गाजियाबाद में स्वाइन फ्लू और लेप्रोसी की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार को ट्रेनिंग वर्कशॉप कराई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में दोपहर 2 से शाम 4 बजे तक चले कार्यक्रम में सरकारी अस्पतालों, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और आईसीएमआर लैब के लैब टेक्नीशियन शामिल हुए। प्रशिक्षण का उद्देश्य जांच प्रक्रिया को बेहतर करना और बीमारी की समय पर पहचान सुनिश्चित करना रहा। नोडल अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता के साथ डॉक्टरों और माइक्रोबायोलॉजिस्ट ने दोनों बीमारियों से जुड़े जांच और नियंत्रण के तरीके समझाए। स्वाइन फ्लू के मरीजों में जोखिम के स्तर के हिसाब से जांच और उपचार की जरूरत बताई गई, जबकि लेप्रोसी के संदिग्ध मामलों की पहचान के लिए लैब जांच की प्रक्रिया पर जानकारी दी गई। स्वाइन फ्लू में जोखिम वाले मरीजों पर फोकस ट्रेनिंग के दौरान स्वाइन फ्लू के तीन कैटेगरी में मरीजों की पहचान के बारे में बताया गया। टाइप-बी में पांच साल से कम उम्र के बच्चों और पहले से बीमारी से जूझ रहे मरीजों की जांच को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। टाइप-सी को गंभीर श्रेणी बताया गया। इस कैटेगरी में स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने पर मरीज को तत्काल अस्पताल में भर्ती कर इलाज शुरू कराने की बात कही गई। संक्रमण से बचाव के तरीके भी समझाए स्वास्थ्यकर्मियों को मरीजों की जांच के दौरान संक्रमण से बचने के लिए जरूरी सावधानियों की जानकारी दी गई। इसमें हैंड हाइजीन, मास्क का सही इस्तेमाल और संक्रमण रोकने के लिए अपनाए जाने वाले व्यवहार शामिल रहे। अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती स्तर पर बीमारी पकड़ में आने से मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इससे संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने में भी सहयोग मिलेगा। लेप्रोसी की जांच के लिए बनेगा कलेक्शन सेंटर वर्कशॉप में लेप्रोसी की पहचान के लिए लैब टेक्नीशियन को जांच के तरीकों की जानकारी दी गई। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, इससे संदिग्ध मरीजों की जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। जिला एमएमजी अस्पताल में लेप्रोसी के संदिग्ध मरीजों के सैंपल लेने के लिए कलेक्शन सेंटर तैयार करने की योजना भी है। सेंटर बनने के बाद जांच की प्रक्रिया को एक जगह से व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी और रिपोर्ट के आधार पर मरीजों को आगे के इलाज के लिए भेजा जा सकेगा।

