इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हरदोई के मसीहुनिस्सा डिग्री कॉलेज से जुड़ी एक याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि याचिका में जरूरी बातें छिपाई गई थीं। इसके साथ ही, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अबधेश कुमार चौधरी की बेंच ने सुनाया। यह याचिका मसीहुनिस्सा डिग्री कॉलेज की प्रबंधक अबिदा बन्नो ने दाखिल की थी। अबिदा बन्नो ने याचिका में साल 2020 से 2023 के बीच सोसाइटी के प्रबंधन को लेकर चल रहे विवाद और पहले हुई कानूनी कार्रवाई की पूरी जानकारी नहीं दी थी। कोर्ट ने बताया कि बैंक खाते साल 2020 से बंद थे, लेकिन याचिका में यह नहीं बताया गया कि खाते किन वजहों से बंद किए गए थे। दरअसल, मसीहुनिस्सा डिग्री कॉलेज को चलाने वाली किशन शिक्षा संस्थान सोसाइटी के प्रबंधन को लेकर विवाद था। यह विवाद अबिदा बन्नो और उनकी बहन उजमा फहीम के गुटों के बीच चल रहा था। कोर्ट को बताया गया कि सोसाइटी के संस्थापक प्रबंधक की जनवरी 2020 में मौत के बाद दोनों पक्षों में कॉलेज के नियंत्रण को लेकर झगड़ा शुरू हो गया था। कोर्ट ने पाया कि इस विवाद से जुड़े कई आदेश और मुकदमे पहले भी हो चुके थे। इसके बावजूद, इस याचिका में जरूरी तथ्यों और पिछली कानूनी कार्रवाई को छिपाया गया। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट में न्याय मांगने वाले पक्ष की जिम्मेदारी है कि वह सभी जरूरी बातों को ईमानदारी से बताए। कोर्ट ने यह भी कहा कि महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाना सिर्फ एक गलती नहीं है, बल्कि यह कोर्ट को गुमराह करने जैसा है। ऐसे मामलों में याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं मिल सकती। इसी आधार पर कोर्ट ने इस याचिका को कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल माना। कोर्ट ने आदेश दिया कि एक लाख रुपये का जुर्माना उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ में एक महीने के अंदर जमा किया जाए।

