से चीजों को देना चाहिए। इसके साथ ही पैरेंट्स को एक्टिविटी के दौरान बच्चे पर नजर रखनी चाहिए, ताकि वह खेलते समय किसी चीज को मुंह में न डाल ले।

