गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। तरबगंज तहसील क्षेत्र के ब्योन्दा माझा, ऐली परसौली, गढ़ी, दत्त नगर, साखीपुर, जबरनगर और नई बस्ती समेत 10 मजरों की करीब 5 हजार आबादी बाढ़ की चपेट में है। कई गांवों के मुख्य रास्तों पर पानी भर गया है, जिससे लोगों का आवागमन मुश्किल हो गया है। रविवार सुबह 8:30 बजे घाघरा नदी का जलस्तर 106.360 मीटर रिकॉर्ड किया गया। खतरे का निशान 106.070 मीटर है। इस हिसाब से नदी खतरे के निशान से 29 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। रविवार को घाघरा नदी में कुल 3,67,600 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोग पानी के बीच से होकर आने-जाने को मजबूर हैं। बच्चों के बाढ़ के पानी में तैरने का वीडियो भी सामने आया है। वहीं, कुछ गांवों में पानी घुस चुका है, जबकि कुछ अन्य गांवों में रविवार देर शाम तक पानी पूरी तरह घुसने की आशंका है। ऐली परसौली और बहादुरपुर के कई ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। 30 से ज्यादा नावें और नाविक लगाए गए बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों को आने-जाने में परेशानी न हो, इसके लिए जिला प्रशासन ने 30 से अधिक नावें लगाई हैं। इन पर नाविक भी तैनात किए गए हैं। मुख्य मार्गों पर पानी भर जाने के कारण ग्रामीणों को नाव और पानी के रास्ते ही आवागमन करना पड़ रहा है। 3.67 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया घाघरा नदी में रविवार को अलग-अलग बैराजों से कुल 3,67,600 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसमें गिरजा बैराज से 1,83,738 क्यूसेक, शारदा बैराज से 1,68,408 क्यूसेक और सरयू बैराज से 15,454 क्यूसेक पानी शामिल है। लगातार पानी छोड़े जाने और नदी का जलस्तर बढ़ने से तटीय गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। पशुओं के चारे का संकट, मजदूरी भी प्रभावित बाढ़ का असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ रहा है। गांवों के आसपास पानी भरने से पशुओं के चारे का संकट पैदा हो गया है। किसानों को नाव का सहारा लेकर चारा लाने जाना पड़ रहा है, लेकिन पर्याप्त चारा नहीं ला पा रहे हैं। वहीं, रोजाना मजदूरी करने वाले लोग भी काम पर नहीं जा पा रहे हैं। नाव, स्टीमर और हनुमान रथ से पहुंचाई जा रही राहत जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित गांवों में नाव, स्टीमर और हनुमान रथ के माध्यम से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। लोगों को लंच पैकेट दिए जा रहे हैं। साथ ही दवाएं भी बांटी जा रही हैं। प्रशासन का कहना है कि नदी किनारे बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा जा रहा है। तरबगंज एसडीएम प्रदीप कुमार ने बताया कि घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है और लगातार बढ़ रहा है। कई गांव बाढ़ से प्रभावित हैं और कई गांवों के किनारे तक पानी पहुंच चुका है। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। प्रभावित लोगों को लगातार आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। नदी किनारे बसे लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है।

