बिजनौर अपर सत्र न्यायालय और फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय के न्यायाधीश डॉ. शहजाद अली ने महिला की हत्या और लूट के मामले में आरोपी राम सिंह को दोषी ठहराया है। कोर्ट ने उसे उम्रकैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, घर में घुसकर लूट का प्रयास करने के मामले में आरोपी खेम सिंह उर्फ खिम्मा और बचराम उर्फ लीची को भी दोषी माना गया है। दोनों को जेल में बिताई गई सात साल की अवधि को ही सजा मानते हुए रिहा करने का आदेश दिया गया है। चारपाई पर मिला था महिला का शव एडीजीसी प्रमोद शर्मा और अजीत पंवार के मुताबिक, हल्दौर थाना क्षेत्र के खासपुर गांव निवासी महेंद्र पुत्र रामपाल सिंह ने चांदपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि 19 मई 2018 की सुबह उन्हें सूचना मिली कि उनकी बहन परविता की हत्या कर दी गई है। सूचना मिलने पर महेंद्र परिवार के साथ बहन के घर केलनपुर गांव पहुंचे। वहां परविता बरामदे में चारपाई पर मृत पड़ी थीं। घर के एक कमरे और अलमारी का सामान भी बिखरा हुआ था। मामले में शुरुआत में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच में तीन आरोपियों के नाम सामने आए पुलिस की जांच के दौरान जिला शाहजहांपुर निवासी राम सिंह पुत्र त्रिलोकी, खेम सिंह उर्फ खिम्मा पुत्र टेकराम और बचराम उर्फ लीची पुत्र लक्ष्मण के नाम सामने आए। तीनों आरोपी उस समय किसी अन्य मामले में जेल में बंद थे। पुलिस ने राम सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ की। उसकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया सब्बल बरामद किया गया। लूट के इरादे से घर में घुसे थे आरोपी पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपियों ने लूट के इरादे से परविता के घर में घुसने की बात स्वीकार की थी। आरोपियों के अनुसार, घर में लूटपाट के दौरान परविता की आंख खुल गई थी। इसके बाद उन्होंने उसकी हत्या कर दी और मौके से फरार हो गए। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने राम सिंह को हत्या और लूट के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई। वहीं, खेम सिंह उर्फ खिम्मा और बचराम उर्फ लीची को घर में घुसकर लूट के प्रयास का दोषी मानते हुए जेल में बिताई गई सात साल की अवधि को उनकी सजा माना।

