समस्तीपुर जिले का डुमरी दक्षिण गांव बाढ़ से पूरी तरह प्रभावित है। गांव की पांच हजार से अधिक आबादी गंगा नदी की बाढ़ से प्रभावित है। गांव के अधिकतर घरों में पानी घुस गया है। जिन लोगों के मकान फूस के हैं, वे गांव में मौजूद पक्के और छत वाले मकानों पर शरण लिए हुए हैं। कई परिवार अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों और रिश्तेदारों के यहां पलायन कर रहे हैं। घरों के बीच से बाढ़ के पानी की तेज धार बह रही गांव के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-115 में भी पानी भर गया है। केंद्र के अंदर किचन भी डूब चुका है। घरों के बीच से बाढ़ के पानी की तेज धार बह रही है। दैनिक भास्कर की टीम नाव से गांव पहुंची। इस दौरान कई घरों के दरवाजे पर लोग चौकी के नीचे ईंट रखकर बच्चों के साथ बैठे नजर आए। लेकिन अब चौकी भी डूबने की स्थिति में पहुंच गई है। राहत का इंतजार कर रहे जटहू यादव ने बताया कि उनके दरवाजे पर छह फीट से अधिक पानी है। उन्होंने कहा, “गांव में आप लोगों की पहली नाव आई है। इसके पीछे प्रशासन की नाव भी दिखाई दे रही है।” इसी नाव पर गांव के 30 से अधिक लोग सवार होकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे थे। प्रमोद राय ने बताया कि चार दिनों से लोग गांव में बाढ़ के पानी के बीच घिरे हुए हैं। अब तक पर्याप्त सहायता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि गंगा के जलस्तर में इसी तरह लगातार वृद्धि जारी रही तो गांव के मकानों के गिरने का खतरा बढ़ जाएगा। ऐसी स्थिति में गांव के अंदर रहना खतरे से खाली नहीं है। आंगनबाड़ी केंद्र में घुसा पानी, किचन भी डूबा आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-115 की सेविका मायावती कुमारी ने बताया कि केंद्र में 40 बच्चे नामांकित हैं। हालांकि, यहां करीब 100 बच्चे पहुंचते हैं। बाढ़ का पानी केंद्र के अंदर घुस गया है और किचन भी डूब चुका है। उन्होंने बताया कि घरों के अंदर से गंगा के पानी की धार बह रही है। ऐसी स्थिति में यहां रहना खतरे से खाली नहीं है। मायावती कुमारी अपने परिवार के साथ आसपास के 30 से अधिक लोगों को लेकर गांव से पलायन कर रही हैं। पलायन करने वाले लोग अपने-अपने रिश्तेदारों के यहां जा रहे हैं। कुछ परिवार फोरलेन पर भी शरण लेने की तैयारी में हैं। झोपड़ी का घर पानी में बहा, अब रिश्तेदार के यहां जा रहे गांव की देवकी देवी ने बताया कि उनका झोपड़ी का घर था, जो बाढ़ के पानी में गिरकर बह गया। अब खाने-पीने का भी कोई इंतजाम नहीं है। ऐसे में वह गांव छोड़कर रिश्तेदार के यहां जा रही हैं। प्रमिला देवी ने बताया कि घर में पानी घुस गया है। खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए वह भी परिवार के साथ रिश्तेदार के यहां जा रही हैं। गांव के सियाराम राय की पुत्री राजनंदनी ने बताया कि गांव में काफी पानी आ गया है। वह अपनी भाभी के साथ गांव छोड़कर जा रही हैं। उनके अलावा गांव के कई अन्य लोग भी पलायन कर रहे हैं। सरपंच पति ने कहा- प्रशासन तुरंत सामुदायिक किचन की व्यवस्था करे
बाढ़ में गांव में फंसे सरपंच पति कृष्णा कुमार यादव ने कहा कि पूरा इलाका बाढ़ के पानी में डूब गया है। लोगों का अनाज तक पानी में डूब चुका है। गांव में खाने-पीने की समस्या उत्पन्न हो गई है। प्रशासन को तुरंत सामुदायिक किचन की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गांव में फंसे लोगों को निकालने के लिए पर्याप्त संख्या में नावों की भी व्यवस्था की जानी चाहिए। पटोरी एसडीएम ने कहा- शुरू किया जा रहा सामुदायिक किचन पटोरी के एसडीएम विकास पांडेय ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में सामुदायिक किचन शुरू किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रभावित लोगों के बीच अन्य राहत सामग्री का भी वितरण किया जाएगा। मोहनपुर, मोहिउद्दीननगर और पटोरी प्रखंडों में करीब एक लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। समस्तीपुर जिले का डुमरी दक्षिण गांव बाढ़ से पूरी तरह प्रभावित है। गांव की पांच हजार से अधिक आबादी गंगा नदी की बाढ़ से प्रभावित है। गांव के अधिकतर घरों में पानी घुस गया है। जिन लोगों के मकान फूस के हैं, वे गांव में मौजूद पक्के और छत वाले मकानों पर शरण लिए हुए हैं। कई परिवार अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों और रिश्तेदारों के यहां पलायन कर रहे हैं। घरों के बीच से बाढ़ के पानी की तेज धार बह रही गांव के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-115 में भी पानी भर गया है। केंद्र के अंदर किचन भी डूब चुका है। घरों के बीच से बाढ़ के पानी की तेज धार बह रही है। दैनिक भास्कर की टीम नाव से गांव पहुंची। इस दौरान कई घरों के दरवाजे पर लोग चौकी के नीचे ईंट रखकर बच्चों के साथ बैठे नजर आए। लेकिन अब चौकी भी डूबने की स्थिति में पहुंच गई है। राहत का इंतजार कर रहे जटहू यादव ने बताया कि उनके दरवाजे पर छह फीट से अधिक पानी है। उन्होंने कहा, “गांव में आप लोगों की पहली नाव आई है। इसके पीछे प्रशासन की नाव भी दिखाई दे रही है।” इसी नाव पर गांव के 30 से अधिक लोग सवार होकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे थे। प्रमोद राय ने बताया कि चार दिनों से लोग गांव में बाढ़ के पानी के बीच घिरे हुए हैं। अब तक पर्याप्त सहायता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि गंगा के जलस्तर में इसी तरह लगातार वृद्धि जारी रही तो गांव के मकानों के गिरने का खतरा बढ़ जाएगा। ऐसी स्थिति में गांव के अंदर रहना खतरे से खाली नहीं है। आंगनबाड़ी केंद्र में घुसा पानी, किचन भी डूबा आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-115 की सेविका मायावती कुमारी ने बताया कि केंद्र में 40 बच्चे नामांकित हैं। हालांकि, यहां करीब 100 बच्चे पहुंचते हैं। बाढ़ का पानी केंद्र के अंदर घुस गया है और किचन भी डूब चुका है। उन्होंने बताया कि घरों के अंदर से गंगा के पानी की धार बह रही है। ऐसी स्थिति में यहां रहना खतरे से खाली नहीं है। मायावती कुमारी अपने परिवार के साथ आसपास के 30 से अधिक लोगों को लेकर गांव से पलायन कर रही हैं। पलायन करने वाले लोग अपने-अपने रिश्तेदारों के यहां जा रहे हैं। कुछ परिवार फोरलेन पर भी शरण लेने की तैयारी में हैं। झोपड़ी का घर पानी में बहा, अब रिश्तेदार के यहां जा रहे गांव की देवकी देवी ने बताया कि उनका झोपड़ी का घर था, जो बाढ़ के पानी में गिरकर बह गया। अब खाने-पीने का भी कोई इंतजाम नहीं है। ऐसे में वह गांव छोड़कर रिश्तेदार के यहां जा रही हैं। प्रमिला देवी ने बताया कि घर में पानी घुस गया है। खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए वह भी परिवार के साथ रिश्तेदार के यहां जा रही हैं। गांव के सियाराम राय की पुत्री राजनंदनी ने बताया कि गांव में काफी पानी आ गया है। वह अपनी भाभी के साथ गांव छोड़कर जा रही हैं। उनके अलावा गांव के कई अन्य लोग भी पलायन कर रहे हैं। सरपंच पति ने कहा- प्रशासन तुरंत सामुदायिक किचन की व्यवस्था करे
बाढ़ में गांव में फंसे सरपंच पति कृष्णा कुमार यादव ने कहा कि पूरा इलाका बाढ़ के पानी में डूब गया है। लोगों का अनाज तक पानी में डूब चुका है। गांव में खाने-पीने की समस्या उत्पन्न हो गई है। प्रशासन को तुरंत सामुदायिक किचन की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गांव में फंसे लोगों को निकालने के लिए पर्याप्त संख्या में नावों की भी व्यवस्था की जानी चाहिए। पटोरी एसडीएम ने कहा- शुरू किया जा रहा सामुदायिक किचन पटोरी के एसडीएम विकास पांडेय ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में सामुदायिक किचन शुरू किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रभावित लोगों के बीच अन्य राहत सामग्री का भी वितरण किया जाएगा। मोहनपुर, मोहिउद्दीननगर और पटोरी प्रखंडों में करीब एक लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।

