कर्नल सोफिया कुरैशी टिप्पणी विवाद: कांग्रेस ने मंत्री विजय शाह पर कार्रवाई के लिए राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

कर्नल सोफिया कुरैशी टिप्पणी विवाद: कांग्रेस ने मंत्री विजय शाह पर कार्रवाई के लिए राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

भोपाल, एक सितंबर मध्यप्रदेश में विपक्षी कांग्रेस ने मंगलवार को राज्यपाल मंगुभाई पटेल से मंत्री विजय शाह के खिलाफ सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में अभियोजन की मंजूरी संबंधी प्रस्ताव पर पुनर्विचार कर कार्रवाई करने का आग्रह किया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा और विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सिंघार ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि कर्नल कुरैशी का अपमान केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि सेना, महिलाओं और देश का अपमान है।

उन्होंने कहा कि अगर सरकार के पास शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने और उन्हें पद से हटाने का अधिकार है तो मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा सरकार अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी किरकिरी से बचने के लिए राज्यपाल को इस मामले में ला रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में अंतर है तथा राज्यपाल से प्रस्ताव पर पुनर्विचार कर सरकार को मंत्री के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है।

कांग्रेस नेता ने बताया कि राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि वह इस मामले पर सरकार से चर्चा करेंगे। सोमवार को उच्चतम न्यायालय को बताया गया था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद कर्नल कुरैशी को लेकर शाह की टिप्पणी के मामले में उनके खिलाफ अभियोजन की मंजूरी अभी लंबित है। कर्नल सोफिया कुरैशी उन सैन्य अधिकारियों की टीम का हिस्सा थीं, जिन्होंने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान मीडिया को अभियान की जानकारी दी थी।

एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शाह की कर्नल कुरैशी को लेकर की गई टिप्पणी को उनकी धार्मिक पहचान को पहलगाम हमले में शामिल आतंकवादियों के समुदाय से जोड़ने के तौर पर देखा गया था। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए शाह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। शाह ने बाद में उच्चतम न्यायालय का रुख किया।

शीर्ष अदालत ने उनकी टिप्पणियों की निंदा करते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया था। एसआईटी की रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश सरकार को मंत्री के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी पर दो सप्ताह के भीतर फैसला करने का निर्देश दिया था।

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