गोपालगंज में गंडक नदी में नेपाल से मानव शव बहकर आने की सूचना मिली। इसके बाद जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। सदर प्रखंड के खाप मकसूदपुर के एक स्थानीय जनप्रतिनिधि ने यह जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि नेपाल की तरफ से नदी के तेज बहाव में मानव शव बहकर आ रहे हैं। मामला गंभीर होने के कारण प्रशासन ने तुरंत एक जांच टीम बनाई और उसे मौके पर भेजा। इस टीम में सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी शहनवाज यूसुफजई, अंचलाधिकारी रजत वर्णवाल, जादोपुर थाना प्रभारी, आपदा मित्र सुधीर कुमार, एसडीआरएफ के तीन सदस्य और एक मेडिकल टीम शामिल थी। मरी हुई मछलियां बहकर आई प्रशासनिक टीम ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर नाव से गंडक नदी के मुश्किल दियारा इलाकों में तलाशी ली। टीम ने पूरे इलाके में नाव से गश्त करते हुए गहन जांच की। घंटों चले इस अभियान के दौरान मौके पर कोई भी मानव शव नहीं मिला। हालांकि, जांच टीम को पानी में बहती हुई कुछ मरी हुई मछलियां और पशुओं के शव जरूर मिले। आसपास के नदी किनारे वाले इलाकों में भी तलाशी ली गई, लेकिन मानव शव होने की बात सिर्फ अफवाह निकली। दरअसल, नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ के कारण गंडक नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। इस वजह से बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां बहकर आ रही हैं। लगातार 24 घंटे नजर रखी जा रही स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्थानीय ग्रामीणों और नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए एक खास एडवाइजरी जारी की है। गंडक नदी क्षेत्र में किसी भी तरह की निजी या व्यावसायिक नाव चलाने पर सख्त रोक लगा दी गई है। आम जनता से अपील की गई है कि वे अपनी जान जोखिम में डालकर नदी में न उतरें। नदी में बहकर आ रही या मरी हुई मछलियों का सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। प्रशासन ने लोगों को इन्हें न पकड़ने और न खाने की हिदायत दी है। जिला प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार 24 घंटे नजर रखी जा रही है। सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। गोपालगंज में गंडक नदी में नेपाल से मानव शव बहकर आने की सूचना मिली। इसके बाद जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। सदर प्रखंड के खाप मकसूदपुर के एक स्थानीय जनप्रतिनिधि ने यह जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि नेपाल की तरफ से नदी के तेज बहाव में मानव शव बहकर आ रहे हैं। मामला गंभीर होने के कारण प्रशासन ने तुरंत एक जांच टीम बनाई और उसे मौके पर भेजा। इस टीम में सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी शहनवाज यूसुफजई, अंचलाधिकारी रजत वर्णवाल, जादोपुर थाना प्रभारी, आपदा मित्र सुधीर कुमार, एसडीआरएफ के तीन सदस्य और एक मेडिकल टीम शामिल थी। मरी हुई मछलियां बहकर आई प्रशासनिक टीम ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर नाव से गंडक नदी के मुश्किल दियारा इलाकों में तलाशी ली। टीम ने पूरे इलाके में नाव से गश्त करते हुए गहन जांच की। घंटों चले इस अभियान के दौरान मौके पर कोई भी मानव शव नहीं मिला। हालांकि, जांच टीम को पानी में बहती हुई कुछ मरी हुई मछलियां और पशुओं के शव जरूर मिले। आसपास के नदी किनारे वाले इलाकों में भी तलाशी ली गई, लेकिन मानव शव होने की बात सिर्फ अफवाह निकली। दरअसल, नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ के कारण गंडक नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। इस वजह से बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां बहकर आ रही हैं। लगातार 24 घंटे नजर रखी जा रही स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्थानीय ग्रामीणों और नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए एक खास एडवाइजरी जारी की है। गंडक नदी क्षेत्र में किसी भी तरह की निजी या व्यावसायिक नाव चलाने पर सख्त रोक लगा दी गई है। आम जनता से अपील की गई है कि वे अपनी जान जोखिम में डालकर नदी में न उतरें। नदी में बहकर आ रही या मरी हुई मछलियों का सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। प्रशासन ने लोगों को इन्हें न पकड़ने और न खाने की हिदायत दी है। जिला प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार 24 घंटे नजर रखी जा रही है। सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

