बिहार में अब स्वास्थ्य जांच के लिए लोगों को अस्पताल तक पहुंचने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर लोगों की जांच करेगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में ‘जांच एवं उपचार-चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान की शुरुआत की। उन्होंने राज्य के सभी 38 जिलों के लिए जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। अगले तीन महीने तक चलने वाले इस अभियान में खास तौर पर कैंसर, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे गैर-संचारी रोगों की शुरुआती पहचान पर जोर रहेगा। एएनएम और आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर स्वास्थ्य सर्वे, स्क्रीनिंग करेंगी। बीमारी के लक्षण या जोखिम मिलने पर मरीज को आगे की जांच और इलाज के लिए संबंधित स्वास्थ्य केंद्र या बड़े अस्पताल में रेफर करेंगे। सरकार का यह अभियान स्वास्थ्य सुविधाओं को अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों तक सीमित रखने के बजाय सीधे लोगों के घरों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
घर-घर जाकर लोगों को किया जाएगा जागरूक – निशांत कुमार बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा, ‘जब से हमने स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी संभाली है, तब से लगातार इस बात का प्रयास किया जा रहा है कि बिहार के लोगों की सेहत को बेहतर बनाया जा सके।’ लोगों के लिए यह अभियान मील का पत्थर साबित होगा- विजय चौधरी उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने कहा, ‘यह अभियान गरीब और आम लोगों के जीवन को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाला है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने की दिशा में इसकी शुरुआत के दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे। लोगों की सेहत में सुधार लाने के लिए यह अभियान मील का पत्थर साबित होगा।’ 2 सितंबर से 30 नवंबर तक चलेगा विशेष अभियान स्वास्थ्य विभाग और राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के संयुक्त तत्वावधान में शुरू किया गया ‘जांच एवं उपचार-चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान 2 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक संचालित किया जाएगा। तीन महीने तक चलने वाले इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य गैर-संचारी रोगों की समय रहते पहचान करना और गंभीर बीमारियों के कारण होने वाली असामयिक मौतों को कम करना है। सरकार का मानना है कि कैंसर, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी कई गंभीर बीमारियों की शुरुआती चरण में पहचान होने पर उनका बेहतर इलाज संभव है। अभियान के दौरान ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर स्वास्थ्य जांच और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। घर-घर पहुंचेंगे एएनएम और आशा कार्यकर्ता इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि स्वास्थ्यकर्मी सीधे लोगों के घरों तक पहुंचेंगे। एएनएम और आशा कार्यकर्ता डोर-टू-डोर मेडिकल सर्वे और स्वास्थ्य स्क्रीनिंग करेंगे। सरकार का उद्देश्य उन लोगों तक भी स्वास्थ्य जांच की सुविधा पहुंचाना है, जो जागरूकता, आर्थिक स्थिति, दूरी या अन्य कारणों से नियमित रूप से अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों तक नहीं पहुंच पाते हैं। घर-घर सर्वेक्षण के दौरान लोगों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जुटाई जाएगी और जरूरत के अनुसार उनकी प्राथमिक जांच की जाएगी। संदिग्ध मरीजों की पहचान होने पर उन्हें आगे की जांच और इलाज के लिए संबंधित उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में भेजा जाएगा।
कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों की मुफ्त जांच विशेष अभियान के तहत मुख्य रूप से गैर-संचारी रोगों की पहचान पर जोर दिया जाएगा। इसमें कैंसर के तीन प्रमुख प्रकार- ओरल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर, की स्क्रीनिंग को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा लोगों की जांच कर उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों की भी पहचान की जाएगी। जांच के दौरान अगर किसी व्यक्ति में बीमारी के लक्षण या जोखिम पाए जाते हैं तो उसे आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर मरीज को उच्च स्वास्थ्य केंद्र के लिए रेफर किया जाएगा, ताकि समय पर विस्तृत जांच और उपचार शुरू किया जा सके। अभियान के दौरान प्रमुख रूप से इन बीमारियों की जांच की जाएगी— 38 जिलों में घूमेंगे जागरूकता रथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने समारोह के दौरान बिहार के सभी 38 जिलों के लिए विशेष रूप से तैयार जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में घूमकर लोगों को अभियान के प्रति जागरूक करेंगे। लोगों को स्वास्थ्य जांच, कैंसर और अन्य गैर-संचारी रोगों के शुरुआती लक्षण की जानकारी दी जाएगी। यह भी बताया जाएगा कि समय पर जांच कराने से किस प्रकार गंभीर बीमारियों से बचाव और बेहतर इलाज संभव है। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और राज्य स्वास्थ्य समिति के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बिहार में अब स्वास्थ्य जांच के लिए लोगों को अस्पताल तक पहुंचने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर लोगों की जांच करेगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में ‘जांच एवं उपचार-चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान की शुरुआत की। उन्होंने राज्य के सभी 38 जिलों के लिए जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। अगले तीन महीने तक चलने वाले इस अभियान में खास तौर पर कैंसर, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे गैर-संचारी रोगों की शुरुआती पहचान पर जोर रहेगा। एएनएम और आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर स्वास्थ्य सर्वे, स्क्रीनिंग करेंगी। बीमारी के लक्षण या जोखिम मिलने पर मरीज को आगे की जांच और इलाज के लिए संबंधित स्वास्थ्य केंद्र या बड़े अस्पताल में रेफर करेंगे। सरकार का यह अभियान स्वास्थ्य सुविधाओं को अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों तक सीमित रखने के बजाय सीधे लोगों के घरों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
घर-घर जाकर लोगों को किया जाएगा जागरूक – निशांत कुमार बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा, ‘जब से हमने स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी संभाली है, तब से लगातार इस बात का प्रयास किया जा रहा है कि बिहार के लोगों की सेहत को बेहतर बनाया जा सके।’ लोगों के लिए यह अभियान मील का पत्थर साबित होगा- विजय चौधरी उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने कहा, ‘यह अभियान गरीब और आम लोगों के जीवन को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाला है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने की दिशा में इसकी शुरुआत के दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे। लोगों की सेहत में सुधार लाने के लिए यह अभियान मील का पत्थर साबित होगा।’ 2 सितंबर से 30 नवंबर तक चलेगा विशेष अभियान स्वास्थ्य विभाग और राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के संयुक्त तत्वावधान में शुरू किया गया ‘जांच एवं उपचार-चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान 2 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक संचालित किया जाएगा। तीन महीने तक चलने वाले इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य गैर-संचारी रोगों की समय रहते पहचान करना और गंभीर बीमारियों के कारण होने वाली असामयिक मौतों को कम करना है। सरकार का मानना है कि कैंसर, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी कई गंभीर बीमारियों की शुरुआती चरण में पहचान होने पर उनका बेहतर इलाज संभव है। अभियान के दौरान ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर स्वास्थ्य जांच और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। घर-घर पहुंचेंगे एएनएम और आशा कार्यकर्ता इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि स्वास्थ्यकर्मी सीधे लोगों के घरों तक पहुंचेंगे। एएनएम और आशा कार्यकर्ता डोर-टू-डोर मेडिकल सर्वे और स्वास्थ्य स्क्रीनिंग करेंगे। सरकार का उद्देश्य उन लोगों तक भी स्वास्थ्य जांच की सुविधा पहुंचाना है, जो जागरूकता, आर्थिक स्थिति, दूरी या अन्य कारणों से नियमित रूप से अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों तक नहीं पहुंच पाते हैं। घर-घर सर्वेक्षण के दौरान लोगों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जुटाई जाएगी और जरूरत के अनुसार उनकी प्राथमिक जांच की जाएगी। संदिग्ध मरीजों की पहचान होने पर उन्हें आगे की जांच और इलाज के लिए संबंधित उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में भेजा जाएगा।
कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों की मुफ्त जांच विशेष अभियान के तहत मुख्य रूप से गैर-संचारी रोगों की पहचान पर जोर दिया जाएगा। इसमें कैंसर के तीन प्रमुख प्रकार- ओरल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर, की स्क्रीनिंग को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा लोगों की जांच कर उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों की भी पहचान की जाएगी। जांच के दौरान अगर किसी व्यक्ति में बीमारी के लक्षण या जोखिम पाए जाते हैं तो उसे आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर मरीज को उच्च स्वास्थ्य केंद्र के लिए रेफर किया जाएगा, ताकि समय पर विस्तृत जांच और उपचार शुरू किया जा सके। अभियान के दौरान प्रमुख रूप से इन बीमारियों की जांच की जाएगी— 38 जिलों में घूमेंगे जागरूकता रथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने समारोह के दौरान बिहार के सभी 38 जिलों के लिए विशेष रूप से तैयार जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में घूमकर लोगों को अभियान के प्रति जागरूक करेंगे। लोगों को स्वास्थ्य जांच, कैंसर और अन्य गैर-संचारी रोगों के शुरुआती लक्षण की जानकारी दी जाएगी। यह भी बताया जाएगा कि समय पर जांच कराने से किस प्रकार गंभीर बीमारियों से बचाव और बेहतर इलाज संभव है। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और राज्य स्वास्थ्य समिति के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

