डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी प्रयागराज में असिस्टेंट प्रोफेसरों की हालिया भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। पिछले महीने 12 पदों पर चयन में कथित अनियमितताओं और यूजीसी गाइडलाइंस की अनदेखी के आरोपों के बीच अब यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉ. ऊषा टंडन ने इस प्रक्रिया में शामिल छह असिस्टेंट प्रोफेसरों के लैपटॉप जब्त कर लिए हैं। आशंका है कि भर्ती से जुड़े डिजिटल दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स से छेड़छाड़ की कोशिश हो सकती है। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में यूजीसी के नियमों को नजरअंदाज कर मनमानी की गई। स्थिति यह थी कि इन 12 पदों पर बिना हस्ताक्षर वाले नियुक्ति पत्रों के आधार पर अगस्त में जॉइनिंग करवा दी गई। भर्ती में कथित अनियमितता को सरकार ने बहुत गंभीरता से लिया है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सरकार ने सीनियर आईएएस एम देवराज की अध्यक्षता में तीन प्रमुख सचिवों की एक कमेटी बनाई है। यह कमेटी अगले हफ्ते यूनिवर्सिटी का दौरा कर सकती है। इससे पहले कुलपति डॉ. ऊषा टंडन ने शिक्षकों के लैपटॉप जब्त कर लिए हैं। शिक्षकों के लैपटॉप सीधे कुलपति के पास पहुंच जाने के कारण यूनिवर्सिटी का रोजमर्रा का कामकाज प्रभावित हुआ है। लैपटॉप न होने से नए एडमिशन, छात्रों की पढ़ाई, जेम (GeM) पोर्टल से जरूरी खरीदारी और कई अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य ठप पड़े हैं, जिससे शिक्षक और छात्र दोनों परेशान हैं। इस संबंध में यूनिवर्सिटी के पीआरओ प्रकाश त्रिपाठी ने साफ जवाब नहीं दिया। जबकि अन्य असिस्टेंट प्रोफेसरों ने बताया कि उनका लैपटॉप कुलपति ने अपने कब्जे में ले लिया है। यूनिवर्सिटी में सिर्फ भर्ती प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि कुलपति भी वित्तीय कामकाज की जांच के दायरे में आ गई हैं। नियमों को नजरअंदाज कर कुलपति हर महीने एकेडमिक अलाउंस के रूप में 70 हजार रुपये ले रही थीं, जिस पर वित्त नियंत्रक ने रोक लगा दी है। इसके अलावा सरकारी आवास होने के बावजूद एचआरए (HRA) लेने का मामला भी है।

