सिद्धांता सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का पंजीयन-लाइसेंस निरस्त:निरीक्षण में मिलीं 19 गंभीर खामियां, सीएमएचओ की जांच में इमरजेंसी से लेकर डायलिसिस तक में दिक्कत

सिद्धांता सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का पंजीयन-लाइसेंस निरस्त:निरीक्षण में मिलीं 19 गंभीर खामियां, सीएमएचओ की जांच में इमरजेंसी से लेकर डायलिसिस तक में दिक्कत

भोपाल के शिवाजी नगर स्थित सिद्धांता सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का पंजीयन एवं अनुज्ञप्ति निरस्त कर दी गई है। जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) भोपाल की ओर से 31 अगस्त 2026 को जारी आदेश में अस्पताल के निरीक्षण के दौरान सामने आई गंभीर कमियों और नियमों के पालन में लापरवाही को आधार बनाया गया है। सीएमएचओ कार्यालय के अनुसार, अस्पताल के संबंध में पहले 18 जून 2026 को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। अस्पताल की ओर से दिए गए जवाब के परीक्षण के बाद 7 जुलाई को संशोधित आदेश जारी कर निरीक्षण दल का गठन किया गया। सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक जय प्रकाश चिकित्सालय भोपाल की अध्यक्षता में गठित टीम ने 31 अगस्त को अस्पताल का भौतिक निरीक्षण किया। बता दें कि वर्तमान में भर्ती मरीजों के हित और उनकी निरंतर चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की रहेगी। अस्पताल में भर्ती मरीजों को ऐसी स्थिति में असुरक्षित रूप से डिस्चार्ज या स्थानांतरित नहीं किया जाएगा, जिससे उनके जीवन अथवा स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े। इमरजेंसी में जरूरी उपकरण और दवाओं की व्यवस्था पर सवाल निरीक्षण में अस्पताल के मुख्य द्वार के अंदर दाहिनी ओर बने इमरजेंसी रूम में मरीजों के ब्लड प्रेशर आदि की जांच के लिए उपलब्ध उपकरण पर्याप्त नहीं मिले। रिपोर्ट के अनुसार, इमरजेंसी में एक ही बीपी उपकरण था और ट्रॉली पर एक ही ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध था। इससे गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार देने में देरी की आशंका जताई गई। निरीक्षण के दौरान इमरजेंसी क्रैश कार्ट लॉक मिली। ट्रॉमा एरिया में इंजेक्शन के लिए बेड लगा था और वहां ड्रेसिंग की जा रही थी। डॉक्टरों की उपलब्धता भी मानकों के अनुरूप नहीं रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पताल में पार्ट टाइम सेवाएं देने वाले चिकित्सकों की सूचना पट्ट के अनुसार प्रत्येक बाह्य रोगी कक्ष में डॉक्टरों की उपलब्धता नहीं थी। ओपीडी कक्ष-1 में डॉ. राहुल पेशवानी उपलब्ध थे, लेकिन सूचना पट्ट में उनके नाम के सामने समय और विशेषज्ञता का उल्लेख नहीं था। अन्य ओपीडी कक्षों में भी सूचना पट्ट में दर्ज समय के अनुसार चिकित्सकों की उपलब्धता नहीं पाई गई। निरीक्षण दल ने इससे मरीजों को उपचार में परेशानी होने की आशंका जताई। डायलिसिस यूनिट में भी कई खामियां अस्पताल के डायलिसिस कक्ष में चार बेड की व्यवस्था थी, लेकिन निरीक्षण के दौरान केवल दो डायलिसिस टेक्नीशियन मिले। किसी भी मरीज के पास सीरोलॉजी रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि डायलिसिस के लिए सीरो पॉजिटिव केस के संबंध में पृथक व्यवस्था नहीं थी। निरीक्षण में डायलिसिस टेक्नीशियन के रूप में कार्यरत एक व्यक्ति के पास आवश्यक अहर्ता का प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं कराया गया। डायलिसिस क्षेत्र में एचबीवी, एचआईवी और एचसीवी संक्रमण से संबंधित मानकों के अनुरूप व्यवस्था नहीं पाए जाने का भी उल्लेख है। डायग्नोस्टिक इमेजिंग में रेडिएशन और सुरक्षा मानकों पर आपत्ति एक्स-रे, सोनोग्राफी और सीटी स्कैन वाले क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान मोबाइल एक्स-रे यूनिट द्वारा अनधिकृत तरीके से मरीजों की जांच किए जाने का उल्लेख रिपोर्ट में है। एक्स-रे करते समय सुरक्षा के लिए लेड एप्रन और थायरॉयड कॉलर का उपयोग नहीं किया जा रहा था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एक्स-रे के समय मरीज को कमरे में ही बैठाया गया था और सुरक्षा मानकों के अनुरूप अलग व्यवस्था नहीं थी। एक्स-रे का रिकॉर्ड भी निरीक्षण के दौरान उपलब्ध नहीं कराया गया। टीएमटी के लिए जरूरी डिफिब्रिलेटर नहीं मिला टीएमटी टेस्ट के लिए आवश्यक डिफिब्रिलेटर उपलब्ध नहीं पाया गया। रिपोर्ट में पुराने टीएमटी मरीजों के अनुमति पत्र में जरूरी चिकित्सकीय मापदंडों का उल्लेख नहीं होने की बात भी कही गई है। PET-CT और आईसीयू से जुड़े मानकों पर भी सवाल निरीक्षण रिपोर्ट में PET-CT स्कैन रूम और कंट्रोल रूम को केवल ग्लास पैनल से विभाजित किए जाने का उल्लेख है। पेट स्कैन रूम को स्टोरेज रूम जैसा इस्तेमाल किए जाने तथा रेडियो हाजार्ड क्षेत्र के अंदर हॉट लैब डिस्पोजिंग रूम में अत्यधिक सीलिंग पाए जाने की बात भी कही गई है। आईसीयू में मरीजों के लिए बने दो केबिन में संक्रमित मरीज भर्ती नहीं थे, बल्कि असंक्रमित मरीज भर्ती पाए गए। रिपोर्ट में संक्रमण नियंत्रण के लिहाज से इसे जोखिमपूर्ण बताया गया है। आईसीयू में ड्यूटी कर रहे एक चिकित्सक की योग्यता और एमओयू से संबंधित दस्तावेज भी निरीक्षण के दौरान उपलब्ध नहीं कराए गए। ऑक्सीजन व्यवस्था में भी मिली कमी आईसीयू में झूला ऑक्सीजन लाइन चल रही थी, लेकिन निरीक्षण में सभी बेड खाली पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, यह व्यवस्था मरीजों की सुरक्षा के निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थी। आईसीयू के मरीजों की केस रिपोर्ट डायटीशियन द्वारा हस्ताक्षरित किए जाने का भी उल्लेख है, जबकि माइक्रोबायोलॉजिस्ट की उपलब्धता अस्पताल की ओर से नहीं दर्शाई गई। पैथोलॉजी में तापमान रिकॉर्ड और चिकित्सक की उपलब्धता पर सवाल पैथोलॉजी में नॉर्मल स्लाइड के डीप फ्रीजर में टेस्ट किए गए रखे पाए गए। फ्रीजर के तापमान रिकॉर्ड में 31 अगस्त को तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस दर्शाया गया, जबकि डीप फ्रीजर का डिजिटल थर्मामीटर 2.3 डिग्री सेल्सियस बता रहा था। निरीक्षण के समय पैथोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं थे। इसके अलावा एंडोस्कोपी रूम में विभिन्न जांचों से संबंधित व्यवस्थाओं में भी नियमों के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में एचआईवी फुल एक्रीडिटेशन के नियमों का पालन नहीं होने की बात कही गई है। आपातकालीन निकासी और फायर सेफ्टी पर गंभीर सवाल अस्पताल में मरीजों और स्टाफ के आने-जाने के लिए केवल एक ही मुख्य द्वार पाया गया। आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए वैकल्पिक सीढ़ियों की व्यवस्था नहीं थी। निरीक्षण दल ने इसे सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर कमी माना। फायर ऑडिट रिपोर्ट में 20 अप्रैल 2026 को दिए गए सुझावों के अनुपालन के दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। रिपोर्ट में कहा गया कि इससे आगजनी जैसी दुर्घटना की स्थिति में मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा होती है। 1973 के नियमों के तहत पंजीयन निरस्त सीएमएचओ की जांच रिपोर्ट में कहा गया कि अस्पताल द्वारा अनुज्ञप्ति की शर्तों और अधिनियम-नियमों के तहत अपेक्षित मानकों का पर्याप्त और सतत पालन नहीं किया जा रहा था। इसके आधार पर मध्यप्रदेश उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रीकरण एवं अनुज्ञापन) नियम 1973 की धारा 5 के तहत पंजीयन एवं अनुज्ञप्ति निरस्त करने का निर्णय लिया गया। आदेश में कहा गया है कि निरस्तीकरण प्रभावी होने की तारीख से अस्पताल इस पंजीयन और अनुज्ञप्ति के आधार पर नर्सिंग होम के रूप में किसी नए मरीज को भर्ती नहीं कर सकेगा और न ही चिकित्सा-नर्सिंग सेवाएं संचालित कर सकेगा। मामला हाई कोर्ट पहुंचा अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि वह 2015 में हुए समझौते के तहत सिद्धांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का संचालन कर रहा है और यह समझौता 4 जुलाई 2029 तक है। प्रबंधन ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि अस्पताल बंद करने या उसका संचालन रोकने की कार्रवाई की जा रही है। हालांकि सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि अस्पताल के खिलाफ अब तक कोई जबरन कार्रवाई नहीं की गई है। राज्य की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि अस्पताल के संचालन को लेकर कुछ शिकायतें मिली हैं, जिनकी जांच चल रही है। अगर जांच के बाद अस्पताल के खिलाफ कोई कार्रवाई जरूरी पाई जाती है तो उसे कानून के मुताबिक और अस्पताल प्रबंधन को सुनवाई का पूरा मौका देने के बाद ही किया जाएगा। अस्पताल प्रबंधन ने कोर्ट में कहा कि वह इस जांच में पूरा सहयोग करेगा। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले का निपटारा कर दिया।

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