आज कृष्ण जन्माष्टमी है। बनारस में जगह-जगह भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। इस्कॉन में श्रद्धालुओं की लंबी भीड़ लगी है। दुर्गाकुंड समेत शहर के मंदिरों में भी जन्माष्टमी की तैयारियां और उत्सव दिखाई दे रहा है। पूरा देश कान्हा के जन्मोत्सव में डूबा है। लेकिन बनारस का एक कोना ऐसा भी है, जहां जन्माष्टमी के दिन भी बाढ़ पीड़ित परिवारों की जिंदगी में त्योहार की जगह परेशानी और बेबसी है। जन्माष्टमी की स्थिति जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम राहत शिविरों में पहुंची। नख्खी घाट के चित्रकूट स्कूल में बने राहत शिविर में करीब 104 लोग रह रहे हैं। यहां महिलाओं ने बताया कि घर पर होते तो हर साल की तरह धूमधाम से जन्माष्टमी मनाते, लेकिन बाढ़ ने घर और सामान दोनों डुबो दिए। ऐसे में त्योहार कैसे मनाएं। पीड़िता बोली- अगर घर पर होते तो अच्छे से कृष्ण जन्माष्टमी मनाते बाढ़ पीड़ित ज्योति देवी ने कहा कि घर पर रहते तो अच्छे से जन्माष्टमी मनाते। बाढ़ से हमारा घर डूब गया है। सामान डूब गया है। ऐसे में कैसे कृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे। बच्चे छोटे हैं। उनको भी जन्माष्टमी मनाने का मन है। दूसरे बच्चों को देखकर तैयार होने की जिद कर रहे हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में बस उन्हें सजा-संवारकर तसल्ली दे रहे हैं। व्रत हैं, दवा खा रहे हैं, लेकिन घर की बहुत याद आ रही रंजना कुमारी ने बताया कि घर पर अच्छे से कृष्ण जन्माष्टमी मनाते थे। यहां नहीं मना पा रहे हैं, लेकिन व्रत हैं। दवा खा रहे हैं, पर व्रत है। उन्होंने कहा कि घर पर रहते तो त्योहार की खुशी अलग होती। यहां परेशानी है, कुछ हो नहीं पा रहा है। मेरी बेटी हर साल राधा बनती थी, इस बार नहीं बन पाई बाढ़ पीड़ित शीला ने बताया कि वे लोग इस बार जन्माष्टमी नहीं मना पा रहे हैं। उन्हें इसका बुरा लग रहा है। घर और राहत शिविर के बीच बहुत अंतर है। बाढ़ में उनका पूरा सामान घर में ही रह गया है। यहां से पहनने के लिए कपड़े और खाने के लिए कुछ बर्तन ही लेकर आए हैं। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी हर साल राधा बनती थी, लेकिन इस बार वह भी नहीं बन पाई। बच्चे जिद कर रहे हैं, लेकिन मजबूरी है। पानी नीचे जाने तक उन्हें यहीं रहना पड़ेगा। राहत शिविर में दिखी हिंदू-मुस्लिम एकता राहत शिविर में बाढ़ की परेशानी के बीच हिंदू-मुस्लिम एकता की तस्वीर भी देखने को मिली। शिविर में रह रही एक मुस्लिम महिला ने बताया कि आज त्योहार है और वह भी हिंदू महिलाओं के साथ मिलकर जन्माष्टमी मनाएगी। उन्होंने कहा कि यहां सभी लोग साथ रह रहे हैं। ऐसे में त्योहार भी मिल-जुलकर मनाएंगे। बाढ़ ने भले ही घरों से दूर कर दिया है, लेकिन राहत शिविर में रहने वाले लोगों के बीच आपसी भाईचारा बना हुआ है।

