घर में बाढ़ का पानी, छत पर गुजर रही जिंदगी:समस्तीपुर के डुमरी दक्षिणी में 1 हजार लोग बाढ़ से घिरे; सिर छिपाने के लिए जगह नहीं

घर में बाढ़ का पानी, छत पर गुजर रही जिंदगी:समस्तीपुर के डुमरी दक्षिणी में 1 हजार लोग बाढ़ से घिरे; सिर छिपाने के लिए जगह नहीं

‘घर में पानी है, इसलिए छत पर रह रहे हैं और कहां जाए। सब जगह को पानी ही पानी है। अगर बारिश हो गई तो छत पर भीगने के अलावा को दूसरा कोई विकल्प नहीं है। हमें सरकार की तरफ से एक पन्नी तक नहीं मिला है। सिर छिपाने की जगह नहीं है।’ ये आपबीती समस्तीपुर में दुखनी देवी ने बताई है। ये अकेली नहीं हैं, जो इन परेशानियों को झेल रही है। समस्तीपुर के डुमरी दक्षिणी गांव में 1 हजार से अधिक लोग रह रहे हैं। जिनके घर में बाढ़ का पानी घुस गया है। गांव में करीब 500 पक्के मकान हैं। इनकी परेशानी जानने के लिए भास्कर टीम नाव से 3 किमी का सफर कर गांव तक पहुंची, वहां क्या था मंजर, ग्रामीणों ने क्या कहा, पढ़ें रिपोर्ट…. पहले कुछ तस्वीरें… ग्रामीण चिकित्सक के घर के दरवाजे पर 8 फीट पानी भास्कर रिपोर्टर गांव पहुंचे तो मुलाकात शिवशंकर राय से हुई, जो ग्रामीण चिकित्सक हैं। रिपोर्टर ने इच्छा जताई कि हम आपके घर चलकर देखना चाहते हैं कि स्थिति कैसी है। पहले वे तैयार नहीं हुए। उन्होंने कहा कि रात में नाव से जाना जोखिम भरा है। हमलोगों की बात अलग है। आपको तैरना नहीं आता है। गांव वालों के पास लाइफ जैकेट भी नहीं है। आप सुबह चलिए। हालांकि, आग्रह करने पर वे इस शर्त पर तैयार हुए कि 2 तैराक नाव में दोनों ओर बैठेंगे। बात-बात शिवशंकर ने बताया कि वे पटोरी से लोगों के लिए दवा लेकर लौटे थे, जिस कारण उन्हें रात हो गई थी। आने-जाने के लिए उनके पास अपनी नाव है। अंधेरी रात में बाढ़ के पानी के बीच से नाव उनके घर की ओर बढ़ी। रास्ते में पानी के बीच झुके पेड़ों की डालियां नाव को रोक रही थीं। नाविक राजू सहनी ने सावधानी से नाव को आगे बढ़ाते हुए किसी तरह उनके घर तक पहुंचाया। शिवशंकर के दरवाजे पर करीब आठ फीट पानी है। इस कारण नाव सीधे उनके घर के बरामदे तक पहुंच गई। मवेशियों के साथ छत पर सभी ने लिया शरण नाव से उतरकर जब घर के अंदर प्रवेश किया तो करीब 2 फीट पानी भरा था। किचन से लेकर बेडरूम तक पानी में डूबा था। पानी में सांप और कीड़े निकलने के डर से परिवार के लोग छत पर शरण लिए हुए हैं। जब रिपोर्टर घर की छत पर गए तो परिवार के लोग अपनी गाय के साथ छत पर रात गुजार रहे थे।
‘बारिश होने पर सीढ़ियों पर छिप जाते हैं’ शिवशंकर की भाभी रागिनी देवी मिट्टी के चूल्हे पर खाना बना रही थीं। उन्होंने कहा, “बहुत पानी हो गया है। डर लग रहा है। बच्चों को रिश्तेदारों के यहां पहुंचा दिया है। घर और पशुओं की सुरक्षा के कारण हम लोग छत पर रह रहे हैं। बारिश आने पर बिछावन समेटकर सीढ़ियों के पास चले जाते हैं। बारिश रुकने के बाद फिर बाहर आकर सोते हैं।” सुबह होने पर लगता है, जैसे जिंदगी मिल गई गांव के रौशन कुमार ने बताया कि घर में पानी घुस गया है और रात छत पर ही काटनी पड़ती है। कोई दूसरा उपाय नहीं है। सुबह होने पर लगता है कि जैसे एक और जिंदगी मिल गई। रात के समय पानी में किसी भी तरह की हलचल होने पर लोगों की नींद खुल जाती है। लोग रात किसी तरह काटकर सुबह होने का इंतजार करते रहते हैं।
फोरलेन पर अस्थायी डेरा दूसरी तरफ बाढ़ पीड़ितों का एक बड़ा तबका अपने पशुओं के साथ बांध पर डेरा डाले हुए है। दुधारू पशु पालने वाले लोग पशुओं का दूध बेचकर अपने परिवार के भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं। फोरलेन समेत कई स्थानों पर पशुपालकों ने अस्थायी डेरा डाल रखा है। ‘घर में पानी है, इसलिए छत पर रह रहे हैं और कहां जाए। सब जगह को पानी ही पानी है। अगर बारिश हो गई तो छत पर भीगने के अलावा को दूसरा कोई विकल्प नहीं है। हमें सरकार की तरफ से एक पन्नी तक नहीं मिला है। सिर छिपाने की जगह नहीं है।’ ये आपबीती समस्तीपुर में दुखनी देवी ने बताई है। ये अकेली नहीं हैं, जो इन परेशानियों को झेल रही है। समस्तीपुर के डुमरी दक्षिणी गांव में 1 हजार से अधिक लोग रह रहे हैं। जिनके घर में बाढ़ का पानी घुस गया है। गांव में करीब 500 पक्के मकान हैं। इनकी परेशानी जानने के लिए भास्कर टीम नाव से 3 किमी का सफर कर गांव तक पहुंची, वहां क्या था मंजर, ग्रामीणों ने क्या कहा, पढ़ें रिपोर्ट…. पहले कुछ तस्वीरें… ग्रामीण चिकित्सक के घर के दरवाजे पर 8 फीट पानी भास्कर रिपोर्टर गांव पहुंचे तो मुलाकात शिवशंकर राय से हुई, जो ग्रामीण चिकित्सक हैं। रिपोर्टर ने इच्छा जताई कि हम आपके घर चलकर देखना चाहते हैं कि स्थिति कैसी है। पहले वे तैयार नहीं हुए। उन्होंने कहा कि रात में नाव से जाना जोखिम भरा है। हमलोगों की बात अलग है। आपको तैरना नहीं आता है। गांव वालों के पास लाइफ जैकेट भी नहीं है। आप सुबह चलिए। हालांकि, आग्रह करने पर वे इस शर्त पर तैयार हुए कि 2 तैराक नाव में दोनों ओर बैठेंगे। बात-बात शिवशंकर ने बताया कि वे पटोरी से लोगों के लिए दवा लेकर लौटे थे, जिस कारण उन्हें रात हो गई थी। आने-जाने के लिए उनके पास अपनी नाव है। अंधेरी रात में बाढ़ के पानी के बीच से नाव उनके घर की ओर बढ़ी। रास्ते में पानी के बीच झुके पेड़ों की डालियां नाव को रोक रही थीं। नाविक राजू सहनी ने सावधानी से नाव को आगे बढ़ाते हुए किसी तरह उनके घर तक पहुंचाया। शिवशंकर के दरवाजे पर करीब आठ फीट पानी है। इस कारण नाव सीधे उनके घर के बरामदे तक पहुंच गई। मवेशियों के साथ छत पर सभी ने लिया शरण नाव से उतरकर जब घर के अंदर प्रवेश किया तो करीब 2 फीट पानी भरा था। किचन से लेकर बेडरूम तक पानी में डूबा था। पानी में सांप और कीड़े निकलने के डर से परिवार के लोग छत पर शरण लिए हुए हैं। जब रिपोर्टर घर की छत पर गए तो परिवार के लोग अपनी गाय के साथ छत पर रात गुजार रहे थे।
‘बारिश होने पर सीढ़ियों पर छिप जाते हैं’ शिवशंकर की भाभी रागिनी देवी मिट्टी के चूल्हे पर खाना बना रही थीं। उन्होंने कहा, “बहुत पानी हो गया है। डर लग रहा है। बच्चों को रिश्तेदारों के यहां पहुंचा दिया है। घर और पशुओं की सुरक्षा के कारण हम लोग छत पर रह रहे हैं। बारिश आने पर बिछावन समेटकर सीढ़ियों के पास चले जाते हैं। बारिश रुकने के बाद फिर बाहर आकर सोते हैं।” सुबह होने पर लगता है, जैसे जिंदगी मिल गई गांव के रौशन कुमार ने बताया कि घर में पानी घुस गया है और रात छत पर ही काटनी पड़ती है। कोई दूसरा उपाय नहीं है। सुबह होने पर लगता है कि जैसे एक और जिंदगी मिल गई। रात के समय पानी में किसी भी तरह की हलचल होने पर लोगों की नींद खुल जाती है। लोग रात किसी तरह काटकर सुबह होने का इंतजार करते रहते हैं।
फोरलेन पर अस्थायी डेरा दूसरी तरफ बाढ़ पीड़ितों का एक बड़ा तबका अपने पशुओं के साथ बांध पर डेरा डाले हुए है। दुधारू पशु पालने वाले लोग पशुओं का दूध बेचकर अपने परिवार के भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं। फोरलेन समेत कई स्थानों पर पशुपालकों ने अस्थायी डेरा डाल रखा है।  

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