Ram Temple: राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर अयोध्या में बढ़ी हलचल, संतों की नाराजगी के बीच विहिप ने संभाला मोर्चा

Ram Temple: राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर अयोध्या में बढ़ी हलचल, संतों की नाराजगी के बीच विहिप ने संभाला मोर्चा

Ram Mandir CEO: राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ की नियुक्ति को लेकर अयोध्या में हलचल तेज हो गई है। बुधवार को ट्रस्ट की अहम बैठक होने जा रही है। बताया जा रहा है कि चयन समिति ने सीईओ पद के लिए तीन नाम तय कर लिए हैं। बैठक में इनमें से किसी एक नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है। सीईओ पद के लिए चयन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही संत समाज में नाराजगी भी सामने आने लगी है।

संतों की नाराजगी

कई संतों का कहना है कि राम मंदिर जैसे पवित्र स्थान के प्रबंधन की जिम्मेदारी किसी योग्य संत को दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि मंदिर का प्रबंधन किसी कॉर्पोरेट व्यवस्था के तहत नहीं होना चाहिए। संतों की नाराजगी को देखते हुए विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय सलाहकार दिनेश जी. अयोध्या पहुंचे और संतों से मुलाकात की। इसे नाराज संतों को मनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। आर्य संत वरुण दास महाराज ने बताया कि मुलाकात में अयोध्या के मठों के विकास और शास्त्रीय परंपरा की पवित्रता व गरिमा बनाए रखने पर चर्चा हुई।

विभिन्न विषयों पर बातचीत

इस दौरान संघ, विश्व हिंदू परिषद और संतों के बीच विभिन्न विषयों पर बातचीत हुई। साकेत भवन के महंत सीताराम दास महाराज ने कहा कि बैठक मुख्य रूप से युवा संतों पर केंद्रित थी, जो देश का भविष्य हैं। उन्होंने कहा कि वेदों, वेदांगों और शास्त्रों की शिक्षा बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से कैसे दी जाए, इस पर भी विचार किया गया। इसके साथ ही वेदों और वेदांगों के अध्ययन व अध्यापन के लिए समर्पित विश्वविद्यालय के माध्यम से इन परंपराओं को संरक्षित और आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

सनातन संस्कृति के प्रचार पर जोर

बैठक में अयोध्या में वेद-वेदांग विश्वविद्यालय के निर्माण और सनातन संस्कृति के प्रचार पर भी जोर दिया गया। वहीं राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से सीईओ पद के लिए योग्यता के नियम तय किए जाने पर आर्य संत वरुण दास महाराज ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सीईओ की व्यवस्था अयोध्या के लिए उचित नहीं है और यह यहां की पारंपरिक व्यवस्था के अनुरूप भी नहीं है। उनके अनुसार, अयोध्या के मंदिरों का प्रबंधन परंपरागत रूप से पांच भूमिकाओं महंत, अधिकारी, पुजारी, कोठारी और भंडारी के माध्यम से होता रहा है।

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