तीर-धनुष लेकर अंचल कार्यालय पहुंचे आदिवासी:पोठिया में कोल्था पंचायत के सिंघीमारी स्थित सरकारी भूमि की बंदोबस्ती की मांग को लेकर किया प्रदर्शन

तीर-धनुष लेकर अंचल कार्यालय पहुंचे आदिवासी:पोठिया में कोल्था पंचायत के सिंघीमारी स्थित सरकारी भूमि की बंदोबस्ती की मांग को लेकर किया प्रदर्शन

मंगलवार को पोठिया अंचल कार्यालय में सैकड़ों आदिवासियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। वे परलाबाड़ी और कोल्था पंचायत के सिंघीमारी स्थित सरकारी भूमि की बंदोबस्ती की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारी पारंपरिक तीर-धनुष और ढोल-नगाड़ों के साथ पहुंचे और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। अंचल कार्यालय में आदिवासियों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया था। प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों से बातचीत की गई। आदिवासी संगठन के प्रतिनिधि मुकेश हेम्ब्रम ने बताया कि पोठिया अंचल के मौजा रसियाडांगी (थाना नंबर-168, खाता नंबर-32 और खेसरा नंबर 195, 196, 197, 224 एवं 225) में कुल 202 एकड़ बिहार सरकार की गैर-मजरूआ भूमि दर्ज है। उन्होंने दावा किया कि इसमें से करीब 85 एकड़ जमीन पर आदिवासी समुदाय का उनके पूर्वजों के समय से कब्जा है और वे उस पर खेती कर रहे हैं। हेम्ब्रम ने आरोप लगाया कि अब स्थानीय शेरशाहवादी समुदाय के लोग इस जमीन पर अपना दावा कर रहे हैं। आदिवासी समुदाय ने अंचल अधिकारी से मांग की कि जो आदिवासी परिवार पहले से 85 एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं, उनकी नियमानुसार बंदोबस्ती की जाए। प्रशासन की पहल पर अंचल अधिकारी ने दोनों पक्षों के पांच-पांच प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। उन्होंने मामले में उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है। गौरतलब है कि कोल्था पंचायत के सिंघीमारी गांव में बिहार सरकार की जमीन पर कब्जे को लेकर 4 सितंबर को आदिवासी और शेरशाहवादी समुदाय के बीच तनाव हो गया था। सूचना मिलने पर एसडीपीओ-2 मनोज कुमार, सर्किल इंस्पेक्टर पंकज पंथ, अंचल अधिकारी मोहित राज, पहाड़कट्टा थानाध्यक्ष फुलेंद्र कुमार और छत्तरगाछ कैंप प्रभारी शैलेश कुमार सहित कई पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बात करके स्थिति को संभाला था। मंगलवार को पोठिया अंचल कार्यालय में सैकड़ों आदिवासियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। वे परलाबाड़ी और कोल्था पंचायत के सिंघीमारी स्थित सरकारी भूमि की बंदोबस्ती की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारी पारंपरिक तीर-धनुष और ढोल-नगाड़ों के साथ पहुंचे और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। अंचल कार्यालय में आदिवासियों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया था। प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों से बातचीत की गई। आदिवासी संगठन के प्रतिनिधि मुकेश हेम्ब्रम ने बताया कि पोठिया अंचल के मौजा रसियाडांगी (थाना नंबर-168, खाता नंबर-32 और खेसरा नंबर 195, 196, 197, 224 एवं 225) में कुल 202 एकड़ बिहार सरकार की गैर-मजरूआ भूमि दर्ज है। उन्होंने दावा किया कि इसमें से करीब 85 एकड़ जमीन पर आदिवासी समुदाय का उनके पूर्वजों के समय से कब्जा है और वे उस पर खेती कर रहे हैं। हेम्ब्रम ने आरोप लगाया कि अब स्थानीय शेरशाहवादी समुदाय के लोग इस जमीन पर अपना दावा कर रहे हैं। आदिवासी समुदाय ने अंचल अधिकारी से मांग की कि जो आदिवासी परिवार पहले से 85 एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं, उनकी नियमानुसार बंदोबस्ती की जाए। प्रशासन की पहल पर अंचल अधिकारी ने दोनों पक्षों के पांच-पांच प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। उन्होंने मामले में उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है। गौरतलब है कि कोल्था पंचायत के सिंघीमारी गांव में बिहार सरकार की जमीन पर कब्जे को लेकर 4 सितंबर को आदिवासी और शेरशाहवादी समुदाय के बीच तनाव हो गया था। सूचना मिलने पर एसडीपीओ-2 मनोज कुमार, सर्किल इंस्पेक्टर पंकज पंथ, अंचल अधिकारी मोहित राज, पहाड़कट्टा थानाध्यक्ष फुलेंद्र कुमार और छत्तरगाछ कैंप प्रभारी शैलेश कुमार सहित कई पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बात करके स्थिति को संभाला था।  

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