जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर अस्पतालों में भी खास रौनक देखने को मिल रही है। कई परिवार इस दिन बच्चे के जन्म को शुभ मानते हुए मुहूर्त के अनुसार डिलीवरी प्लान कर रहे हैं। गयाजी के अस्पतालों में शुक्रवार को कई बच्चों ने जन्म लिया, वहीं कुछ परिजन रात 12 बजे या पंडित के बताए गए शुभ समय पर डिलीवरी कराने की तैयारी में रहे। डॉक्टरों के मुताबिक, सिजेरियन डिलीवरी में समय तय किया जा सकता है, लेकिन सामान्य प्रसव प्राकृतिक प्रक्रिया होने के कारण पूरी तरह मुहूर्त के अनुसार कराना संभव नहीं होता। जन्माष्टमी पर इस बार रोहिणी नक्षत्र और हर्षण योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस कारण अभिभावक इसी शुभ मुहूर्त में बच्चे को जन्म दिलाना चाहते हैं। शहर के टॉप अस्पतालों में आम दिनों के मुकाबले सिजेरियन डिलीवरी में 40 से 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। इस एक दिन के लिए स्पेशल डिलीवरी पैकेज की डिमांड बढ़ गई है। मैटरनिटी बिजनेस में करीब 30% का अतिरिक्त मुनाफा देखा जा रहा है।
डॉक्टर को किसी तरह की चुनौती का करना पड़ता सामना, कैसा रहता दबाव, डॉक्टर और ज्योतिषाचार्य ने क्या बोला, पढ़ें रिपोर्ट…. ‘वेट कर रहे, कितने कष्ण और कितनी राधा आएंगी’ वरदान हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मेघा सिन्हा ने बताया कि हमारे यहां आज कुछ मरीज भर्ती हैं। किसी ने अभी तक तो टाइम नहीं लिया है, लेकिन हम लोग वेट कर रहे हैं। पिछले साल हम लोग के यहां लगभग 8-9 बच्चों ने जन्म लिया था, जिसमें 6 लड़के थे और 2 लड़कियां थीं। इस बार भी पेसेंट हैं, लेकिन शुभ मुहूर्त की अभी ऐसी कोई डिमांड नहीं आई है। अभी दिन की शुरुआत हो रही है, तो हम लोग इंतजार कर रहे हैं कि कितने बच्चे आएंगे, कितने कृष्ण जन्म लेंगे और कितनी राधा आएंगी। जन्माष्टमी एक शुभ अवसर है, काफी सारे मरीज प्लान करके एक घड़ी देखकर, समय देखकर डिलीवरी करवाना चाहते हैं।
‘लोगों की डिमांड होती है कि 12 बजे डिलीवरी हो’ मेडिवर्स अस्पताल की डॉ. तेजस्वी नंदन (गायनकोलॉजिस्ट) का कहना है कि लोगों में आजकल बहुत यह ट्रेंड चल रहा है कि अच्छा डेट, अच्छा मुहूर्त देखकर लोग अपना डिलीवरी प्लान करते हैं। नॉर्मल डिलीवरी तो भगवान का कॉल है, वह पेन कभी भी स्टार्ट हो सकता है। नॉर्मल हम लोग प्लान नहीं कर सकते, लेकिन जिनको सिजेरियन प्लान करना है, सब लोग अपना टाइम-डेट आजकल फिक्स करके ही आते हैं। आज तो जन्माष्टमी बहुत ही अच्छा दिन है, तो आज बहुत लोगों ने प्लान किया है। शुक्रवार को अभी तक हम लोग 10 डिलीवरी करा चुके हैं। 10 में से 6 लड़के और 4 लड़कियां हैं। आगे देखते हैं कि कितनी डिलीवरीज होती हैं। लोगों की डिमांड होती है कि एग्जैक्ट 12 बजे… कभी-कभी अगर हम लोग पहले भी कर लेते हैं, तो वेट करते हैं कि 12 बजे ही हेड निकलना चाहिए बच्चे का। लोगों का विश्वास होता है तो हम लोग उसको डेफिनेटली फॉलो करते हैं। रात के 12 बजे भी प्लान है 1-2 डिलीवरीज हैं। ‘कभी-कभी दिक्कत होती है, जैसे ऑड टाइम’
डॉ. तेजस्वी नंदन ने बताया कि पंडित जी का ही डेट रहता है, जो भी पेशेंट्स अपना मुहूर्त लेकर आते हैं, वह पंडित जी की ओर से फिक्स किया रहता है। कोई कहता है कि 1 से 2 बजे के बीच में चाहिए, कोई सुबह-सुबह 4 बजे चाहिए। सबका अपना रिलीजियस बिलीव है, तो हम लोग उसको डेफिनेटली फॉलो करते हैं। कभी-कभी दिक्कत होती है, जैसे कोई ऑड टाइम रहा। लेकिन फिर भी प्लान किया जाता है क्योंकि इमरजेंसी ब्रांच है हमारा, तो उस हिसाब से सब लाइन अप करते हैं। दिक्कत तब आती है जब नॉर्मल डिलीवरी पेशेंट हैं और उनको आज ही कराना है, तब इंडक्शन पेन इंड्यूस हम लोग कर रहे हैं, लेकिन कभी-कभी डिलीवरी फंसती भी है, नहीं भी होती है, डेट पार भी हो जाता है। अस्पतालों में ‘माइक्रो-मैनेजमेंट’ और 12 बजे चीरा लगाने का दबाव
डॉ. संगीता कहती हैं कि रात 12 बजे का समय तय करने के लिए परिजनों का डॉक्टरों पर दबाव रहता है। ओटी में डॉक्टरों के लिए 12:00 बजे का समय मैच करना बहुत बड़ी चुनौती होती है। कई बार सर्जिकल प्रक्रिया 11:45 पर शुरू करके ठीक 12 बजे शिशु को गर्भ से बाहर निकाला जाता है। पीडियाट्रिशियंस का कहना है कि सिर्फ मुहूर्त के लिए प्री-मैच्योर डिलीवरी कराना शिशु के फेफड़ों और दिमागी विकास के लिए घातक हो सकता है। ‘प्राकृतिक जन्म ही सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त’ ज्योतिषाचार्य डॉ. अजय मिश्रा का कहना है कि जन्माष्टमी का दिन सनातन संस्कृति में पवित्र और दिव्य ऊर्जा से भरा माना जाता है। रोहिणी नक्षत्र और श्रेष्ठ योगों में जन्म लेने वाले बालकों में कुशाग्र बुद्धि और निडरता के गुण आते हैं, लेकिन अभिभावकों को समझना होगा कि प्राकृतिक जन्म ही सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त होता है। केवल मुहूर्त के मोह में आकर समय से पहले या जबरन सिजेरियन ऑपरेशन का दबाव बनाना शास्त्र और चिकित्सा दोनों दृष्टिकोण से अनुचित है। जब बालक का स्वाभाविक जन्म होता है। वही उसके भाग्य का असली लग्न बनता है।
जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर अस्पतालों में भी खास रौनक देखने को मिल रही है। कई परिवार इस दिन बच्चे के जन्म को शुभ मानते हुए मुहूर्त के अनुसार डिलीवरी प्लान कर रहे हैं। गयाजी के अस्पतालों में शुक्रवार को कई बच्चों ने जन्म लिया, वहीं कुछ परिजन रात 12 बजे या पंडित के बताए गए शुभ समय पर डिलीवरी कराने की तैयारी में रहे। डॉक्टरों के मुताबिक, सिजेरियन डिलीवरी में समय तय किया जा सकता है, लेकिन सामान्य प्रसव प्राकृतिक प्रक्रिया होने के कारण पूरी तरह मुहूर्त के अनुसार कराना संभव नहीं होता। जन्माष्टमी पर इस बार रोहिणी नक्षत्र और हर्षण योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस कारण अभिभावक इसी शुभ मुहूर्त में बच्चे को जन्म दिलाना चाहते हैं। शहर के टॉप अस्पतालों में आम दिनों के मुकाबले सिजेरियन डिलीवरी में 40 से 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। इस एक दिन के लिए स्पेशल डिलीवरी पैकेज की डिमांड बढ़ गई है। मैटरनिटी बिजनेस में करीब 30% का अतिरिक्त मुनाफा देखा जा रहा है।
डॉक्टर को किसी तरह की चुनौती का करना पड़ता सामना, कैसा रहता दबाव, डॉक्टर और ज्योतिषाचार्य ने क्या बोला, पढ़ें रिपोर्ट…. ‘वेट कर रहे, कितने कष्ण और कितनी राधा आएंगी’ वरदान हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मेघा सिन्हा ने बताया कि हमारे यहां आज कुछ मरीज भर्ती हैं। किसी ने अभी तक तो टाइम नहीं लिया है, लेकिन हम लोग वेट कर रहे हैं। पिछले साल हम लोग के यहां लगभग 8-9 बच्चों ने जन्म लिया था, जिसमें 6 लड़के थे और 2 लड़कियां थीं। इस बार भी पेसेंट हैं, लेकिन शुभ मुहूर्त की अभी ऐसी कोई डिमांड नहीं आई है। अभी दिन की शुरुआत हो रही है, तो हम लोग इंतजार कर रहे हैं कि कितने बच्चे आएंगे, कितने कृष्ण जन्म लेंगे और कितनी राधा आएंगी। जन्माष्टमी एक शुभ अवसर है, काफी सारे मरीज प्लान करके एक घड़ी देखकर, समय देखकर डिलीवरी करवाना चाहते हैं।
‘लोगों की डिमांड होती है कि 12 बजे डिलीवरी हो’ मेडिवर्स अस्पताल की डॉ. तेजस्वी नंदन (गायनकोलॉजिस्ट) का कहना है कि लोगों में आजकल बहुत यह ट्रेंड चल रहा है कि अच्छा डेट, अच्छा मुहूर्त देखकर लोग अपना डिलीवरी प्लान करते हैं। नॉर्मल डिलीवरी तो भगवान का कॉल है, वह पेन कभी भी स्टार्ट हो सकता है। नॉर्मल हम लोग प्लान नहीं कर सकते, लेकिन जिनको सिजेरियन प्लान करना है, सब लोग अपना टाइम-डेट आजकल फिक्स करके ही आते हैं। आज तो जन्माष्टमी बहुत ही अच्छा दिन है, तो आज बहुत लोगों ने प्लान किया है। शुक्रवार को अभी तक हम लोग 10 डिलीवरी करा चुके हैं। 10 में से 6 लड़के और 4 लड़कियां हैं। आगे देखते हैं कि कितनी डिलीवरीज होती हैं। लोगों की डिमांड होती है कि एग्जैक्ट 12 बजे… कभी-कभी अगर हम लोग पहले भी कर लेते हैं, तो वेट करते हैं कि 12 बजे ही हेड निकलना चाहिए बच्चे का। लोगों का विश्वास होता है तो हम लोग उसको डेफिनेटली फॉलो करते हैं। रात के 12 बजे भी प्लान है 1-2 डिलीवरीज हैं। ‘कभी-कभी दिक्कत होती है, जैसे ऑड टाइम’
डॉ. तेजस्वी नंदन ने बताया कि पंडित जी का ही डेट रहता है, जो भी पेशेंट्स अपना मुहूर्त लेकर आते हैं, वह पंडित जी की ओर से फिक्स किया रहता है। कोई कहता है कि 1 से 2 बजे के बीच में चाहिए, कोई सुबह-सुबह 4 बजे चाहिए। सबका अपना रिलीजियस बिलीव है, तो हम लोग उसको डेफिनेटली फॉलो करते हैं। कभी-कभी दिक्कत होती है, जैसे कोई ऑड टाइम रहा। लेकिन फिर भी प्लान किया जाता है क्योंकि इमरजेंसी ब्रांच है हमारा, तो उस हिसाब से सब लाइन अप करते हैं। दिक्कत तब आती है जब नॉर्मल डिलीवरी पेशेंट हैं और उनको आज ही कराना है, तब इंडक्शन पेन इंड्यूस हम लोग कर रहे हैं, लेकिन कभी-कभी डिलीवरी फंसती भी है, नहीं भी होती है, डेट पार भी हो जाता है। अस्पतालों में ‘माइक्रो-मैनेजमेंट’ और 12 बजे चीरा लगाने का दबाव
डॉ. संगीता कहती हैं कि रात 12 बजे का समय तय करने के लिए परिजनों का डॉक्टरों पर दबाव रहता है। ओटी में डॉक्टरों के लिए 12:00 बजे का समय मैच करना बहुत बड़ी चुनौती होती है। कई बार सर्जिकल प्रक्रिया 11:45 पर शुरू करके ठीक 12 बजे शिशु को गर्भ से बाहर निकाला जाता है। पीडियाट्रिशियंस का कहना है कि सिर्फ मुहूर्त के लिए प्री-मैच्योर डिलीवरी कराना शिशु के फेफड़ों और दिमागी विकास के लिए घातक हो सकता है। ‘प्राकृतिक जन्म ही सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त’ ज्योतिषाचार्य डॉ. अजय मिश्रा का कहना है कि जन्माष्टमी का दिन सनातन संस्कृति में पवित्र और दिव्य ऊर्जा से भरा माना जाता है। रोहिणी नक्षत्र और श्रेष्ठ योगों में जन्म लेने वाले बालकों में कुशाग्र बुद्धि और निडरता के गुण आते हैं, लेकिन अभिभावकों को समझना होगा कि प्राकृतिक जन्म ही सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त होता है। केवल मुहूर्त के मोह में आकर समय से पहले या जबरन सिजेरियन ऑपरेशन का दबाव बनाना शास्त्र और चिकित्सा दोनों दृष्टिकोण से अनुचित है। जब बालक का स्वाभाविक जन्म होता है। वही उसके भाग्य का असली लग्न बनता है।

