मजबूरी : घर-बार छोड़कर पलायन की तैयारी में ग्रामीण तीन नावों का सहारा, मगर स्थायी समाधान की दरकार

मजबूरी : घर-बार छोड़कर पलायन की तैयारी में ग्रामीण तीन नावों का सहारा, मगर स्थायी समाधान की दरकार

भास्कर न्यूज|योगापट्‌टी, बेतिया नेपाल के तराई क्षेत्रों और वाल्मीकिनगर बराज से पानी छोड़े जाने के बाद गंडक नदी ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। प्रखंड क्षेत्र के सिसवा मंगलपुर पंचायत स्थित सिसवा, खाप टोला और इसके आसपास के निचले इलाकों में गंडक का पानी तेजी से प्रवेश कर रहा है। बाढ़ का पानी दर्जनों घरों के भीतर तक फैल चुका है, जिससे ग्रामीणों की रात की नींद और दिन का चैन छीन गया है। चारों तरफ फैले पानी के कारण लोगों को रोजमर्रा के जरूरी सामान लाने, भोजन पकाने और दैनिक कार्यों के लिए भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है और लोग किसी बड़ी अनहोनी की आशंका से सहमे हुए हैं। स्थानीय ग्रामीण सरदार पांडेय, विनोद पटेल, प्यारे लाल पटेल, भरत पटेल, शत्रुघ्न पटेल और सिपाई पटेल ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि सिसवा गांव में पिछले 20 दिनों से गंडक नदी का भीषण कटाव जारी है। नदी का बहाव इतना तेज है कि हर बीतते दिन के साथ उपजाऊ जमीन और कई मकान कटाव की जद में आ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कटाव शुरू होते ही जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक सूचना दी गई, लेकिन तीन हफ्ते बीत जाने के बावजूद कटावरोधी कार्य शुरू नहीं कराया जा सका। प्रशासन की इस आपराधिक अनदेखी और बेरुखी के कारण गंडक विभाग के अधिकारियों के खिलाफ ग्रामीणों में आक्रोश पनप रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कटाव रोकने के लिए पक्के और ठोस उपाय नहीं किए गए, तो पूरा गांव नदी के पेट में समा जाएगा। नदी की तेज धारा अब आबादी वाले इलाकों के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी है। अपनी गाढ़ी कमाई से बनाए आशियाने और पुश्तैनी जमीन को अपनी आंखों के सामने नदी में विलीन होते देख ग्रामीणों का कलेजा कांप उठता है। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए कई परिवार अपने जरूरी सामान, अनाज और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों व ऊंचे बांधों पर ले जाने की तैयारी में जुट गए हैं। उधर, मामले में अंचलाधिकारी विक्रम सिंह ने बताया कि प्रभावित ग्रामीणों के आवागमन को सुगम बनाने के लिए प्रशासन की ओर से तीन सरकारी नावों की व्यवस्था कर दी गई है। उन्होंने दावा किया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और राहत कार्य संचालित किए जा रहे हैं। भास्कर न्यूज|योगापट्‌टी, बेतिया नेपाल के तराई क्षेत्रों और वाल्मीकिनगर बराज से पानी छोड़े जाने के बाद गंडक नदी ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। प्रखंड क्षेत्र के सिसवा मंगलपुर पंचायत स्थित सिसवा, खाप टोला और इसके आसपास के निचले इलाकों में गंडक का पानी तेजी से प्रवेश कर रहा है। बाढ़ का पानी दर्जनों घरों के भीतर तक फैल चुका है, जिससे ग्रामीणों की रात की नींद और दिन का चैन छीन गया है। चारों तरफ फैले पानी के कारण लोगों को रोजमर्रा के जरूरी सामान लाने, भोजन पकाने और दैनिक कार्यों के लिए भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है और लोग किसी बड़ी अनहोनी की आशंका से सहमे हुए हैं। स्थानीय ग्रामीण सरदार पांडेय, विनोद पटेल, प्यारे लाल पटेल, भरत पटेल, शत्रुघ्न पटेल और सिपाई पटेल ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि सिसवा गांव में पिछले 20 दिनों से गंडक नदी का भीषण कटाव जारी है। नदी का बहाव इतना तेज है कि हर बीतते दिन के साथ उपजाऊ जमीन और कई मकान कटाव की जद में आ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कटाव शुरू होते ही जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक सूचना दी गई, लेकिन तीन हफ्ते बीत जाने के बावजूद कटावरोधी कार्य शुरू नहीं कराया जा सका। प्रशासन की इस आपराधिक अनदेखी और बेरुखी के कारण गंडक विभाग के अधिकारियों के खिलाफ ग्रामीणों में आक्रोश पनप रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कटाव रोकने के लिए पक्के और ठोस उपाय नहीं किए गए, तो पूरा गांव नदी के पेट में समा जाएगा। नदी की तेज धारा अब आबादी वाले इलाकों के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी है। अपनी गाढ़ी कमाई से बनाए आशियाने और पुश्तैनी जमीन को अपनी आंखों के सामने नदी में विलीन होते देख ग्रामीणों का कलेजा कांप उठता है। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए कई परिवार अपने जरूरी सामान, अनाज और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों व ऊंचे बांधों पर ले जाने की तैयारी में जुट गए हैं। उधर, मामले में अंचलाधिकारी विक्रम सिंह ने बताया कि प्रभावित ग्रामीणों के आवागमन को सुगम बनाने के लिए प्रशासन की ओर से तीन सरकारी नावों की व्यवस्था कर दी गई है। उन्होंने दावा किया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और राहत कार्य संचालित किए जा रहे हैं।  

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