जौनपुर में लगातार बारिश के बाद गोमती और सई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। शनिवार को गोमती का पानी बढ़कर खतरे के निशान 70 मीटर से महज 15 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया। निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। कई जगह खेतों में पानी पहुंचने से फसलों को नुकसान हो रहा है। पशुपालकों के सामने हरे चारे का संकट भी खड़ा हो गया है। हालांकि, नदी का पानी तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे फिलहाल बाढ़ का फैलाव कुछ हद तक सीमित है। सई भी बढ़ी, हर 12 घंटे में 6 इंच की रफ्तार जलालपुर कस्बे से होकर गुजर रही सई नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। ऐतिहासिक शाही पुल के नीचे से नदी तेज बहाव के साथ पूरब दिशा में बह रही है। फिलहाल सई खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन इसका जलस्तर हर 12 घंटे में औसतन छह इंच बढ़ रहा है। नदियों के बढ़ते पानी ने स्थानीय लोगों को 1980 की भीषण बाढ़ की याद दिला दी है। उस समय सई नदी का पानी शाही पुल के ऊपर से बहने लगा था और जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया था। लोगों को रेलवे पुल से जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ा था। इस बार भी ग्रामीण लगातार जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। इन इलाकों में संपर्क मार्ग तक पहुंचा पानी शहर से सटे कलीचाबाद, राजेपुर त्रिमुहानी और कोहरे सुल्तानपुर में पानी बढ़ा है। केराकत क्षेत्र के सिहौली, गोबरा और सरोज बड़ेवर में भी कई जगह पानी संपर्क मार्गों तक पहुंच गया है। चंदवक क्षेत्र के बलुआ और बरमलपुर समेत सिंगरामऊ क्षेत्र के जगदीशपुर, अंसार और बघाड़ी कला में भी हालात बिगड़ रहे हैं। जगदीशपुर, अंसार, बघाड़ी, मेड़ा, गजेंद्रपुर, रामनगर, कृष्णापुर और पिलकिच्छा समेत अन्य तटवर्ती इलाकों में भी ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान की आशंका है, जबकि पशुपालकों को हरा चारा जुटाने में दिक्कत हो रही है। प्रशासन अलर्ट, हर घंटे जलस्तर की निगरानी गोमती का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचने के बाद जिला प्रशासन अलर्ट हो गया है। नदी और आसपास के निचले इलाकों की लगातार निगरानी की जा रही है। जलस्तर में होने वाले उतार-चढ़ाव पर हर घंटे नजर रखी जा रही है। एडीएम परमानंद झा ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने लोगों से नदी के आसपास जाने और किसी तरह का जोखिम उठाने से बचने को कहा है।

