सुपौल में सोमवार की रात मदरसे में चार छात्राओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई। सभी को बेहोशी की स्थिति में सुपौल शहर के निजी क्लीनिक में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान मंगलवार को एक छात्र की मौत हो गई। घटना सदर थाना क्षेत्र के बसबिट्टी वार्ड नंबर-19 स्थित जामियअतुस सालिहात एजुकेशनल ट्रस्ट में संचालित निजी मदरसे की है। मृतक की पहचान नेमुआ निवासी कमरे आलम की बेटी अल्फिशा (10) के रूप में हुई है। घटना के बाद मदरसे में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। 2 साल से मदरसा परिसर में रह रही थी बच्ची मदरसा प्रबंधन के अनुसार, यहां करीब 60-65 छात्राएं रहकर पढ़ाई करती हैं। संस्था लगभग 2 साल से संचालित है। मृत बच्ची भी करीब डेढ़-दो साल से इसी परिसर में रह रही थी। संचालक खलील रहमान ने बताया कि सोमवार को अल्फिशा की मां बच्ची से मिलने आई थीं। वह मिठाई और समोसा देकर वापस चली गईं। इसके बाद इन्हें खाने वाली चार छात्राओं की तबीयत अचानक खराब हो गई। आफिया, सहाना खातून, हलीमा सादिया और अल्फिशा बेहोश हो गईं। आनन-फानन में सभी को इलाज के लिए निजी चिकित्सक के पास ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान अल्फिशा ने दम तोड़ दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम मदरसे पहुंची। परिसर का निरीक्षण करने के साथ संचालक और वहां मौजूद शिक्षकों से पूछताछ की गई। परिजन ने शव का पोस्टमॉर्टम कराने से किया इनकार सदर एसडीपीओ ने भी प्रबंधन से घटनाक्रम की जानकारी ली। पुलिस छात्राओं के बीमार पड़ने की वजह, खाने की गुणवत्ता और घटनाक्रम से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। मृतका के परिजनों ने शव का पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार किया है। सदर एसडीएम मनोहर कुमार साह ने बताया कि सूचना मिलने के बाद वे एसडीपीओ और थाना प्रभारी के साथ मौके पर पहुंचे। मदरसे में बड़ी संख्या में बच्चियां आवासीय सुविधा के तहत रह रही हैं। इनमें एक छात्रा की मौत हुई है, जबकि दो-तीन अन्य का अलग-अलग अस्पतालों में उपचार चल रहा है। प्रशासन उनके स्वास्थ्य की जानकारी ले रहा है। उन्होंने बताया कि जिला शिक्षा कार्यालय से डीपीओ सहित पदाधिकारी मदरसे के दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि संस्था को छात्राओं को आवासीय रूप से रखने की अनुमति है या नहीं और इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है अथवा नहीं। पुलिस की ओर से भी घटना की अलग से पड़ताल की जा रही है। डीएम के निर्देश पर शिक्षा विभाग की टीम पहुंची मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम सावन कुमार के निर्देश पर जिला शिक्षा कार्यालय की टीम मदरसे पहुंची। अधिकारियों ने संस्था के संचालन, उपलब्ध सुविधाओं और छात्राओं के रहने की व्यवस्था से संबंधित जानकारी जुटाई। दस्तावेजों की जांच के साथ घटना के कारणों का भी पता लगाया जा रहा है। सदर डीएसपी के अनुसार, शुरुआती तौर पर मामला फूड प्वाइजनिंग का प्रतीत हो रहा है। हालांकि घटना की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस और प्रशासन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर पड़ताल कर रहे हैं। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। SP शरथ आर.एस ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि बसबिट्टी स्थित एक मदरसे में पढ़ने वाली एक बच्ची की मौत हो गई है, जबकि एक अन्य बच्ची गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। दो-तीन अन्य बच्चों के भी अस्पताल में भर्ती होने की सूचना है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। डॉक्टरों से बातचीत और जांच के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने के वास्तविक कारण की जानकारी सामने आएगी। सुपौल में सोमवार की रात मदरसे में चार छात्राओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई। सभी को बेहोशी की स्थिति में सुपौल शहर के निजी क्लीनिक में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान मंगलवार को एक छात्र की मौत हो गई। घटना सदर थाना क्षेत्र के बसबिट्टी वार्ड नंबर-19 स्थित जामियअतुस सालिहात एजुकेशनल ट्रस्ट में संचालित निजी मदरसे की है। मृतक की पहचान नेमुआ निवासी कमरे आलम की बेटी अल्फिशा (10) के रूप में हुई है। घटना के बाद मदरसे में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। 2 साल से मदरसा परिसर में रह रही थी बच्ची मदरसा प्रबंधन के अनुसार, यहां करीब 60-65 छात्राएं रहकर पढ़ाई करती हैं। संस्था लगभग 2 साल से संचालित है। मृत बच्ची भी करीब डेढ़-दो साल से इसी परिसर में रह रही थी। संचालक खलील रहमान ने बताया कि सोमवार को अल्फिशा की मां बच्ची से मिलने आई थीं। वह मिठाई और समोसा देकर वापस चली गईं। इसके बाद इन्हें खाने वाली चार छात्राओं की तबीयत अचानक खराब हो गई। आफिया, सहाना खातून, हलीमा सादिया और अल्फिशा बेहोश हो गईं। आनन-फानन में सभी को इलाज के लिए निजी चिकित्सक के पास ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान अल्फिशा ने दम तोड़ दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम मदरसे पहुंची। परिसर का निरीक्षण करने के साथ संचालक और वहां मौजूद शिक्षकों से पूछताछ की गई। परिजन ने शव का पोस्टमॉर्टम कराने से किया इनकार सदर एसडीपीओ ने भी प्रबंधन से घटनाक्रम की जानकारी ली। पुलिस छात्राओं के बीमार पड़ने की वजह, खाने की गुणवत्ता और घटनाक्रम से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। मृतका के परिजनों ने शव का पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार किया है। सदर एसडीएम मनोहर कुमार साह ने बताया कि सूचना मिलने के बाद वे एसडीपीओ और थाना प्रभारी के साथ मौके पर पहुंचे। मदरसे में बड़ी संख्या में बच्चियां आवासीय सुविधा के तहत रह रही हैं। इनमें एक छात्रा की मौत हुई है, जबकि दो-तीन अन्य का अलग-अलग अस्पतालों में उपचार चल रहा है। प्रशासन उनके स्वास्थ्य की जानकारी ले रहा है। उन्होंने बताया कि जिला शिक्षा कार्यालय से डीपीओ सहित पदाधिकारी मदरसे के दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि संस्था को छात्राओं को आवासीय रूप से रखने की अनुमति है या नहीं और इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है अथवा नहीं। पुलिस की ओर से भी घटना की अलग से पड़ताल की जा रही है। डीएम के निर्देश पर शिक्षा विभाग की टीम पहुंची मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम सावन कुमार के निर्देश पर जिला शिक्षा कार्यालय की टीम मदरसे पहुंची। अधिकारियों ने संस्था के संचालन, उपलब्ध सुविधाओं और छात्राओं के रहने की व्यवस्था से संबंधित जानकारी जुटाई। दस्तावेजों की जांच के साथ घटना के कारणों का भी पता लगाया जा रहा है। सदर डीएसपी के अनुसार, शुरुआती तौर पर मामला फूड प्वाइजनिंग का प्रतीत हो रहा है। हालांकि घटना की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस और प्रशासन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर पड़ताल कर रहे हैं। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। SP शरथ आर.एस ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि बसबिट्टी स्थित एक मदरसे में पढ़ने वाली एक बच्ची की मौत हो गई है, जबकि एक अन्य बच्ची गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। दो-तीन अन्य बच्चों के भी अस्पताल में भर्ती होने की सूचना है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। डॉक्टरों से बातचीत और जांच के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने के वास्तविक कारण की जानकारी सामने आएगी।

