जयपुर: भाभी को टिकट दिलाने के लिए भागदौड़ करता रहा देवर, ऐनवक्त पर कांग्रेस ने पत्नी को बना दिया प्रत्याशी; जेठ-जेठानी नाराज

जयपुर: भाभी को टिकट दिलाने के लिए भागदौड़ करता रहा देवर, ऐनवक्त पर कांग्रेस ने पत्नी को बना दिया प्रत्याशी; जेठ-जेठानी नाराज

Jaipur Civic Polls 2026: जमवारामगढ़ (जयपुर): नगर पालिका मंडल जमवारामगढ़ के वार्ड संख्या-7 (ओबीसी महिला आरक्षित सीट) पर कांग्रेस के अधिकृत टिकट वितरण को लेकर एक दिलचस्प और सियासी उलटफेर का मामला सामने आया है। चुनाव में अपनी भाभी को टिकट दिलाने की दिन-रात पैरवी करने वाले चचेरे देवर के साथ अंतिम समय में एक ऐसा ट्विस्ट हुआ कि पार्टी का अधिकृत सिंबल भाभी के बजाय खुद उसकी अपनी पत्नी यानी देवरानी की झोली में आ गिरा।

मालावाला गांव से शुरू हुई चुनावी बिसात

सीट ओबीसी महिला के लिए आरक्षित होने के बाद मालावाला गांव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों ने जिताऊ प्रत्याशी की तलाश शुरू कर दी थी। भाजपा ने गांव की ही एक स्थानीय महिला पर भरोसा जताते हुए उसे अपनी प्रत्याशी बनाने की तैयारी की। दूसरी ओर, कांग्रेस खेमे में हलचल तब तेज हुई जब एक चचेरे देवर ने स्थानीय कार्यकर्ताओं से संपर्क साधकर अपनी भाभी को मजबूत दावेदार के रूप में पेश किया।

नामांकन के दिन हुआ बड़ा उलटफेर

परिवार और स्थानीय कार्यकर्ताओं को पूरा भरोसा था कि पार्टी का टिकट भाभी को ही मिलेगा। यहां तक कि नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन चचेरा देवर अपनी भाभी के नामांकन पत्र में प्रस्तावक भी बना। लेकिन जैसे ही कांग्रेस का अंतिम और अधिकृत सिंबल सामने आया, पूरी बाजी ही पलट गई। पार्टी ने भाभी की जगह चचेरे देवर की पत्नी को अपना अधिकृत उम्मीदवार घोषित कर दिया।

परिजनों में नाराजगी और कार्यकर्ताओं में असमंजस

सिंबल बदलते ही घर के भीतर राजनीतिक घमासान मच गया। जेठ और जेठानी इस फैसले से काफी नाराज हो गए, वहीं स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच भी असमंजस की स्थिति बन गई। जो देवर कुछ घंटों पहले तक भाभी के लिए वोट और समर्थन मांग रहा था, अब उसकी अपनी पत्नी मैदान में कांग्रेस की अधिकृत चेहरा बन चुकी थी।

चुनावी मुकाबले में देवरानी की दोहरी चुनौती

इस पारिवारिक सियासी ड्रामे ने वार्ड-7 के चुनावी समीकरणों को बेहद रोचक बना दिया है। अब कांग्रेस प्रत्याशी (देवरानी) के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ उन्हें अपने ही नाराज परिजनों (जेठ-जेठानी) और भ्रमित कार्यकर्ताओं को मनाकर साथ लाना है, तो दूसरी तरफ भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ मतदाताओं का भरोसा जीतना है। मालावाला गांव और पूरे जमवारामगढ़ में यह पारिवारिक सियासी घटनाक्रम चर्चा का विषय बना हुआ है।

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