नेपाल में बाढ़-भूस्खलन, गयाजी में घट सकते नेपाली श्रद्धालु:20 से ज्यादा बसों की बुकिंग कैंसिल, पितृपक्ष मेले में 50% कम श्रद्धालुओं के आने की आशंका

नेपाल में बाढ़-भूस्खलन, गयाजी में घट सकते नेपाली श्रद्धालु:20 से ज्यादा बसों की बुकिंग कैंसिल, पितृपक्ष मेले में 50% कम श्रद्धालुओं के आने की आशंका

नेपाल में बाढ़-भूस्खलन का असर बिहार में गयाजी में पड़ने वाला है। हर साल बड़ी संख्या में नेपाली श्रद्धालु पिंडदान के लिए गयाजी पहुंचते हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार हर साल करीब 1 लाख नेपालियों के आने का अनुमान रहता है। पर तीर्थपुरोहित कहते हैं कि इसबार ये संख्या घट सकती है। 50 हजार तक नेपालियों के आने की आशंका है। नेपाली तीर्थपुरोहित गयापाल पंडा के अनुसार ‘अब तक 20 से अधिक बसों की बुकिंग रद्द हो चुकी है। काठमांडू, पोखरा और नारायणघाट से आने वाले कई श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा टाल दी है। हम अपने यजमानों से लगातार संपर्क कर रहे हैं। आशंका है कि आने वाले दिनों में और बसें रद्द हो सकती हैं।’ इस कारण पंडा-पुजारी और कारोबारियों की चिंता बढ़ी हुई है। वे सोच रहे हैं कि कारोबार में नुकसान न हो जाए।
नेपाली श्रद्धालुओं ने क्या कहा, पितृपक्ष मेले में कौन-कौन से कारोबार प्रभावित हो सकते हैं, तीर्थपुरोहितों ने क्या कहा, पढ़ें रिपोर्ट…. पहले कुछ तस्वीरें… 26 से 10 अक्टूबर तक पितृपक्ष मेला विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला इस बार 26 सितंबर से शुरू होगा। 10 अक्टूबर को अमावस्या के साथ इसका समापन होगा। नेपाल में आपदा का असर न केवल पितृपक्ष बल्कि बोधगया के पर्यटन सीजन पर भी इसका असर पड़ सकता है। कई परिवार पीढ़ियों से यहां पिंडदान करते आ रहे हैं, लेकिन इस बार नेपाली यात्रा कैंसिल कर रहे हैं। नेपाली श्रद्धालुओं के अनुसार नेपाल के कुछ पहाड़ी इलाके में त्रासदी है, जबकि मैदानी इलाका फिलहाल ठीक है। मैदानी इलाके से श्रद्धालुओं के आने की संभावना बनी हुई है। हमारे इलाके में कई घर बह गए हैं- नेपाली श्रद्धालु नेपाल से आई श्रद्धालु तुलसी उपाध्याय बताती हैं कि हमारे इलाके के नुआकोट, त्रिशूली बाजार और रसुवागढ़ जैसे इलाकों में काफी नुकसान हुआ है। नदी किनारे बने कई घरों के बहने की भी जानकारी मिली है। बताया कि नेपाल की स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है। नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ है। रसुवा जिला सबसे ज्यादा प्रभावित बताया जा रहा है। सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। कई मार्गों पर आवागमन प्रभावित है। कुछ रास्तों को सुरक्षा के लिहाज से बंद भी किया गया है। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए गयाजी तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
नेपाल से कितने परिवार आएंगे, अभी नहीं कहा जा सकता नेपाली श्रद्धालु बताते हैं कि गयाजी में पिंडदान करने का विशेष महत्व दिया जाता है। यही वजह है कि नेपाल की मौजूदा त्रासदी के बावजूद कई परिवार गयाजी आने की तैयारी में हैं, लेकिन इस बार कितने परिवार यहां पहुंच पाएंगे, यह नेपाल में हालात सामान्य होने पर ही साफ होगा। धर्मशाला में रहते ज्यादातर नेपाली श्रद्धालु तीर्थपुरोहित राम कुमार ओझा के अनुसार नेपाली श्रद्धालुओं के लिए गयाजी में तैयारियां की जाती है। गयाजी में ज्यादातर नेपाली श्रद्धालु धर्मशाला में ही रहते हैं। आसपास की दुकानों से वे जरूरत के सामान खरीदा करते हैं। इस बार हालात सामान्य नहीं हैं। अनुमान है कि करीब 50 प्रतिशत परिवार अपनी यात्रा टाल सकते हैं। धर्मशालाओं के आसपास की दुकानदारी होगी प्रभावित नेपाली श्रद्धालुओं की संख्या कम हुई तो इसका असर सिर्फ पिंडदान पर नहीं पड़ेगा। गयाजी के स्थानीय कारोबार पर भी इसका सीधा असर होगा। नेपाली धर्मशाला के आसपास फूल-माला, पूजा सामग्री, कपड़े, मिठाई और अन्य सामान की दुकानें पितृपक्ष के दौरान गुलजार रहती हैं। तीर्थपुरोहित, पंडा भी कमाई करते हैं। श्रद्धालु कर्मकांड से जुड़ी ज्यादातर सामग्री गयाजी से ही खरीदते हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं की संख्या घटने पर कारोबार में गिरावट आ सकती है।
पिछले साल 1 लाख से ज्यादा नेपाली श्रद्धालु आए थे जिला प्रशासन के अनुसार पिछले साल करीब 1 लाख से अधिक नेपाली तीर्थयात्री पहुंचे थे। हालांकि तीर्थपुरोहितों के मौजूदा अनुमान के अनुसार इस बार 40 से 50 हजार श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। नेपाल की स्थिति बिगड़ी तो यह संख्या और कम हो सकती है। श्रद्धालुओं का पहुंचना मुश्किल है ऑल इंडिया भिक्षु संघ के महामंत्री प्रज्ञादीप ने कहा कि नेपाल में त्रासदी आई है और इसका असर आम जनजीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। कठिन समय में भारत सरकार ने नेपाल की हर संभव मदद की है, जिससे राहत और बचाव कार्य को गति मिली है। ऐसे समय में सहयोग ही सबसे बड़ा सहारा है। सितंबर में पिंडदान के लिए बड़ी संख्या में नेपाली श्रद्धालु बोधगया आते हैं, लेकिन इस बार उनकी संख्या कम रहने की पूरी संभावना है। सूचना मिली है कि बोधगया के ईशा फाउंडेशन से जुड़े कुछ लोग भी नेपाल में फंसे थे, जिन्हें सुरक्षित वापस लाने का प्रयास किया जा रहा है।
पिछले साल नेपाल में हुआ था आंदोलन पिछले साल 8 सितंबर को नेपाल में जेन-जी आंदोलन शुरू हुआ। पुलिस फायरिंग में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। सितंबर में पितृपक्ष मेले की शुरुआत होने वाली थी, जिसका असर मेले पर पड़ा था। नेपाल में बाढ़-भूस्खलन का असर बिहार में गयाजी में पड़ने वाला है। हर साल बड़ी संख्या में नेपाली श्रद्धालु पिंडदान के लिए गयाजी पहुंचते हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार हर साल करीब 1 लाख नेपालियों के आने का अनुमान रहता है। पर तीर्थपुरोहित कहते हैं कि इसबार ये संख्या घट सकती है। 50 हजार तक नेपालियों के आने की आशंका है। नेपाली तीर्थपुरोहित गयापाल पंडा के अनुसार ‘अब तक 20 से अधिक बसों की बुकिंग रद्द हो चुकी है। काठमांडू, पोखरा और नारायणघाट से आने वाले कई श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा टाल दी है। हम अपने यजमानों से लगातार संपर्क कर रहे हैं। आशंका है कि आने वाले दिनों में और बसें रद्द हो सकती हैं।’ इस कारण पंडा-पुजारी और कारोबारियों की चिंता बढ़ी हुई है। वे सोच रहे हैं कि कारोबार में नुकसान न हो जाए।
नेपाली श्रद्धालुओं ने क्या कहा, पितृपक्ष मेले में कौन-कौन से कारोबार प्रभावित हो सकते हैं, तीर्थपुरोहितों ने क्या कहा, पढ़ें रिपोर्ट…. पहले कुछ तस्वीरें… 26 से 10 अक्टूबर तक पितृपक्ष मेला विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला इस बार 26 सितंबर से शुरू होगा। 10 अक्टूबर को अमावस्या के साथ इसका समापन होगा। नेपाल में आपदा का असर न केवल पितृपक्ष बल्कि बोधगया के पर्यटन सीजन पर भी इसका असर पड़ सकता है। कई परिवार पीढ़ियों से यहां पिंडदान करते आ रहे हैं, लेकिन इस बार नेपाली यात्रा कैंसिल कर रहे हैं। नेपाली श्रद्धालुओं के अनुसार नेपाल के कुछ पहाड़ी इलाके में त्रासदी है, जबकि मैदानी इलाका फिलहाल ठीक है। मैदानी इलाके से श्रद्धालुओं के आने की संभावना बनी हुई है। हमारे इलाके में कई घर बह गए हैं- नेपाली श्रद्धालु नेपाल से आई श्रद्धालु तुलसी उपाध्याय बताती हैं कि हमारे इलाके के नुआकोट, त्रिशूली बाजार और रसुवागढ़ जैसे इलाकों में काफी नुकसान हुआ है। नदी किनारे बने कई घरों के बहने की भी जानकारी मिली है। बताया कि नेपाल की स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है। नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ है। रसुवा जिला सबसे ज्यादा प्रभावित बताया जा रहा है। सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। कई मार्गों पर आवागमन प्रभावित है। कुछ रास्तों को सुरक्षा के लिहाज से बंद भी किया गया है। ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए गयाजी तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
नेपाल से कितने परिवार आएंगे, अभी नहीं कहा जा सकता नेपाली श्रद्धालु बताते हैं कि गयाजी में पिंडदान करने का विशेष महत्व दिया जाता है। यही वजह है कि नेपाल की मौजूदा त्रासदी के बावजूद कई परिवार गयाजी आने की तैयारी में हैं, लेकिन इस बार कितने परिवार यहां पहुंच पाएंगे, यह नेपाल में हालात सामान्य होने पर ही साफ होगा। धर्मशाला में रहते ज्यादातर नेपाली श्रद्धालु तीर्थपुरोहित राम कुमार ओझा के अनुसार नेपाली श्रद्धालुओं के लिए गयाजी में तैयारियां की जाती है। गयाजी में ज्यादातर नेपाली श्रद्धालु धर्मशाला में ही रहते हैं। आसपास की दुकानों से वे जरूरत के सामान खरीदा करते हैं। इस बार हालात सामान्य नहीं हैं। अनुमान है कि करीब 50 प्रतिशत परिवार अपनी यात्रा टाल सकते हैं। धर्मशालाओं के आसपास की दुकानदारी होगी प्रभावित नेपाली श्रद्धालुओं की संख्या कम हुई तो इसका असर सिर्फ पिंडदान पर नहीं पड़ेगा। गयाजी के स्थानीय कारोबार पर भी इसका सीधा असर होगा। नेपाली धर्मशाला के आसपास फूल-माला, पूजा सामग्री, कपड़े, मिठाई और अन्य सामान की दुकानें पितृपक्ष के दौरान गुलजार रहती हैं। तीर्थपुरोहित, पंडा भी कमाई करते हैं। श्रद्धालु कर्मकांड से जुड़ी ज्यादातर सामग्री गयाजी से ही खरीदते हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं की संख्या घटने पर कारोबार में गिरावट आ सकती है।
पिछले साल 1 लाख से ज्यादा नेपाली श्रद्धालु आए थे जिला प्रशासन के अनुसार पिछले साल करीब 1 लाख से अधिक नेपाली तीर्थयात्री पहुंचे थे। हालांकि तीर्थपुरोहितों के मौजूदा अनुमान के अनुसार इस बार 40 से 50 हजार श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। नेपाल की स्थिति बिगड़ी तो यह संख्या और कम हो सकती है। श्रद्धालुओं का पहुंचना मुश्किल है ऑल इंडिया भिक्षु संघ के महामंत्री प्रज्ञादीप ने कहा कि नेपाल में त्रासदी आई है और इसका असर आम जनजीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। कठिन समय में भारत सरकार ने नेपाल की हर संभव मदद की है, जिससे राहत और बचाव कार्य को गति मिली है। ऐसे समय में सहयोग ही सबसे बड़ा सहारा है। सितंबर में पिंडदान के लिए बड़ी संख्या में नेपाली श्रद्धालु बोधगया आते हैं, लेकिन इस बार उनकी संख्या कम रहने की पूरी संभावना है। सूचना मिली है कि बोधगया के ईशा फाउंडेशन से जुड़े कुछ लोग भी नेपाल में फंसे थे, जिन्हें सुरक्षित वापस लाने का प्रयास किया जा रहा है।
पिछले साल नेपाल में हुआ था आंदोलन पिछले साल 8 सितंबर को नेपाल में जेन-जी आंदोलन शुरू हुआ। पुलिस फायरिंग में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। सितंबर में पितृपक्ष मेले की शुरुआत होने वाली थी, जिसका असर मेले पर पड़ा था।  

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