पटना में गंगा का रौद्र रूप, 29 लाख लोग प्रभावित:मनेर, दीघा और गांधी घाट पर खतरे के निशान से ऊपर, 77 प्रखंडों की 438 पंचायतें पर असर

पटना में गंगा का रौद्र रूप, 29 लाख लोग प्रभावित:मनेर, दीघा और गांधी घाट पर खतरे के निशान से ऊपर, 77 प्रखंडों की 438 पंचायतें पर असर

बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। गंगा समेत कई प्रमुख नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण राज्य के कई जिलों में जनजीवन प्रभावित है। राज्य के 13 जिलों के 77 प्रखंडों की 438 ग्राम पंचायतों में करीब 29.13 लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। पटना और आसपास के इलाकों में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि पटना के मनेर, दीघा घाट और गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है। पिछले दो दिनों के आंकड़ों की तुलना में इन स्थानों पर पानी में और बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दीघा घाट पर खतरे के निशान से 1.09 मीटर ऊपर गंगा पटना के दीघा घाट पर गंगा का जलस्तर 51.54 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 50.45 मीटर है। यानी गंगा खतरे के निशान से 1.09 मीटर ऊपर बह रही है। 6 सितंबर की सुबह दीघा घाट पर जलस्तर 50.57 मीटर दर्ज किया गया था। इस तरह दो दिनों के दौरान यहां जलस्तर में करीब 0.97 मीटर की बढ़ोतरी हुई है। गांधी घाट पर भी खतरे के निशान से 1.71 मीटर ऊपर पानी पटना के गांधी घाट पर 8 सितंबर की सुबह गंगा का जलस्तर 50.31 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 48.60 मीटर है। इस तरह गंगा यहां खतरे के निशान से 1.71 मीटर ऊपर बह रही है। 6 सितंबर को गांधी घाट पर जलस्तर 49.63 मीटर दर्ज किया गया था। इसके मुकाबले दो दिनों में यहां 0.68 मीटर की बढ़ोतरी हुई है। मनेर में गंगा 1.40 मीटर ऊपर, दो दिनों में 1.77 मीटर बढ़ा पानी पटना जिले के मनेर में गंगा का जलस्तर 8 सितंबर की सुबह 53.40 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 52 मीटर है। यानी गंगा खतरे के निशान से 1.40 मीटर ऊपर बह रही है। 6 सितंबर को मनेर में जलस्तर 51.63 मीटर था। दो दिनों में यहां पानी करीब 1.77 मीटर बढ़ गया है, जिससे दियारा और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। हाथीदह और श्रीपालपुर में भी खतरे के निशान से ऊपर नदियां 8 सितंबर की सुबह जारी रिपोर्ट के अनुसार पटना और आसपास के कई इलाकों में जलस्तर चिंताजनक बना हुआ है। जल संसाधन विभाग और बाढ़ नियंत्रण विभाग लगातार नदियों की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। राज्य के 13 जिलों के 77 प्रखंडों में बाढ़ का असर विभिन्न नदियों के जलस्तर में आई वृद्धि के कारण राज्य के 13 जिलों के 77 प्रखंडों की 438 ग्राम पंचायतों में बाढ़ का असर है। करीब 29.13 लाख की आबादी प्रभावित बताई गई है। बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य लगातार चलाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से निचले इलाकों और प्रभावित गांवों पर विशेष नजर रखी जा रही है। गंडक का जलप्रवाह स्थिर, कोसी में कमी और सोन में बढ़ोतरी गंडक नदी – वाल्मीकिनगर बराज पर 7 सितंबर की सुबह 6 बजे गंडक नदी का जलप्रवाह 1,14,000 क्यूसेक दर्ज किया गया। नदी की प्रवृत्ति स्थिर बताई गई है। इस वर्ष अब तक गंडक का अधिकतम जलप्रवाह 14 जुलाई को 2,14,000 क्यूसेक दर्ज किया गया था। कोसी नदी – वीरपुर बराज पर कोसी नदी का जलप्रवाह 2,02,670 क्यूसेक दर्ज किया गया है। नदी के जलप्रवाह में कमी की प्रवृत्ति बताई गई है। इस वर्ष अब तक कोसी का अधिकतम जलप्रवाह 20 जुलाई को 2,55,425 क्यूसेक दर्ज किया गया था। सोन नदी – इंद्रपुरी बराज पर सोन नदी का जलप्रवाह 1,33,427 क्यूसेक दर्ज किया गया है और इसमें बढ़ोतरी की प्रवृत्ति बनी हुई है। इस वर्ष अब तक सोन नदी का अधिकतम जलप्रवाह 20 जून को 6,36,354 क्यूसेक दर्ज किया गया था। बारिश सामान्य से कम, फिर भी नदियों के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ की स्थिति बिहार मौसम सेवा केंद्र के अनुसार राज्य में इस वर्ष बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई है। इसके बावजूद नदियों के जलस्तर में वृद्धि और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी के कारण कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। 1 जून से 7 सितंबर तक कुल 597.4 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 27 प्रतिशत कम है। अगले दो दिनों तक कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के दौरान बिहार के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम स्तर की बारिश होने की संभावना जताई है। कुछ स्थानों पर भारी बारिश की भी संभावना व्यक्त की गई है। ऐसे में पहले से उफान पर चल रही नदियों के जलस्तर और बाढ़ प्रभावित इलाकों पर प्रशासन की नजर और बढ़ गई है। बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। गंगा समेत कई प्रमुख नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण राज्य के कई जिलों में जनजीवन प्रभावित है। राज्य के 13 जिलों के 77 प्रखंडों की 438 ग्राम पंचायतों में करीब 29.13 लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। पटना और आसपास के इलाकों में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि पटना के मनेर, दीघा घाट और गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है। पिछले दो दिनों के आंकड़ों की तुलना में इन स्थानों पर पानी में और बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दीघा घाट पर खतरे के निशान से 1.09 मीटर ऊपर गंगा पटना के दीघा घाट पर गंगा का जलस्तर 51.54 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 50.45 मीटर है। यानी गंगा खतरे के निशान से 1.09 मीटर ऊपर बह रही है। 6 सितंबर की सुबह दीघा घाट पर जलस्तर 50.57 मीटर दर्ज किया गया था। इस तरह दो दिनों के दौरान यहां जलस्तर में करीब 0.97 मीटर की बढ़ोतरी हुई है। गांधी घाट पर भी खतरे के निशान से 1.71 मीटर ऊपर पानी पटना के गांधी घाट पर 8 सितंबर की सुबह गंगा का जलस्तर 50.31 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 48.60 मीटर है। इस तरह गंगा यहां खतरे के निशान से 1.71 मीटर ऊपर बह रही है। 6 सितंबर को गांधी घाट पर जलस्तर 49.63 मीटर दर्ज किया गया था। इसके मुकाबले दो दिनों में यहां 0.68 मीटर की बढ़ोतरी हुई है। मनेर में गंगा 1.40 मीटर ऊपर, दो दिनों में 1.77 मीटर बढ़ा पानी पटना जिले के मनेर में गंगा का जलस्तर 8 सितंबर की सुबह 53.40 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 52 मीटर है। यानी गंगा खतरे के निशान से 1.40 मीटर ऊपर बह रही है। 6 सितंबर को मनेर में जलस्तर 51.63 मीटर था। दो दिनों में यहां पानी करीब 1.77 मीटर बढ़ गया है, जिससे दियारा और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। हाथीदह और श्रीपालपुर में भी खतरे के निशान से ऊपर नदियां 8 सितंबर की सुबह जारी रिपोर्ट के अनुसार पटना और आसपास के कई इलाकों में जलस्तर चिंताजनक बना हुआ है। जल संसाधन विभाग और बाढ़ नियंत्रण विभाग लगातार नदियों की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। राज्य के 13 जिलों के 77 प्रखंडों में बाढ़ का असर विभिन्न नदियों के जलस्तर में आई वृद्धि के कारण राज्य के 13 जिलों के 77 प्रखंडों की 438 ग्राम पंचायतों में बाढ़ का असर है। करीब 29.13 लाख की आबादी प्रभावित बताई गई है। बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य लगातार चलाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से निचले इलाकों और प्रभावित गांवों पर विशेष नजर रखी जा रही है। गंडक का जलप्रवाह स्थिर, कोसी में कमी और सोन में बढ़ोतरी गंडक नदी – वाल्मीकिनगर बराज पर 7 सितंबर की सुबह 6 बजे गंडक नदी का जलप्रवाह 1,14,000 क्यूसेक दर्ज किया गया। नदी की प्रवृत्ति स्थिर बताई गई है। इस वर्ष अब तक गंडक का अधिकतम जलप्रवाह 14 जुलाई को 2,14,000 क्यूसेक दर्ज किया गया था। कोसी नदी – वीरपुर बराज पर कोसी नदी का जलप्रवाह 2,02,670 क्यूसेक दर्ज किया गया है। नदी के जलप्रवाह में कमी की प्रवृत्ति बताई गई है। इस वर्ष अब तक कोसी का अधिकतम जलप्रवाह 20 जुलाई को 2,55,425 क्यूसेक दर्ज किया गया था। सोन नदी – इंद्रपुरी बराज पर सोन नदी का जलप्रवाह 1,33,427 क्यूसेक दर्ज किया गया है और इसमें बढ़ोतरी की प्रवृत्ति बनी हुई है। इस वर्ष अब तक सोन नदी का अधिकतम जलप्रवाह 20 जून को 6,36,354 क्यूसेक दर्ज किया गया था। बारिश सामान्य से कम, फिर भी नदियों के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ की स्थिति बिहार मौसम सेवा केंद्र के अनुसार राज्य में इस वर्ष बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई है। इसके बावजूद नदियों के जलस्तर में वृद्धि और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी के कारण कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। 1 जून से 7 सितंबर तक कुल 597.4 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 27 प्रतिशत कम है। अगले दो दिनों तक कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के दौरान बिहार के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम स्तर की बारिश होने की संभावना जताई है। कुछ स्थानों पर भारी बारिश की भी संभावना व्यक्त की गई है। ऐसे में पहले से उफान पर चल रही नदियों के जलस्तर और बाढ़ प्रभावित इलाकों पर प्रशासन की नजर और बढ़ गई है।  

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