नालंदा की लोकाइन और पंचाने नदी में गंगा का पानी का चुका है। सरमेरा प्रखंड के टाल इलाके में गंगा का बैकवाटर तेजी से फैल रहा है, जिससे बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। चेरो पंचायत के पेंदी गांव से लेकर पूर्वी टाल क्षेत्र के खेतों में करीब 5 फीट तक पानी भर चुका है। जलस्तर में अचानक वृद्धि से पेंदी और पुरानी इसुआ गांव के किसानों की 200 बीघे से अधिक में लगी धान की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई है। पेंदी गांव के मुहाने पर बसे कई घर चारों तरफ से पानी से घिर चुके हैं। पानी का फैलाव अब पुरानी इसुआ गांव की ओर भी तेज हो गया है। हालात को देखते हुए प्रखंड 20 सूत्री क्रियान्वयन समिति के अध्यक्ष विजय प्रसाद ने जिलाधिकारी से प्रभावित इलाकों में फसल क्षति का त्वरित सर्वेक्षण कराकर किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। लोकाइन-पंचाने शांत, बराज के सभी फाटक बंद होने से राहत एक ओर जहां गंगा का पानी सरमेरा में दहशत फैला रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले की अन्य नदियों ने लोगों को बड़ी राहत दी है। पश्चिमी क्षेत्र की लोकाइन, भूतही, कड़ुआ और पूर्वी क्षेत्र की जिरायन, गोइठवा और सकरी नदी का जलस्तर काफी नीचे चला गया है। मध्य हिस्से से बहने वाली पंचाने नदी भी शांत है। जहानाबाद में फल्गु का जलस्तर घटने के बाद उदेरा स्थान बराज के सभी गेट बंद कर दिए गए हैं, जिससे लोकाइन में अतिरिक्त पानी का बहाव रुक गया है। इससे हिलसा, एकंगरसराय और करायपरसुराय पर मंडरा रहा खतरा टल गया है। उधर, ओंदा गांव के समीप टूटे तटबंध की मरम्मत होने से दर्जनभर गांवों के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। नूरसराय: सासी नदी का छिलका क्षतिग्रस्त, युद्धस्तर पर मरम्मत इधर नूरसराय प्रखंड की नदिऔना पंचायत स्थित सरगांव में सासी नदी पर बना छिलका अचानक टूट गया, जिससे धान के लिए जरूरी पानी नदी में व्यर्थ बहने लगा। सिंचाई ठप होने से करीब पांच मौजा के किसानों की चिंता बढ़ गई। ग्रामीणों की सूचना पर बीडीओ डॉ. जियाउल हक और सीओ दीपक कुमार ने घटनास्थल का जायजा लिया। सीओ ने बताया कि सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के समन्वय से युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य शुरू करा दिया गया है, ताकि किसानों को समय पर पटवन का पानी मिल सके। नालंदा की लोकाइन और पंचाने नदी में गंगा का पानी का चुका है। सरमेरा प्रखंड के टाल इलाके में गंगा का बैकवाटर तेजी से फैल रहा है, जिससे बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। चेरो पंचायत के पेंदी गांव से लेकर पूर्वी टाल क्षेत्र के खेतों में करीब 5 फीट तक पानी भर चुका है। जलस्तर में अचानक वृद्धि से पेंदी और पुरानी इसुआ गांव के किसानों की 200 बीघे से अधिक में लगी धान की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई है। पेंदी गांव के मुहाने पर बसे कई घर चारों तरफ से पानी से घिर चुके हैं। पानी का फैलाव अब पुरानी इसुआ गांव की ओर भी तेज हो गया है। हालात को देखते हुए प्रखंड 20 सूत्री क्रियान्वयन समिति के अध्यक्ष विजय प्रसाद ने जिलाधिकारी से प्रभावित इलाकों में फसल क्षति का त्वरित सर्वेक्षण कराकर किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। लोकाइन-पंचाने शांत, बराज के सभी फाटक बंद होने से राहत एक ओर जहां गंगा का पानी सरमेरा में दहशत फैला रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले की अन्य नदियों ने लोगों को बड़ी राहत दी है। पश्चिमी क्षेत्र की लोकाइन, भूतही, कड़ुआ और पूर्वी क्षेत्र की जिरायन, गोइठवा और सकरी नदी का जलस्तर काफी नीचे चला गया है। मध्य हिस्से से बहने वाली पंचाने नदी भी शांत है। जहानाबाद में फल्गु का जलस्तर घटने के बाद उदेरा स्थान बराज के सभी गेट बंद कर दिए गए हैं, जिससे लोकाइन में अतिरिक्त पानी का बहाव रुक गया है। इससे हिलसा, एकंगरसराय और करायपरसुराय पर मंडरा रहा खतरा टल गया है। उधर, ओंदा गांव के समीप टूटे तटबंध की मरम्मत होने से दर्जनभर गांवों के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। नूरसराय: सासी नदी का छिलका क्षतिग्रस्त, युद्धस्तर पर मरम्मत इधर नूरसराय प्रखंड की नदिऔना पंचायत स्थित सरगांव में सासी नदी पर बना छिलका अचानक टूट गया, जिससे धान के लिए जरूरी पानी नदी में व्यर्थ बहने लगा। सिंचाई ठप होने से करीब पांच मौजा के किसानों की चिंता बढ़ गई। ग्रामीणों की सूचना पर बीडीओ डॉ. जियाउल हक और सीओ दीपक कुमार ने घटनास्थल का जायजा लिया। सीओ ने बताया कि सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के समन्वय से युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य शुरू करा दिया गया है, ताकि किसानों को समय पर पटवन का पानी मिल सके।

