राजकीय बालिका इंटर कॉलेजों में पुरुष प्रधानाचार्यों की नियुक्ति को लेकर राजकीय माध्यमिक शिक्षक संघ ने आपत्ति दर्ज कराई है। यह विवाद माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा लंबे इंतजार के बाद समूह ‘ख’ के 326 शिक्षकों और अधिकारियों को पदोन्नति देकर नई तैनाती दिए जाने के बाद सामने आया है। प्रयागराज में नियुक्ति पर ऐतराज मामले की शुरुआत प्रयागराज के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, धनूपुर से हुई, जहां कैलाश यादव को प्रधानाचार्य बनाए जाने पर संघ ने अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। संघ पदाधिकारियों का तर्क है कि बालिका इंटर कॉलेजों में छात्राओं की संवेदनशीलता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केवल महिला संवर्ग के व्यक्तियों को ही प्रधानाचार्य के पद पर नियुक्त किया जाना चाहिए। शासन को पत्र लिखकर मांग की पुनर्विचार राजकीय माध्यमिक शिक्षक संघ ने बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा को पत्र लिखकर मांग की है कि राजकीय बालिका इंटर कॉलेजों में पुरुष संवर्ग के व्यक्तियों को प्रधानाचार्य के पद पर नियुक्त न किया जाए। संघ के प्रांतीय महामंत्री अरुण यादव और प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर पांडेय ने इस कदम का विरोध किया है और कहा कि यह निर्णय छात्राओं और अभिभावकों की भावनाओं के विरुद्ध है। बेसिक अनुभाग में तैनाती पर भी सवाल संघ ने केवल बालिका इंटर कॉलेजों में पुरुष प्रधानाचार्यों की नियुक्ति का ही विरोध नहीं किया, बल्कि कई लोगों को बेसिक अनुभाग के संस्थानों में नियुक्त किए जाने को भी अनुचित बताया है। संघ का तर्क है कि बेसिक शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा विभाग के संस्थान अलग-अलग संवर्ग के आते हैं, इसलिए एक विभाग से दूसरे विभाग में तैनाती नियमानुसार नहीं है। रिक्त पदों पर तैनाती की मांग राजकीय माध्यमिक शिक्षक संघ का प्रमुख तर्क यह है कि प्रदेश के कई राजकीय विद्यालय वर्तमान में प्रधानाचार्य विहीन हैं। ऐसे में जिन्हें बेसिक अनुभाग में भेजा गया है, उन्हें वहां से हटाकर प्रदेश के राजकीय विद्यालयों के खाली प्रधानाचार्य पदों पर नियुक्त किया जाना चाहिए। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि यदि शासन स्तर पर इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे। माध्यमिक शिक्षा विभाग की स्थिति माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति और तैनाती का प्रक्रिया नियमानुसार की गई है और सभी नियुक्तियां वरियता सूची और पात्रता के आधार पर की गई हैं। हालांकि, संघ के विरोध के बाद अब इस मामले पर शासन स्तर पर पुनर्विचार की संभावना है।

