राजस्थान हाईकोर्ट ने जवाई इलाके में लेपर्ड के आवास, गुफाओं, प्रजनन स्थलों और वन्यजीव कॉरिडोर के बचाव के लिए एक अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने लेपर्ड के रहने की खास जगहों के आसपास एक किलोमीटर के दायरे को ‘लेपर्ड हैबिटेट कंस्ट्रक्शन-कंट्रोल जोन’ घोषित किया है। इस जोन में नए कॉमर्शियल, रिहायशी और नागरिक निर्माण पर रोक लगा दी गई है। जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस रेखा बोराणा की बेंच ने बताया- यह नियम जवाई के पूरे इलाके में लागू होगा। इसमें तेंदुओं की गुफाएं, उनके रहने की जगह, बच्चे पैदा करने और आराम करने की जगह, गुफाओं वाली पहाड़ियां, उनसे जुड़े तलहटी के इलाके, वन्यजीव कॉरिडोर, वेटलैंड, बैकवाटर और पानी के स्रोत शामिल हैं। पहाड़ काटने और ट्रैक बनाने पर भी रहेगी रोक इन इलाकों में पहाड़ काटने, ब्लास्टिंग, खुदाई, सड़क या ट्रैक बनाने और वन्यजीवों की आवाजाही रोकने वाली गतिविधियों पर भी रोक रहेगी। कोर्ट ने साफ किया कि घोषित जवाई लेपर्ड कंजर्वेशन रिजर्व की सीमा से एक किलोमीटर के अंदर नए होटल, रिसॉर्ट, गेस्ट हाउस, होमस्टे और टूरिज्म कैंप जैसे कॉमर्शियल काम नहीं हो सकेंगे। साथ ही नए इंडस्ट्रियल काम भी नहीं किए जाएंगे। इस इलाके में जमीन का बदलना भी बंद रहेगा। हालांकि, सही रिहायशी निर्माण, जरूरी मरम्मत, स्कूल, आंगनबाड़ी, डिस्पेंसरी, पीने का पानी और जरूरी सार्वजनिक सुविधाओं को छूट दी गई है। लेकिन ऐसे काम भी वन्यजीवों की आवाजाही में रुकावट नहीं डाल सकेंगे। 8 हफ्ते में मैपिंक करने के लिए कहा कोर्ट ने पाली के वन विभाग को आठ सप्ताह में तेंदुआ आवास की जियो-रेफरेंस्ड मैपिंग करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, नाइट सफारी, स्पॉटलाइट, ड्रोन, बाइटिंग और गुफाओं के आसपास भीड़ जैसी गतिविधियों पर रोक जारी रहेगी। ये भी पढ़ें… जवाई लेपर्ड एरिया में निर्माण-माइनिंग पर रोक:होटल-रिसॉर्ट का नया लाइसेंस नहीं मिलेगा, हाईकोर्ट ने कहा-क्षेत्र को अभयारण्य बनाने पर विचार करे सरकार राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने पाली जिले की जवाई लेपर्ड सफारी में नए निर्माण पर पांबदी, खनन सहित होटल-रिसॉर्ट के नए लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा दी है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने मंगलवार को सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए। (पूरी खबर पढ़ें)

