चारभुजानाथ के दरबार में नंदोत्सव, केसरिया रंग छिड़का:दही-केसर से किया तैयार; मटकी फूटते ही चौक में गूंजे जयकारे

चारभुजानाथ के दरबार में नंदोत्सव, केसरिया रंग छिड़का:दही-केसर से किया तैयार; मटकी फूटते ही चौक में गूंजे जयकारे

राजसमंद में गढ़बोर स्थित चारभुजानाथ मंदिर में नंद महोत्सव मनाया गया। यह त्योहार कृष्ण के जन्मोत्सव के दूसरे दिन मनाया जाता है। शनिवार को परंपरानुसार पोतड़े धोने की रस्म के साथ नंद महोत्सव हर्षोल्लास से मनाया गया। राजभोग आरती के बाद पुजारियों ने ठाकुरजी को केसरिया रंग खेलाया। इसके बाद ग्वाल-बाल और युवा मंडलियों ने रसिया गान करते हुए एक-दूसरे पर केसरिया रंग डालकर नंदोत्सव की खुशियां मनाईं। दही-केसर से तैयार किया रंग नंद महोत्सव के लिए मंदिर परिसर में दो बड़े कड़ाव और कोठियों में पानी भरकर हल्दी, दही और केसर मिलाकर केसरिया रंग तैयार किया गया। राजभोग आरती के बाद पुजारी, ग्वाल-बाल और युवा मंडलियां पिचकारी, जग, लोटा और गड़ों में रंग लेकर निज मंदिर पहुंचीं। इसके बाद मंदिर परिसर में रंग खेलते हुए पोतड़े धोने की रस्म निभाई गई। पुजारियों ने दो-दो और चार-चार के समूह में फुंदी खेलकर परंपरा निभाई। नाचते-गाते रंग लेकर बाजार की ओर निकले इसके बाद ग्वाल-बाल और पुजारी नाचते-गाते रंग लेकर बाजार की ओर निकले। ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ और ‘नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से कस्बा गूंज उठा। मंदिर चैक में युवाओं ने मटकी फोड़ने के लिए पिरामिड बनाया। कई प्रयासों के बाद तरुण जयकिशन गुर्जर ने मटकी फोड़ी। मटकी फूटते ही मटकी का दही नीचे खड़े पुजारी ग्वाल-बाल पर गिरा और श्रद्धालुओं ने जोरदार जयकारे लगाए। इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए श्रद्धालु घंटों पहले ही छतों पर पहुंच गए थे। रामदेवरा जाने वाले जातरुओं ने भी नंद महोत्सव देखा। बाद में श्रद्धालुओं को बूंदी का प्रसाद वितरित किया गया।

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