औरंगाबाद शहर के वार्ड नंबर चार स्थित गायत्री मोहल्ले में न्यू बाल विहार स्कूल से एनएच-19 को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क इन दिनों जलजमाव की समस्या से जूझ रही है। सड़क पर करीब एक फीट तक पानी जमा है। हालात यह हैं कि स्कूली बच्चों, अभिभावकों, दुकानदारों और स्थानीय लोगों को इसी गंदे पानी के बीच से होकर आवागमन करना पड़ रहा है। पानी में फिसलन के कारण खासकर छोटे बच्चों के गिरने का खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों के मुताबिक हाल के दिनों में इस सड़क पर पानी के कारण मोटरसाइकिल सवारों के गिरने की घटनाएं भी हुई हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक जलनिकासी की ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए सड़क बनी मुसीबत गायत्री मोहल्ले की यह सड़क आसपास के लोगों के लिए सामान्य आवागमन का रास्ता भर नहीं है, बल्कि कई विद्यालयों तक पहुंचने का प्रमुख मार्ग भी है। इसी रास्ते से प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं स्कूल आते-जाते हैं। न्यू बाल विहार स्कूल के अलावा संत इग्नियस स्कूल समेत अन्य विद्यालय भी इस क्षेत्र में संचालित हैं। विद्यालयों में शहर के अलावा जिले के अलग-अलग इलाकों से भी बच्चे पढ़ने पहुंचते हैं। सुबह स्कूल के समय इस सड़क पर विद्यार्थियों और अभिभावकों की आवाजाही बढ़ जाती है। छोटे-छोटे बच्चों को पानी के बीच से गुजरते देख अभिभावक भी चिंतित रहते हैं। कई जगह सड़क और जलजमाव के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है। पानी के नीचे सड़क की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण गड्ढे या ऊबड़-खाबड़ हिस्से में पैर पड़ने से बच्चे गिर सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के बाद समस्या और गंभीर हो जाती है। पानी लंबे समय तक सड़क पर जमा रहने के कारण फिसलन बढ़ जाती है। पैदल चलने वालों के अलावा बाइक और स्कूटी सवारों को भी काफी सावधानी से गुजरना पड़ता है। लोगों का कहना है कि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। नाली बनी है, फिर भी सड़क पर जमा है पानी स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क के किनारे जलनिकासी के लिए नाला बनाया गया है, जिसे स्थानीय स्तर पर भाव कहा जाता है। इसके बावजूद सड़क पर पानी जमा रहना व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है। लोगों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर जलनिकासी का रास्ता अवरुद्ध कर दिए जाने के कारण पानी आगे नहीं निकल पा रहा है। वर्षा या आसपास से आने वाला पानी सड़क पर ही रुक जाता है और धीरे-धीरे जलजमाव का रूप ले लेता है। लोगों का कहना है कि यदि नाले की सफाई कराकर पानी के बहाव को सुचारू कर दिया जाए तो समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। इसके लिए किसी बड़े निर्माण की जरूरत नहीं, बल्कि पहले से बनी जलनिकासी व्यवस्था को प्रभावी तरीके से चालू कराने की आवश्यकता है। जलजमाव के कारण सड़क की स्थिति भी लगातार खराब हो रही है। पानी के लंबे समय तक जमा रहने से सड़क की सतह प्रभावित हो रही है। पानी के नीचे गड्ढे होने की स्थिति में वाहन चालकों के लिए खतरा और बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद और संबंधित अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर यह पता लगाना चाहिए कि आखिर जलनिकासी का रास्ता कहां और क्यों बाधित है। दुकानदार से स्कूल संचालक तक, सभी परेशान सड़क पर पानी जमा रहने से आसपास के दुकानदारों का कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। दुकानदार सुशील सिंह ने बताया कि दुकान के सामने लगातार पानी जमा रहने के कारण ग्राहक आने से बचते हैं। पानी पार कर दुकान तक पहुंचना लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। इससे रोजमर्रा के कारोबार पर भी असर पड़ रहा है। स्थानीय निवासी संध्या सिंह ने कहा कि सड़क पर इतना पानी जमा है कि घर से निकलना मुश्किल हो गया है। बच्चों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी होती है। फिसलन के कारण किसी भी समय दुर्घटना हो सकती है। उनका कहना है कि जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त कर दी जाए तो मोहल्ले के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। न्यू बाल विहार स्कूल के संचालक अनिल कुमार पांडेय ने बताया कि जलजमाव के कारण विद्यालय आने वाले बच्चों को काफी परेशानी हो रही है। अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। पानी और फिसलन की वजह से बच्चों के गिरने का खतरा बना रहता है। उनके अनुसार एक-दो मोटरसाइकिल सवार भी सड़क पर गिर चुके हैं। विद्यालय के सामने की सड़क को जल्द से जल्द जलजमाव से मुक्त कराया जाना जरूरी है। स्थानीय निवासी मनोज सिंह ने कहा कि शहर के बीच रहने के बावजूद लोगों को यदि रोज पानी में चलकर आना-जाना पड़े तो यह गंभीर समस्या है। यह मार्ग विद्यालयों के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के आवागमन का प्रमुख रास्ता है। इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। लोगों ने तत्काल जलनिकासी की मांग की स्थानीय लोगों ने नगर परिषद से सड़क पर जमा पानी की तत्काल निकासी कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल सड़क से पानी हटाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। जलनिकासी के लिए बनाए गए नाले या भाव को जहां-जहां अवरुद्ध किया गया है, वहां की बाधा को हटाना जरूरी है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बारिश का पानी दोबारा सड़क पर जमा न हो। लोगों ने संबंधित अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने और जलनिकासी की पूरी व्यवस्था को दुरुस्त कराने की मांग की है। विद्यालयों की संख्या और प्रतिदिन होने वाले आवागमन को देखते हुए इस सड़क की स्थिति को गंभीरता से लेने की जरूरत है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों के स्कूल आने-जाने के समय सड़क पर विशेष निगरानी और तत्काल जलनिकासी की व्यवस्था की जानी चाहिए। यदि पानी लंबे समय तक जमा रहा तो सड़क खराब होने के साथ-साथ दुर्घटना का खतरा भी बढ़ता जाएगा। लोगों ने नगर परिषद और संबंधित विभाग से जल्द कार्रवाई कर सड़क को जलजमाव से मुक्त कराने की मांग की है, ताकि विद्यार्थियों, अभिभावकों, दुकानदारों और स्थानीय निवासियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके। औरंगाबाद शहर के वार्ड नंबर चार स्थित गायत्री मोहल्ले में न्यू बाल विहार स्कूल से एनएच-19 को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क इन दिनों जलजमाव की समस्या से जूझ रही है। सड़क पर करीब एक फीट तक पानी जमा है। हालात यह हैं कि स्कूली बच्चों, अभिभावकों, दुकानदारों और स्थानीय लोगों को इसी गंदे पानी के बीच से होकर आवागमन करना पड़ रहा है। पानी में फिसलन के कारण खासकर छोटे बच्चों के गिरने का खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों के मुताबिक हाल के दिनों में इस सड़क पर पानी के कारण मोटरसाइकिल सवारों के गिरने की घटनाएं भी हुई हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक जलनिकासी की ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए सड़क बनी मुसीबत गायत्री मोहल्ले की यह सड़क आसपास के लोगों के लिए सामान्य आवागमन का रास्ता भर नहीं है, बल्कि कई विद्यालयों तक पहुंचने का प्रमुख मार्ग भी है। इसी रास्ते से प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं स्कूल आते-जाते हैं। न्यू बाल विहार स्कूल के अलावा संत इग्नियस स्कूल समेत अन्य विद्यालय भी इस क्षेत्र में संचालित हैं। विद्यालयों में शहर के अलावा जिले के अलग-अलग इलाकों से भी बच्चे पढ़ने पहुंचते हैं। सुबह स्कूल के समय इस सड़क पर विद्यार्थियों और अभिभावकों की आवाजाही बढ़ जाती है। छोटे-छोटे बच्चों को पानी के बीच से गुजरते देख अभिभावक भी चिंतित रहते हैं। कई जगह सड़क और जलजमाव के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है। पानी के नीचे सड़क की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण गड्ढे या ऊबड़-खाबड़ हिस्से में पैर पड़ने से बच्चे गिर सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के बाद समस्या और गंभीर हो जाती है। पानी लंबे समय तक सड़क पर जमा रहने के कारण फिसलन बढ़ जाती है। पैदल चलने वालों के अलावा बाइक और स्कूटी सवारों को भी काफी सावधानी से गुजरना पड़ता है। लोगों का कहना है कि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। नाली बनी है, फिर भी सड़क पर जमा है पानी स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क के किनारे जलनिकासी के लिए नाला बनाया गया है, जिसे स्थानीय स्तर पर भाव कहा जाता है। इसके बावजूद सड़क पर पानी जमा रहना व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है। लोगों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर जलनिकासी का रास्ता अवरुद्ध कर दिए जाने के कारण पानी आगे नहीं निकल पा रहा है। वर्षा या आसपास से आने वाला पानी सड़क पर ही रुक जाता है और धीरे-धीरे जलजमाव का रूप ले लेता है। लोगों का कहना है कि यदि नाले की सफाई कराकर पानी के बहाव को सुचारू कर दिया जाए तो समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। इसके लिए किसी बड़े निर्माण की जरूरत नहीं, बल्कि पहले से बनी जलनिकासी व्यवस्था को प्रभावी तरीके से चालू कराने की आवश्यकता है। जलजमाव के कारण सड़क की स्थिति भी लगातार खराब हो रही है। पानी के लंबे समय तक जमा रहने से सड़क की सतह प्रभावित हो रही है। पानी के नीचे गड्ढे होने की स्थिति में वाहन चालकों के लिए खतरा और बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद और संबंधित अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर यह पता लगाना चाहिए कि आखिर जलनिकासी का रास्ता कहां और क्यों बाधित है। दुकानदार से स्कूल संचालक तक, सभी परेशान सड़क पर पानी जमा रहने से आसपास के दुकानदारों का कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। दुकानदार सुशील सिंह ने बताया कि दुकान के सामने लगातार पानी जमा रहने के कारण ग्राहक आने से बचते हैं। पानी पार कर दुकान तक पहुंचना लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। इससे रोजमर्रा के कारोबार पर भी असर पड़ रहा है। स्थानीय निवासी संध्या सिंह ने कहा कि सड़क पर इतना पानी जमा है कि घर से निकलना मुश्किल हो गया है। बच्चों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी होती है। फिसलन के कारण किसी भी समय दुर्घटना हो सकती है। उनका कहना है कि जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त कर दी जाए तो मोहल्ले के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। न्यू बाल विहार स्कूल के संचालक अनिल कुमार पांडेय ने बताया कि जलजमाव के कारण विद्यालय आने वाले बच्चों को काफी परेशानी हो रही है। अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। पानी और फिसलन की वजह से बच्चों के गिरने का खतरा बना रहता है। उनके अनुसार एक-दो मोटरसाइकिल सवार भी सड़क पर गिर चुके हैं। विद्यालय के सामने की सड़क को जल्द से जल्द जलजमाव से मुक्त कराया जाना जरूरी है। स्थानीय निवासी मनोज सिंह ने कहा कि शहर के बीच रहने के बावजूद लोगों को यदि रोज पानी में चलकर आना-जाना पड़े तो यह गंभीर समस्या है। यह मार्ग विद्यालयों के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के आवागमन का प्रमुख रास्ता है। इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। लोगों ने तत्काल जलनिकासी की मांग की स्थानीय लोगों ने नगर परिषद से सड़क पर जमा पानी की तत्काल निकासी कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल सड़क से पानी हटाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। जलनिकासी के लिए बनाए गए नाले या भाव को जहां-जहां अवरुद्ध किया गया है, वहां की बाधा को हटाना जरूरी है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बारिश का पानी दोबारा सड़क पर जमा न हो। लोगों ने संबंधित अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने और जलनिकासी की पूरी व्यवस्था को दुरुस्त कराने की मांग की है। विद्यालयों की संख्या और प्रतिदिन होने वाले आवागमन को देखते हुए इस सड़क की स्थिति को गंभीरता से लेने की जरूरत है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों के स्कूल आने-जाने के समय सड़क पर विशेष निगरानी और तत्काल जलनिकासी की व्यवस्था की जानी चाहिए। यदि पानी लंबे समय तक जमा रहा तो सड़क खराब होने के साथ-साथ दुर्घटना का खतरा भी बढ़ता जाएगा। लोगों ने नगर परिषद और संबंधित विभाग से जल्द कार्रवाई कर सड़क को जलजमाव से मुक्त कराने की मांग की है, ताकि विद्यार्थियों, अभिभावकों, दुकानदारों और स्थानीय निवासियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।

