नालन्दा के दीपनगर थाना क्षेत्र के नेपुरा पंचायत अंतर्गत बेरौटी गांव में भूमि विवाद को लेकर एक दलित परिवार ने गांव के ही कुछ दबंगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित विजय पासवान और उनके परिजनों ने नालंदा डीएम, एसडीओ और अंचलाधिकारी को आवेदन देकर न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाई है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि उनकी पुश्तैनी रैयती जमीन पर जबरन सरकारी स्कूल का निर्माण कराया जा रहा है। विरोध करने पर उन्हें गांव से भगाने और जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। पुश्तैनी जमीन पर जबरन स्कूल निर्माण का आरोप एसडीओ को दिए गए आवेदन और मीडिया से बातचीत में विजय पासवान ने बताया कि मौजा बेरौटी (थाना नं- 325, खाता- 29, खसरा- 819) में उनकी पुश्तैनी 66 डिसमिल (अमीन की नापी के अनुसार 64 डिसमिल) जमीन है। यह जमीन उनके पूर्वज गेनौरी पासवान और गोपी दुसाध के नाम से दर्ज (हुकुमनामा/खतियानी) है। आरोप है कि इस 64 डिसमिल अराजी में से लगभग 30 डिसमिल जमीन पर गांव के कुछ लोगों द्वारा जबरन सरकारी स्कूल बनाने का कार्य किया जा रहा था। पूर्व में सीओ की जांच के बाद इस निर्माण कार्य को रोक दिया गया था। सादे कागज पर हस्ताक्षर कराने का दबाव विजय पासवान और जोगिंदर कुमार ने बताया कि निर्माण कार्य रोके जाने के बाद, 4 सितंबर की रात को पंचायत सरपंच और गांव के एक समुदाय के लोगों ने ढोल पिटवाकर उन्हें बुलाया। पुलिस प्रशासन के हस्तक्षेप से रात में मामला शांत हुआ। लेकिन अगले दिन सुबह सूर्य मंदिर के पास दोबारा पंचायत बुलाई गई, जहां पीड़ित परिवार पर सादे कागज पर हस्ताक्षर करने का भारी दबाव बनाया गया। घर में तोड़फोड़ और मवेशी खोलने का भी आरोप परिजनों का आरोप है कि गांव के एक व्यक्ति अपने 10-15 गुर्गों के साथ आए दिन उनके घर आते हैं, बर्तन तोड़फोड़ करते हैं और मवेशियों को खोल देते हैं। सीमा देवी ने बताया कि दबंग धमकी दे रहे हैं कि अगर उन्होंने स्कूल बनने का विरोध बंद नहीं किया और सभी जगहों से अपनी शिकायतें वापस नहीं लीं, तो उन्हें उनके वर्तमान घर (जहां वे 5 डिसमिल में रह रहे हैं) उसे भी 2 महीने के अंदर बेदखल कर दिया जाएगा। मुखिया चुनाव की राजनीतिक साजिश का दावा जोगिंदर कुमार और विजय पासवान ने दावा किया कि इस पूरे विवाद के पीछे राजनीतिक मंशा है। उनका आरोप है कि गांव का एक व्यक्ति आगामी पंचायत चुनाव में मुखिया पद के उम्मीदवार हैं। वे दलित परिवार की जमीन पर स्कूल बनवाकर गांव में अपना चुनावी वोट बैंक मजबूत करना चाहते हैं, जबकि वे खुद गांव में नहीं बल्कि रांची में रहते हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि गांव में उनकी आबादी कम है और गरीब हैं, जिसका फायदा उठाकर बहुसंख्यक समुदाय उन्हें डरा-धमका रहा है। प्रशासन से जान-माल की सुरक्षा की मांग पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने अपनी जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही पुश्तैनी जमीन पर कथित कब्जे और स्कूल निर्माण को रोकने की गुहार लगाई है। नालन्दा के दीपनगर थाना क्षेत्र के नेपुरा पंचायत अंतर्गत बेरौटी गांव में भूमि विवाद को लेकर एक दलित परिवार ने गांव के ही कुछ दबंगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित विजय पासवान और उनके परिजनों ने नालंदा डीएम, एसडीओ और अंचलाधिकारी को आवेदन देकर न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाई है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि उनकी पुश्तैनी रैयती जमीन पर जबरन सरकारी स्कूल का निर्माण कराया जा रहा है। विरोध करने पर उन्हें गांव से भगाने और जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। पुश्तैनी जमीन पर जबरन स्कूल निर्माण का आरोप एसडीओ को दिए गए आवेदन और मीडिया से बातचीत में विजय पासवान ने बताया कि मौजा बेरौटी (थाना नं- 325, खाता- 29, खसरा- 819) में उनकी पुश्तैनी 66 डिसमिल (अमीन की नापी के अनुसार 64 डिसमिल) जमीन है। यह जमीन उनके पूर्वज गेनौरी पासवान और गोपी दुसाध के नाम से दर्ज (हुकुमनामा/खतियानी) है। आरोप है कि इस 64 डिसमिल अराजी में से लगभग 30 डिसमिल जमीन पर गांव के कुछ लोगों द्वारा जबरन सरकारी स्कूल बनाने का कार्य किया जा रहा था। पूर्व में सीओ की जांच के बाद इस निर्माण कार्य को रोक दिया गया था। सादे कागज पर हस्ताक्षर कराने का दबाव विजय पासवान और जोगिंदर कुमार ने बताया कि निर्माण कार्य रोके जाने के बाद, 4 सितंबर की रात को पंचायत सरपंच और गांव के एक समुदाय के लोगों ने ढोल पिटवाकर उन्हें बुलाया। पुलिस प्रशासन के हस्तक्षेप से रात में मामला शांत हुआ। लेकिन अगले दिन सुबह सूर्य मंदिर के पास दोबारा पंचायत बुलाई गई, जहां पीड़ित परिवार पर सादे कागज पर हस्ताक्षर करने का भारी दबाव बनाया गया। घर में तोड़फोड़ और मवेशी खोलने का भी आरोप परिजनों का आरोप है कि गांव के एक व्यक्ति अपने 10-15 गुर्गों के साथ आए दिन उनके घर आते हैं, बर्तन तोड़फोड़ करते हैं और मवेशियों को खोल देते हैं। सीमा देवी ने बताया कि दबंग धमकी दे रहे हैं कि अगर उन्होंने स्कूल बनने का विरोध बंद नहीं किया और सभी जगहों से अपनी शिकायतें वापस नहीं लीं, तो उन्हें उनके वर्तमान घर (जहां वे 5 डिसमिल में रह रहे हैं) उसे भी 2 महीने के अंदर बेदखल कर दिया जाएगा। मुखिया चुनाव की राजनीतिक साजिश का दावा जोगिंदर कुमार और विजय पासवान ने दावा किया कि इस पूरे विवाद के पीछे राजनीतिक मंशा है। उनका आरोप है कि गांव का एक व्यक्ति आगामी पंचायत चुनाव में मुखिया पद के उम्मीदवार हैं। वे दलित परिवार की जमीन पर स्कूल बनवाकर गांव में अपना चुनावी वोट बैंक मजबूत करना चाहते हैं, जबकि वे खुद गांव में नहीं बल्कि रांची में रहते हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि गांव में उनकी आबादी कम है और गरीब हैं, जिसका फायदा उठाकर बहुसंख्यक समुदाय उन्हें डरा-धमका रहा है। प्रशासन से जान-माल की सुरक्षा की मांग पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने अपनी जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही पुश्तैनी जमीन पर कथित कब्जे और स्कूल निर्माण को रोकने की गुहार लगाई है।

