देवरिया में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर स्थापित प्रतिमाओं का विसर्जन सोमवार को धूमधाम से किया गया। सुबह पूजा-आरती के बाद पुरोहितों ने वैदिक मंत्रों के साथ विसर्जन की प्रक्रिया पूरी कराई। शाम को श्रद्धालु प्रतिमाओं को वाहनों पर रखकर शोभायात्रा के साथ निकले। जयकारों और भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालु विसर्जन घाटों तक पहुंचे, जहां देर रात तक प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ। शहर के रामनाथ देवरिया, राघव नगर, नगरपालिका रोड और ट्यूबवेल कॉलोनी समेत कई मोहल्लों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। सोमवार को हवन-पूजन के बाद इन प्रतिमाओं की शोभायात्रा निकाली गई। सिविल लाइन, सीसी रोड हनुमान मंदिर, बरहज रोड और ट्यूबवेल कॉलोनी समेत अलग-अलग मोहल्लों से शोभायात्राएं देर शाम निकलीं। डीजे की धुन पर बज रहे भक्ति गीतों पर युवा नाचते हुए चल रहे थे। इस दौरान ‘गोविंदा-गोविंदा’ के जयकारे भी लगाए गए। देखें, 8 तस्वीरें… शोभायात्रा नगर के अलग-अलग रास्तों से होते हुए विसर्जन घाटों तक पहुंची। बरहज में श्रद्धालुओं ने प्रतिमाओं को नाव पर रखकर सरयू नदी की धारा में विसर्जित किया। कुछ प्रतिमाओं का विसर्जन महुआपाटन स्थित गंडक नदी में भी किया गया। सुरक्षा बनाए रखने के लिए शोभायात्रा के आगे और पीछे पुलिसकर्मी तैनात थे। पुलिस की मौजूदगी में श्रद्धालुओं ने शांति से विसर्जन किया।
कस्बे में भी राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं का विसर्जन सोमवार दोपहर बाद खुशी के साथ किया गया। इस दौरान शानदार शोभायात्रा और सुंदर झांकियां निकाली गईं, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने अबीर-गुलाल उड़ाकर यह उत्सव मनाया।
राधे युवा क्लब, न्यू गोल्डेन क्लब, शक्ति युवा क्लब और श्रीकृष्णा युवा क्लब सहित चौदह पंडालों में स्थापित राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं को शोभायात्रा के साथ ले जाया गया। यह यात्रा कस्बे की मुख्य सड़क से दुबे टोला, बसंतपुर धूसी होते हुए वापस लौटी। इसके बाद केसरीपुर, बालपुर श्रीनगर, लक्ष्मीपुर, सोन्हुला रामनगर होते हुए छोटी गंडक नदी के सोन्हुला रामनगर घाट पर पहुंची। यहां गाजे-बाजे के साथ प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ।

