सोनीपत जिमखाना क्लब विवाद में अंतरिम रोक याचिका खारिज:साझेदारों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई; दस्तावेजों और समझौतों को आधार बनाया

सोनीपत जिमखाना क्लब विवाद में अंतरिम रोक याचिका खारिज:साझेदारों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई; दस्तावेजों और समझौतों को आधार बनाया

सोनीपत के सेक्टर-6 स्थित जिमखाना क्लब को लेकर चल रहा विवाद अब अदालत की चौखट तक पहुंचने के बाद एक नए पड़ाव पर पहुंच गया है। क्लब की उप-पट्टेदारी, एलएलपी समझौते, साझेदारी और परियोजना में किए गए निवेश को लेकर पक्षकारों के बीच चल रहे विवाद में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत ने याचिकाकर्ता बिजेंदर कुमार को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने बिजेंदर कुमार की ओर से दायर अंतरिम रोक की याचिका को खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने 17 अप्रैल 2025 की प्रस्तावना, एलएलपी समझौते और साझेदारी अधिनियम की धारा 24 से जुड़े प्रावधानों का परीक्षण किया। अदालत ने प्रथम दृष्टया यह माना कि संबंधित पक्ष को क्लब परियोजना से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी थी और लंबे समय तक उसकी ओर से कोई आपत्ति सामने नहीं रखी गई। हालांकि, अदालत ने अपने आदेश में साफ किया कि अंतरिम रोक की याचिका पर लिया गया यह फैसला पक्षकारों के अंतिम अधिकारों या दावों का निर्धारण नहीं करता। दस्तावेजों और पुराने समझौतों को बनाया आधार राजनारायण ने दावा करते हुए कहा कि अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान विभिन्न दस्तावेजों और समझौतों को आधार बनाया गया। इनमें 17 अप्रैल 2025 की प्रस्तावना के साथ एलएलपी समझौता और साझेदारी अधिनियम की धारा 24 से संबंधित प्रावधान शामिल रहे। अदालत ने इन पहलुओं पर विचार करते हुए अंतरिम स्तर पर याचिकाकर्ता को रोक संबंधी राहत देने से इनकार कर दिया। लंबे समय तक आपत्ति नहीं जताने की बात अदालत के समक्ष रखे गए तथ्यों में यह भी सामने आया कि संबंधित पक्ष को क्लब परियोजना से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी होने के बावजूद लंबे समय तक कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई। इसी तथ्य को अदालत ने अंतरिम राहत पर विचार करते समय महत्वपूर्ण माना। हालांकि, इस स्तर पर अदालत ने मामले से जुड़े अंतिम अधिकारों पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। साझेदारों ने किया छह करोड़ निवेश का दावा मामले में दूसरी ओर ईगल आइ क्लब रिट्रीट्स एलएलपी के साझेदार राकेश कालरा, राज नारायण सिंह, सतीश कपूर और विजय कपूर ने परियोजना में करीब छह करोड़ रुपये का निवेश किए जाने का दावा किया है। साझेदारों के अनुसार परियोजना में किए गए निवेश से संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड और आपसी समझौते उनके पास मौजूद हैं। परियोजना से अलग करने का लगाया आरोप साझेदारों का आरोप है कि निवेश और साझेदारी से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें परियोजना से दूर रखने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि वित्तीय रिकॉर्ड, समझौते और अन्य मूल दस्तावेजों की निष्पक्ष तरीके से जांच की जाए तो पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। एफआईआर की भी निष्पक्ष जांच की मांग साझेदारों ने इस विवाद से जुड़े पुलिस केस की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि 22 जून को थाना सेक्टर-27 में दर्ज एफआईआर नंबर 152 समेत पूरे मामले में उपलब्ध मूल दस्तावेजों को जांच का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उनका आग्रह है कि केवल दावों के आधार पर नहीं, बल्कि मूल वित्तीय रिकॉर्ड और समझौतों की जांच के बाद ही मामले में निष्कर्ष निकाला जाए। अंतरिम आदेश से अंतिम फैसला नहीं अदालत द्वारा अंतरिम रोक की याचिका खारिज किए जाने के बावजूद क्लब की उप-पट्टेदारी, साझेदारी और निवेश को लेकर पक्षकारों के अंतिम अधिकार अभी तय नहीं हुए हैं। अदालत ने भी स्पष्ट किया है कि मौजूदा आदेश केवल अंतरिम राहत के सवाल तक सीमित है। मामले में आगे होने वाली सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *