सहरसा में 15 लोगों से सवार नाव पलट गई। जिसमें एक महिला की डूबकर मौत हो गई है। जबकि एक किशोरी लापता है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंचकर घटना की जांच शुरू कर दी। मामला सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल क्षेत्र की है। मृतका की पहचान कुंदन यादव की पत्नी रूपम कुमारी (35) के रूप में हुई है। वहीं, लापता किशोरी विष्णु देव यादव की बेटी नेहा कुमारी (12) है। बख्तियारपुर थानाध्यक्ष जयशंकर कुमार ने बताया कि मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। वहीं, लापता किशोरी की तलाश को लेकर भी प्रयास जारी हैं। घटना से जुड़ी तस्वीरें देखें… सिलसिलेवार पढ़िए पूरी घटना नाव पर सवार मिथिलेश यादव ने बताया कि मंगलवार दोपहर तरियामा पंचायत के करीब 15 लोग नाव से तिलावे नदी पार कर तुर्की के नढेया घाट की तरफ गए थे। सभी लोग मवेशियों के लिए चारा काटने के लिए नदी के अंदर की तरफ गए थे। दिनभर घास काटने के बाद शाम करीब 6 बजे सभी लोग उसी नाव से वापस लौट रहे थे। मिथिलेश ने बताया कि सबकुछ ठीक चल रहा था। नाव घाट के पास पहुंच ही रही थी कि अचानक तेज हवा का झोंका आया। हवा इतनी तेज थी कि नाव एक तरफ झुकने लगी। नाव पर बैठे लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही नाव डगमगाने लगी और देखते ही देखते पलट गई। नाव पलटते ही सभी लोग नदी में गिर पड़े। चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। उस वक्त जिसे जो मिला, उसी को पकड़कर लोग बचने की कोशिश करने लगे। मिथिलेश के मुताबिक, कुछ लोगों ने घास के गट्ठरों से बंधी रस्सी पकड़ ली और किसी तरह तैरकर बाहर निकल आए। लेकिन इसी दौरान रूपम कुमारी नदी की तेज धारा में डूब गईं। लोगों ने उन्हें बचाने की काफी कोशिश की। बाद में रूपम का शव नदी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। हादसे के बाद मौके पर कुछ देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। ग्रामीण बोले- रोज नाव के सहारे नदी पार नहीं करनी पड़ती
तुर्की गांव के वार्ड नंबर-3 निवासी बलराम कुमार ने बताया कि गांव के कई परिवारों के खेत तिलावे नदी के उस पार हैं। इसलिए गांव के महिला और पुरुष अक्सर नाव से नदी पार करके खेतों की तरफ जाते हैं। वहां से वे अपने मवेशियों के लिए घास काटकर नाव से ही वापस लौटते हैं। मंगलवार की शाम भी गांव के लोग इसी तरह घास लेकर नाव से वापस आ रहे थे, लेकिन घाट के पास अचानक नाव पलट गई और हादसा हो गया। बलराम ने बताया कि इस जगह पर पुल की काफी जरूरत है। पिछले 5-6 साल से गांव के लोग यहां पुल बनाने की मांग कर रहे हैं। कई बार जनप्रतिनिधियों से इसकी मांग की गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। उनका कहना है कि अगर यहां पुल बन जाता तो गांव के लोगों को रोज नाव के सहारे नदी पार नहीं करनी पड़ती। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसद से लेकर स्थानीय विधायक तक इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। ग्रामीणों को हर बार भरोसा दिलाया जाता है कि पुल बनेगा, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। बेटी बोलीं- आखों के सामने डूब गईं मां
रूपम कुमारी की 7 वर्षीय बेटी सरिता कुमारी ने बताया कि नाव उसकी आंखों के सामने पलट गई। उसने कहा कि यह घटना वह कभी नहीं भूल पाएगी। उसकी मां नदी में डूब गईं। रूपम तीन बच्चों की मां थीं। सहरसा में 15 लोगों से सवार नाव पलट गई। जिसमें एक महिला की डूबकर मौत हो गई है। जबकि एक किशोरी लापता है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंचकर घटना की जांच शुरू कर दी। मामला सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल क्षेत्र की है। मृतका की पहचान कुंदन यादव की पत्नी रूपम कुमारी (35) के रूप में हुई है। वहीं, लापता किशोरी विष्णु देव यादव की बेटी नेहा कुमारी (12) है। बख्तियारपुर थानाध्यक्ष जयशंकर कुमार ने बताया कि मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। वहीं, लापता किशोरी की तलाश को लेकर भी प्रयास जारी हैं। घटना से जुड़ी तस्वीरें देखें… सिलसिलेवार पढ़िए पूरी घटना नाव पर सवार मिथिलेश यादव ने बताया कि मंगलवार दोपहर तरियामा पंचायत के करीब 15 लोग नाव से तिलावे नदी पार कर तुर्की के नढेया घाट की तरफ गए थे। सभी लोग मवेशियों के लिए चारा काटने के लिए नदी के अंदर की तरफ गए थे। दिनभर घास काटने के बाद शाम करीब 6 बजे सभी लोग उसी नाव से वापस लौट रहे थे। मिथिलेश ने बताया कि सबकुछ ठीक चल रहा था। नाव घाट के पास पहुंच ही रही थी कि अचानक तेज हवा का झोंका आया। हवा इतनी तेज थी कि नाव एक तरफ झुकने लगी। नाव पर बैठे लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही नाव डगमगाने लगी और देखते ही देखते पलट गई। नाव पलटते ही सभी लोग नदी में गिर पड़े। चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। उस वक्त जिसे जो मिला, उसी को पकड़कर लोग बचने की कोशिश करने लगे। मिथिलेश के मुताबिक, कुछ लोगों ने घास के गट्ठरों से बंधी रस्सी पकड़ ली और किसी तरह तैरकर बाहर निकल आए। लेकिन इसी दौरान रूपम कुमारी नदी की तेज धारा में डूब गईं। लोगों ने उन्हें बचाने की काफी कोशिश की। बाद में रूपम का शव नदी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। हादसे के बाद मौके पर कुछ देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। ग्रामीण बोले- रोज नाव के सहारे नदी पार नहीं करनी पड़ती
तुर्की गांव के वार्ड नंबर-3 निवासी बलराम कुमार ने बताया कि गांव के कई परिवारों के खेत तिलावे नदी के उस पार हैं। इसलिए गांव के महिला और पुरुष अक्सर नाव से नदी पार करके खेतों की तरफ जाते हैं। वहां से वे अपने मवेशियों के लिए घास काटकर नाव से ही वापस लौटते हैं। मंगलवार की शाम भी गांव के लोग इसी तरह घास लेकर नाव से वापस आ रहे थे, लेकिन घाट के पास अचानक नाव पलट गई और हादसा हो गया। बलराम ने बताया कि इस जगह पर पुल की काफी जरूरत है। पिछले 5-6 साल से गांव के लोग यहां पुल बनाने की मांग कर रहे हैं। कई बार जनप्रतिनिधियों से इसकी मांग की गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। उनका कहना है कि अगर यहां पुल बन जाता तो गांव के लोगों को रोज नाव के सहारे नदी पार नहीं करनी पड़ती। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसद से लेकर स्थानीय विधायक तक इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। ग्रामीणों को हर बार भरोसा दिलाया जाता है कि पुल बनेगा, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। बेटी बोलीं- आखों के सामने डूब गईं मां
रूपम कुमारी की 7 वर्षीय बेटी सरिता कुमारी ने बताया कि नाव उसकी आंखों के सामने पलट गई। उसने कहा कि यह घटना वह कभी नहीं भूल पाएगी। उसकी मां नदी में डूब गईं। रूपम तीन बच्चों की मां थीं।

