मधेपुरा लोकोमोटिव फैक्ट्री- लोकल को रोजगार नहीं मिलने पर नाराजगी:ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी; बोले- जमीन हमारी, रोजगार बाहर वालों को क्यों?

मधेपुरा लोकोमोटिव फैक्ट्री- लोकल को रोजगार नहीं मिलने पर नाराजगी:ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी; बोले- जमीन हमारी, रोजगार बाहर वालों को क्यों?

मधेपुरा की इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव फैक्ट्री को लेकर आसपास के ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। स्थानीय लोगों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर रोजगार के मामले में अनदेखी करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने कहा कि जिस जमीन पर फैक्ट्री का निर्माण हुआ है, उसका फायदा स्थानीय लोगों को भी मिलना चाहिए। उन्होंने स्थानीय युवाओं को उनकी शैक्षणिक और तकनीकी योग्यता के आधार पर रोजगार देने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है। दरअसल, हाल ही में Alstom और भारतीय रेलवे की संयुक्त कंपनी MELPL की एक रिपोर्ट पटना में जारी हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, मधेपुरा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव परियोजना ने वित्तीय वर्ष 2020-26 के दौरान देशभर में करीब 60 हजार करोड़ रुपये के आर्थिक आउटपुट को सपोर्ट किया है। रिपोर्ट और इससे जुड़ी खबरों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों की चर्चा सामने आने के बाद फैक्ट्री के आसपास के गांवों में नाराजगी और बढ़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से बड़े आर्थिक फायदे की बात कही जा रही है, लेकिन स्थानीय युवाओं को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। ‘बच्चों ने ITI किया, फिर भी योग्यता के अनुसार रोजगार नहीं मिला’ ग्रामीण अरविंद कुमार यादव ने कहा कि उनके बच्चों ने ITI की पढ़ाई की है। इसके बावजूद उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार नहीं मिल पाया। उन्होंने मांग की कि फैक्ट्री में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए और उनकी तकनीकी योग्यता के मुताबिक नौकरी दी जाए। ग्रामीणों का दावा- बाहर से सामान लाकर सिर्फ असेंबलिंग होती है ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यहां रेल इंजन बनाने के नाम पर बाहर से सामान लाकर मुख्य रूप से असेंबलिंग का काम किया जाता है। उनका कहना है कि यदि छोटे-छोटे कल-पुर्जों का निर्माण भी स्थानीय स्तर पर कराया जाए तो आसपास के युवाओं के लिए रोजगार के साथ स्थानीय कारोबार के भी बड़े अवसर पैदा हो सकते हैं। बिजली, शिक्षा और किसानों की सुविधाओं का भी उठाया मुद्दा सुधीर कुमार यादव ने कहा कि रोजगार के अलावा बिजली, शिक्षा और किसानों की सुविधाओं के मामले में भी ग्रामीणों को उतना लाभ नहीं मिला, जितनी उम्मीद थी। उन्होंने कहा कि योग्य युवाओं को रोजगार की तलाश में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और गुजरात जैसे राज्यों में जाना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि जिसकी जैसी डिग्री और तकनीकी योग्यता हो, उसे उसी के अनुरूप रोजगार उपलब्ध कराया जाए। ‘जमीन लेते समय विकास और रोजगार का भरोसा दिया गया था’ अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि फैक्ट्री के लिए जमीन लेते समय स्थानीय विकास और रोजगार का भरोसा दिया गया था। इसके बावजूद गांव के अधिकांश युवा आज भी रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर हैं। उन्होंने क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए। रिपोर्ट पटना में जारी होने पर भी ग्रामीणों ने उठाया सवाल ग्रामीणों ने फैक्ट्री से जुड़े एक अन्य मुद्दे पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि फैक्ट्री मधेपुरा में है और इसके लिए जमीन भी स्थानीय लोगों की ली गई है, तो परियोजना से जुड़ी रिपोर्ट पटना में क्यों जारी की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कार्यक्रम मधेपुरा में आयोजित किया जाता तो स्थानीय लोगों को भी अपनी समस्याएं और मांगें रखने का अवसर मिलता। मांग पूरी नहीं हुई तो बड़े आंदोलन की चेतावनी ग्रामीणों ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है। यदि जल्द पहल नहीं हुई तो वे बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। ग्रामीणों की प्रमुख मांग स्थानीय युवाओं को योग्यता के अनुसार रोजगार देने और क्षेत्र के विकास में फैक्ट्री की भागीदारी सुनिश्चित करने की है। इस संबंध में फैक्ट्री प्रबंधन का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रबंधन ने किसी भी प्रकार का बयान देने से परहेज किया। मधेपुरा की इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव फैक्ट्री को लेकर आसपास के ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। स्थानीय लोगों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर रोजगार के मामले में अनदेखी करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने कहा कि जिस जमीन पर फैक्ट्री का निर्माण हुआ है, उसका फायदा स्थानीय लोगों को भी मिलना चाहिए। उन्होंने स्थानीय युवाओं को उनकी शैक्षणिक और तकनीकी योग्यता के आधार पर रोजगार देने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है। दरअसल, हाल ही में Alstom और भारतीय रेलवे की संयुक्त कंपनी MELPL की एक रिपोर्ट पटना में जारी हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, मधेपुरा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव परियोजना ने वित्तीय वर्ष 2020-26 के दौरान देशभर में करीब 60 हजार करोड़ रुपये के आर्थिक आउटपुट को सपोर्ट किया है। रिपोर्ट और इससे जुड़ी खबरों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों की चर्चा सामने आने के बाद फैक्ट्री के आसपास के गांवों में नाराजगी और बढ़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से बड़े आर्थिक फायदे की बात कही जा रही है, लेकिन स्थानीय युवाओं को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। ‘बच्चों ने ITI किया, फिर भी योग्यता के अनुसार रोजगार नहीं मिला’ ग्रामीण अरविंद कुमार यादव ने कहा कि उनके बच्चों ने ITI की पढ़ाई की है। इसके बावजूद उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार नहीं मिल पाया। उन्होंने मांग की कि फैक्ट्री में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए और उनकी तकनीकी योग्यता के मुताबिक नौकरी दी जाए। ग्रामीणों का दावा- बाहर से सामान लाकर सिर्फ असेंबलिंग होती है ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यहां रेल इंजन बनाने के नाम पर बाहर से सामान लाकर मुख्य रूप से असेंबलिंग का काम किया जाता है। उनका कहना है कि यदि छोटे-छोटे कल-पुर्जों का निर्माण भी स्थानीय स्तर पर कराया जाए तो आसपास के युवाओं के लिए रोजगार के साथ स्थानीय कारोबार के भी बड़े अवसर पैदा हो सकते हैं। बिजली, शिक्षा और किसानों की सुविधाओं का भी उठाया मुद्दा सुधीर कुमार यादव ने कहा कि रोजगार के अलावा बिजली, शिक्षा और किसानों की सुविधाओं के मामले में भी ग्रामीणों को उतना लाभ नहीं मिला, जितनी उम्मीद थी। उन्होंने कहा कि योग्य युवाओं को रोजगार की तलाश में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और गुजरात जैसे राज्यों में जाना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि जिसकी जैसी डिग्री और तकनीकी योग्यता हो, उसे उसी के अनुरूप रोजगार उपलब्ध कराया जाए। ‘जमीन लेते समय विकास और रोजगार का भरोसा दिया गया था’ अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि फैक्ट्री के लिए जमीन लेते समय स्थानीय विकास और रोजगार का भरोसा दिया गया था। इसके बावजूद गांव के अधिकांश युवा आज भी रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर हैं। उन्होंने क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए। रिपोर्ट पटना में जारी होने पर भी ग्रामीणों ने उठाया सवाल ग्रामीणों ने फैक्ट्री से जुड़े एक अन्य मुद्दे पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि फैक्ट्री मधेपुरा में है और इसके लिए जमीन भी स्थानीय लोगों की ली गई है, तो परियोजना से जुड़ी रिपोर्ट पटना में क्यों जारी की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कार्यक्रम मधेपुरा में आयोजित किया जाता तो स्थानीय लोगों को भी अपनी समस्याएं और मांगें रखने का अवसर मिलता। मांग पूरी नहीं हुई तो बड़े आंदोलन की चेतावनी ग्रामीणों ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है। यदि जल्द पहल नहीं हुई तो वे बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। ग्रामीणों की प्रमुख मांग स्थानीय युवाओं को योग्यता के अनुसार रोजगार देने और क्षेत्र के विकास में फैक्ट्री की भागीदारी सुनिश्चित करने की है। इस संबंध में फैक्ट्री प्रबंधन का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रबंधन ने किसी भी प्रकार का बयान देने से परहेज किया।  

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