कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर शुक्रवार को दरभंगा जिले में करीब 300 से अधिक बच्चों ने जन्म लिया। इनमें सबसे अधिक प्रसव डीएमसीएच में हुए, जहां करीब 27 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें सामान्य प्रसव के साथ जरूरत के अनुसार सिजेरियन डिलीवरी भी कराई गई। जन्माष्टमी के दिन बच्चे के जन्म को लेकर कई परिवारों में खुशी का माहौल रहा। हालांकि, अस्पतालों में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया, जिसमें किसी परिवार ने सिर्फ जन्माष्टमी के दिन बच्चे का जन्म कराने के लिए पहले से ऑपरेशन की तारीख बुक कराई हो। डॉक्टर का कहना है कि समय पूरा होने से पहले सिर्फ शुभ दिन के लिए प्रसव कराना उचित नहीं है।
जिले के सरकारी अस्पतालों से मिले आंकड़ों के अनुसार सिंहवाड़ा सीएचसी में 15, केवटी सीएचसी में 8, डीएमसीएच में 27, सतीघाट पीएचसी में 7, सदर पीएचसी में 7, बिरौल अनुमंडलीय अस्पताल में 9, बेनीपुर अनुमंडलीय अस्पताल में 13, मनीगाछी पीएचसी में 7 और अलीनगर में 9, जाले में 14 बच्चों का जन्म हुआ। निजी अस्पतालों में भी सामान्य दिनों की तरह ही प्रसव हुए। जन्माष्टमी के शुभ मुहूर्त पर कृष्ण जन्म
पंडित चंद्रमणि झा ने बताया कि मिथिला पंचांग के अनुसार शुक्रवार की रात 11:21 बजे अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होगा। इसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का शुभ मुहूर्त माना जाता है। उन्होंने बताया कि जो श्रद्धालु जन्माष्टमी का व्रत रखते हैं, वे भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना और जन्म के बाद इसी समय अपने व्रत का पारण कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि संतान की इच्छा रखने वाले लोगों और प्रेम संबंध में बंधे लोगों के लिए भी भगवान श्रीकृष्ण की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। जन्म के शुभ समय पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना, उनके नाम का जाप और भक्ति करने से मनोकामना पूर्ण होने का धार्मिक विश्वास है।
पंडित चंद्रमणि झा ने बताया कि दरभंगा में उनके गांव में करीब सैकड़ों वर्षों से कृष्ण जन्माष्टमी के आयोजन की परंपरा चली आ रही है, जो आज भी जारी है।
डॉक्टरों ने कहा- बच्चे के स्वास्थ्य से समझौता नहीं
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. शशि प्रभा सिन्हा ने बताया कि जन्माष्टमी के दिन उनके यहां 2 बच्चों का सिजेरियन से जन्म हुआ। शुरुआत में दोनों मामले थोड़े क्रिटिकल थे, लेकिन अब जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित और स्वस्थ हैं। उन्होंने बताया कि पहले दोनों महिलाओं में सामान्य प्रसव कराने का प्रयास किया गया। सामान्य डिलीवरी संभव नहीं होने की स्थिति में चिकित्सकीय जरूरत के आधार पर सिजेरियन किया गया। उन्होंने कहा कि कई गर्भवती महिलाओं और उनके पति की इच्छा रहती है कि बच्चे का जन्म कृष्ण जन्माष्टमी के दिन हो, लेकिन डॉक्टर का दायित्व है कि गर्भावस्था की अवधि और मां-बच्चे की स्थिति को देखते हुए सही सलाह दें। यदि डिलीवरी का समय पूरा हो चुका है और प्राकृतिक रूप से प्रसव की स्थिति बन रही है तो जन्माष्टमी के दिन बच्चे का जन्म होना संयोग हो सकता है। ‘संभावित तारीख में हो सकता है अंतर’
डॉ. सिन्हा ने बताया कि प्रसव की संभावित तिथि निश्चित नहीं होती। संभावित तारीख के आसपास एक-दो सप्ताह का अंतर हो सकता है। यदि इस अवधि में जन्माष्टमी की तारीख आती है तो बच्चे का जन्म उस दिन होना स्वाभाविक है। लेकिन सिर्फ जन्माष्टमी के दिन बच्चे को जन्म देने के लिए समय से पहले ऑपरेशन करना उचित नहीं है।
उन्होंने बताया कि इस बार भी उनके यहां प्रसव सामान्य दिनों की तरह ही हुए। किसी परिवार ने पहले से यह बुकिंग नहीं कराई थी कि रात 12 बजे या किसी खास समय पर ऑपरेशन कर बच्चे का जन्म कराया जाए। पोता होने पर कहा, कृष्ण भगवान का आशीर्वाद मिला
डीएमसीएच में मधुबनी से अपनी पुत्रवधू की डिलीवरी कराने पहुंची विमला देवी ने बताया कि उनके बेटे की पहले से एक बेटी है। परिवार इस बार पोते की इच्छा रखता था। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन पोते के जन्म से पूरा परिवार बेहद खुश है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद उनके परिवार पर हुआ है। परिवार बच्चे का नाम भी भगवान श्रीकृष्ण के नाम पर रखने की तैयारी कर रहा है। आठ साल बाद घर में गूंजी किलकारी
महेंद्र झा ने बताया कि बेटी की शादी को करीब आठ साल हो चुके थे, लेकिन अब तक संतान नहीं थी। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन डीएमसीएच में पोते का जन्म हुआ है। इसे भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद बताया। महेंद्र झा ने कहा कि उनका बेटा मुंबई में रहता है और पोते के जन्म की खबर मिलते ही वह ट्रेन से घर के लिए रवाना हो गया है। उन्होंने कहा कि लंबे इंतजार के बाद बच्चे के आने से उनके घर का पूरा माहौल खुशियों से भर गया है। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर शुक्रवार को दरभंगा जिले में करीब 300 से अधिक बच्चों ने जन्म लिया। इनमें सबसे अधिक प्रसव डीएमसीएच में हुए, जहां करीब 27 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें सामान्य प्रसव के साथ जरूरत के अनुसार सिजेरियन डिलीवरी भी कराई गई। जन्माष्टमी के दिन बच्चे के जन्म को लेकर कई परिवारों में खुशी का माहौल रहा। हालांकि, अस्पतालों में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया, जिसमें किसी परिवार ने सिर्फ जन्माष्टमी के दिन बच्चे का जन्म कराने के लिए पहले से ऑपरेशन की तारीख बुक कराई हो। डॉक्टर का कहना है कि समय पूरा होने से पहले सिर्फ शुभ दिन के लिए प्रसव कराना उचित नहीं है।
जिले के सरकारी अस्पतालों से मिले आंकड़ों के अनुसार सिंहवाड़ा सीएचसी में 15, केवटी सीएचसी में 8, डीएमसीएच में 27, सतीघाट पीएचसी में 7, सदर पीएचसी में 7, बिरौल अनुमंडलीय अस्पताल में 9, बेनीपुर अनुमंडलीय अस्पताल में 13, मनीगाछी पीएचसी में 7 और अलीनगर में 9, जाले में 14 बच्चों का जन्म हुआ। निजी अस्पतालों में भी सामान्य दिनों की तरह ही प्रसव हुए। जन्माष्टमी के शुभ मुहूर्त पर कृष्ण जन्म
पंडित चंद्रमणि झा ने बताया कि मिथिला पंचांग के अनुसार शुक्रवार की रात 11:21 बजे अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होगा। इसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का शुभ मुहूर्त माना जाता है। उन्होंने बताया कि जो श्रद्धालु जन्माष्टमी का व्रत रखते हैं, वे भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना और जन्म के बाद इसी समय अपने व्रत का पारण कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि संतान की इच्छा रखने वाले लोगों और प्रेम संबंध में बंधे लोगों के लिए भी भगवान श्रीकृष्ण की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। जन्म के शुभ समय पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना, उनके नाम का जाप और भक्ति करने से मनोकामना पूर्ण होने का धार्मिक विश्वास है।
पंडित चंद्रमणि झा ने बताया कि दरभंगा में उनके गांव में करीब सैकड़ों वर्षों से कृष्ण जन्माष्टमी के आयोजन की परंपरा चली आ रही है, जो आज भी जारी है।
डॉक्टरों ने कहा- बच्चे के स्वास्थ्य से समझौता नहीं
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. शशि प्रभा सिन्हा ने बताया कि जन्माष्टमी के दिन उनके यहां 2 बच्चों का सिजेरियन से जन्म हुआ। शुरुआत में दोनों मामले थोड़े क्रिटिकल थे, लेकिन अब जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित और स्वस्थ हैं। उन्होंने बताया कि पहले दोनों महिलाओं में सामान्य प्रसव कराने का प्रयास किया गया। सामान्य डिलीवरी संभव नहीं होने की स्थिति में चिकित्सकीय जरूरत के आधार पर सिजेरियन किया गया। उन्होंने कहा कि कई गर्भवती महिलाओं और उनके पति की इच्छा रहती है कि बच्चे का जन्म कृष्ण जन्माष्टमी के दिन हो, लेकिन डॉक्टर का दायित्व है कि गर्भावस्था की अवधि और मां-बच्चे की स्थिति को देखते हुए सही सलाह दें। यदि डिलीवरी का समय पूरा हो चुका है और प्राकृतिक रूप से प्रसव की स्थिति बन रही है तो जन्माष्टमी के दिन बच्चे का जन्म होना संयोग हो सकता है। ‘संभावित तारीख में हो सकता है अंतर’
डॉ. सिन्हा ने बताया कि प्रसव की संभावित तिथि निश्चित नहीं होती। संभावित तारीख के आसपास एक-दो सप्ताह का अंतर हो सकता है। यदि इस अवधि में जन्माष्टमी की तारीख आती है तो बच्चे का जन्म उस दिन होना स्वाभाविक है। लेकिन सिर्फ जन्माष्टमी के दिन बच्चे को जन्म देने के लिए समय से पहले ऑपरेशन करना उचित नहीं है।
उन्होंने बताया कि इस बार भी उनके यहां प्रसव सामान्य दिनों की तरह ही हुए। किसी परिवार ने पहले से यह बुकिंग नहीं कराई थी कि रात 12 बजे या किसी खास समय पर ऑपरेशन कर बच्चे का जन्म कराया जाए। पोता होने पर कहा, कृष्ण भगवान का आशीर्वाद मिला
डीएमसीएच में मधुबनी से अपनी पुत्रवधू की डिलीवरी कराने पहुंची विमला देवी ने बताया कि उनके बेटे की पहले से एक बेटी है। परिवार इस बार पोते की इच्छा रखता था। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन पोते के जन्म से पूरा परिवार बेहद खुश है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद उनके परिवार पर हुआ है। परिवार बच्चे का नाम भी भगवान श्रीकृष्ण के नाम पर रखने की तैयारी कर रहा है। आठ साल बाद घर में गूंजी किलकारी
महेंद्र झा ने बताया कि बेटी की शादी को करीब आठ साल हो चुके थे, लेकिन अब तक संतान नहीं थी। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन डीएमसीएच में पोते का जन्म हुआ है। इसे भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद बताया। महेंद्र झा ने कहा कि उनका बेटा मुंबई में रहता है और पोते के जन्म की खबर मिलते ही वह ट्रेन से घर के लिए रवाना हो गया है। उन्होंने कहा कि लंबे इंतजार के बाद बच्चे के आने से उनके घर का पूरा माहौल खुशियों से भर गया है।

