बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने केंद्र और बिहार सरकार पर निशाना साधा है। लालू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो पोस्ट कर बिहार को मिलने वाली केंद्रीय सहायता, बाढ़ के स्थायी समाधान और राज्य के कम क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो (CDR) को लेकर सवाल उठाए। लालू यादव ने कहा कि एक दशक बाद आई भीषण बाढ़ के बीच बिहार सरकार का खजाना खाली और राजकोषीय तनाव चरम पर है। उन्होंने अपने राजनीतिक संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने पक्ष और विपक्ष, दोनों में रहते हुए बिहार और बिहारियों के हक के लिए लड़ाई लड़ी। 2004-09 के पैकेज का किया जिक्र लालू यादव ने दावा किया कि 2004 में 24 आरजेडी सांसदों के साथ यूपीए-1 सरकार में रेल मंत्री बनने के बाद उन्होंने अपने राजनीतिक प्रभाव के जरिए बिहार के विकास कार्यों के लिए 2004 से 2009 के बीच 1.44 लाख करोड़ रुपये की राशि दिलाई। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी का भी जिक्र किया। लालू ने आरोप लगाया कि बाद में इसी पैकेज की राशि से नीतीश कुमार की सरकार ने अपना विकास मॉडल खड़ा किया। ‘NDA के 30 सांसद, फिर भी दिल्ली में बिहार की सुनवाई नहीं’ आरजेडी प्रमुख ने कहा कि एनडीए के पास बिहार से 30 सांसद होने के बावजूद आज दिल्ली में बिहार की समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है। उन्होंने केंद्र और राज्य में एनडीए की सरकार होने के बावजूद बाढ़ के स्थायी समाधान नहीं होने पर सवाल उठाया। नेपाल से आने वाली बाढ़ पर स्थायी समाधान की मांग लालू यादव ने नेपाल से आने वाली बाढ़ को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि नदियों के रखरखाव के लिए नेपाल सरकार से दो टूक बातचीत होनी चाहिए। उन्होंने कर्पूरी ठाकुर द्वारा भी इस मुद्दे को उठाए जाने का जिक्र किया। ‘बाढ़ आने पर राहत नहीं, स्थायी समाधान चाहिए’ लालू यादव ने कहा कि चुनाव और बाढ़ के समय मुफ्तखोरी की घोषणाएं तथा दो किलो मुफ्त अनाज का लालच देने के बजाय सरकार को बाढ़ का स्थायी समाधान करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि नदियों के रखरखाव पर खर्च होने वाली राशि बिहार को नहीं मिल रही है। पलायन और CDR पर भी उठाए सवाल आरजेडी प्रमुख ने बिहार से बड़े पैमाने पर होने वाले पलायन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बिहार के लोग देश-विदेश में मेहनत कर कमाई करते हैं और उसका पैसा राज्य में भेजते हैं, लेकिन उसके अनुपात में बिहार में खर्च नहीं होता। उन्होंने Credit Deposit Ratio (CDR) का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि बिहार का साख-जमा अनुपात देश में सबसे कम क्यों है। लालू यादव ने कहा कि “हम भीख नहीं मांग रहे हैं, क्रेडिट के अनुरूप पैसा बिहार को दो।” उन्होंने अपने 2011 के संसद भाषण का वीडियो भी साझा किया और कहा कि उस समय केंद्र में यूपीए-2 और बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार थी, फिर भी उन्होंने दिल्ली में बिहार के मुद्दों को उठाया था। बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने केंद्र और बिहार सरकार पर निशाना साधा है। लालू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो पोस्ट कर बिहार को मिलने वाली केंद्रीय सहायता, बाढ़ के स्थायी समाधान और राज्य के कम क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो (CDR) को लेकर सवाल उठाए। लालू यादव ने कहा कि एक दशक बाद आई भीषण बाढ़ के बीच बिहार सरकार का खजाना खाली और राजकोषीय तनाव चरम पर है। उन्होंने अपने राजनीतिक संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने पक्ष और विपक्ष, दोनों में रहते हुए बिहार और बिहारियों के हक के लिए लड़ाई लड़ी। 2004-09 के पैकेज का किया जिक्र लालू यादव ने दावा किया कि 2004 में 24 आरजेडी सांसदों के साथ यूपीए-1 सरकार में रेल मंत्री बनने के बाद उन्होंने अपने राजनीतिक प्रभाव के जरिए बिहार के विकास कार्यों के लिए 2004 से 2009 के बीच 1.44 लाख करोड़ रुपये की राशि दिलाई। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी का भी जिक्र किया। लालू ने आरोप लगाया कि बाद में इसी पैकेज की राशि से नीतीश कुमार की सरकार ने अपना विकास मॉडल खड़ा किया। ‘NDA के 30 सांसद, फिर भी दिल्ली में बिहार की सुनवाई नहीं’ आरजेडी प्रमुख ने कहा कि एनडीए के पास बिहार से 30 सांसद होने के बावजूद आज दिल्ली में बिहार की समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है। उन्होंने केंद्र और राज्य में एनडीए की सरकार होने के बावजूद बाढ़ के स्थायी समाधान नहीं होने पर सवाल उठाया। नेपाल से आने वाली बाढ़ पर स्थायी समाधान की मांग लालू यादव ने नेपाल से आने वाली बाढ़ को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि नदियों के रखरखाव के लिए नेपाल सरकार से दो टूक बातचीत होनी चाहिए। उन्होंने कर्पूरी ठाकुर द्वारा भी इस मुद्दे को उठाए जाने का जिक्र किया। ‘बाढ़ आने पर राहत नहीं, स्थायी समाधान चाहिए’ लालू यादव ने कहा कि चुनाव और बाढ़ के समय मुफ्तखोरी की घोषणाएं तथा दो किलो मुफ्त अनाज का लालच देने के बजाय सरकार को बाढ़ का स्थायी समाधान करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि नदियों के रखरखाव पर खर्च होने वाली राशि बिहार को नहीं मिल रही है। पलायन और CDR पर भी उठाए सवाल आरजेडी प्रमुख ने बिहार से बड़े पैमाने पर होने वाले पलायन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बिहार के लोग देश-विदेश में मेहनत कर कमाई करते हैं और उसका पैसा राज्य में भेजते हैं, लेकिन उसके अनुपात में बिहार में खर्च नहीं होता। उन्होंने Credit Deposit Ratio (CDR) का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि बिहार का साख-जमा अनुपात देश में सबसे कम क्यों है। लालू यादव ने कहा कि “हम भीख नहीं मांग रहे हैं, क्रेडिट के अनुरूप पैसा बिहार को दो।” उन्होंने अपने 2011 के संसद भाषण का वीडियो भी साझा किया और कहा कि उस समय केंद्र में यूपीए-2 और बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार थी, फिर भी उन्होंने दिल्ली में बिहार के मुद्दों को उठाया था।

