समस्तीपुर- नई पेंशन नीति के खिलाफ सरकारी कर्मचारियों का प्रदर्शन:पुरानी पेंशन व्यवस्था को लागू करने की मांग की, करीब 17000 कर्मचारियों को होगा लाभ

समस्तीपुर- नई पेंशन नीति के खिलाफ सरकारी कर्मचारियों का प्रदर्शन:पुरानी पेंशन व्यवस्था को लागू करने की मांग की, करीब 17000 कर्मचारियों को होगा लाभ

नई पेंशन नीति के विरोध में बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के बैनर तले सरकारी कर्मचारियों ने मंगलवार को काला दिन मनाया। इस दौरान कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन करते हुए पुरानी पेंशन व्यवस्था को पुनः लागू करने की मांग की। इससे पूर्व बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के जिला मंत्री राजीव रंजन के नेतृत्व में कर्मचारियों ने जुलूस निकाला। इसके बाद आयोजित सभा में नई पेंशन नीति के विरोध में कर्मचारियों ने अपनी बातें रखीं और पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली की मांग दोहराई। 2004 में पुरानी व्यवस्था समाप्त कर नई पेंशन योजना की गई थी लागू सभा को संबोधित करते हुए जिला मंत्री राजीव रंजन ने कहा कि आज के ही दिन वर्ष 2005 में केंद्र सरकार ने देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त कर नई पेंशन योजना लागू की थी। उन्होंने कहा कि यह दिन कर्मचारियों के लिए काला दिन के रूप में याद किया जाता है। नई पेंशन नीति लागू होने के बाद कर्मचारियों को पुरानी पेंशन व्यवस्था के तहत मिलने वाली कई सुविधाओं से वंचित होना पड़ा। उन्होंने कहा कि बिहार समेत देशभर के कर्मचारी लंबे समय से पुरानी पेंशन व्यवस्था को पुनः लागू करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। केंद्र सरकार के निर्णय का अनुसरण करते हुए बिहार सरकार ने भी 1 सितंबर 2004 को पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त कर नई पेंशन नीति लागू कर दी थी। इसलिए 1 सितंबर संगठन और कर्मचारियों के लिए ऐतिहासिक रूप से काला दिन है। जिला मंत्री बोले- कर्मचारियों को आर्थिक, सामाजिक सुरक्षा के मामले में नुकसान हो रहा जिला मंत्री ने कहा कि पुरानी पेंशन व्यवस्था की पुनर्बहाली की मांग को लेकर बिहार के कर्मचारी लगातार संघर्ष कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त किए जाने से सरकारी कर्मचारियों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के मामले में नुकसान उठाना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने सरकार से जल्द पुरानी पेंशन व्यवस्था को पुनः लागू करने की मांग की। अब समझिए, पुरानी पेंशन व्यवस्था क्या थी, उसके क्या फायदे थे? पुरानी पेंशन व्यवस्था में सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन अपेक्षाकृत निश्चित होती है, जबकि NPS में मिलने वाला अंतिम लाभ जमा अंशदान और निवेश से होने वाले रिटर्न पर निर्भर करता है। नई पेंशन योजना की सबसे बड़ी आलोचना यह है कि इसमें सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली आय निश्चित नहीं होती और वह निवेश के प्रदर्शन तथा लागू नियमों पर निर्भर करती है। 2004 के बाद बहाल समस्तीपुर के लगभग 17000 कर्मचारी इससे लाभान्वित होंगे। नई पेंशन नीति के विरोध में बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के बैनर तले सरकारी कर्मचारियों ने मंगलवार को काला दिन मनाया। इस दौरान कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन करते हुए पुरानी पेंशन व्यवस्था को पुनः लागू करने की मांग की। इससे पूर्व बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के जिला मंत्री राजीव रंजन के नेतृत्व में कर्मचारियों ने जुलूस निकाला। इसके बाद आयोजित सभा में नई पेंशन नीति के विरोध में कर्मचारियों ने अपनी बातें रखीं और पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली की मांग दोहराई। 2004 में पुरानी व्यवस्था समाप्त कर नई पेंशन योजना की गई थी लागू सभा को संबोधित करते हुए जिला मंत्री राजीव रंजन ने कहा कि आज के ही दिन वर्ष 2005 में केंद्र सरकार ने देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त कर नई पेंशन योजना लागू की थी। उन्होंने कहा कि यह दिन कर्मचारियों के लिए काला दिन के रूप में याद किया जाता है। नई पेंशन नीति लागू होने के बाद कर्मचारियों को पुरानी पेंशन व्यवस्था के तहत मिलने वाली कई सुविधाओं से वंचित होना पड़ा। उन्होंने कहा कि बिहार समेत देशभर के कर्मचारी लंबे समय से पुरानी पेंशन व्यवस्था को पुनः लागू करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। केंद्र सरकार के निर्णय का अनुसरण करते हुए बिहार सरकार ने भी 1 सितंबर 2004 को पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त कर नई पेंशन नीति लागू कर दी थी। इसलिए 1 सितंबर संगठन और कर्मचारियों के लिए ऐतिहासिक रूप से काला दिन है। जिला मंत्री बोले- कर्मचारियों को आर्थिक, सामाजिक सुरक्षा के मामले में नुकसान हो रहा जिला मंत्री ने कहा कि पुरानी पेंशन व्यवस्था की पुनर्बहाली की मांग को लेकर बिहार के कर्मचारी लगातार संघर्ष कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त किए जाने से सरकारी कर्मचारियों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के मामले में नुकसान उठाना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने सरकार से जल्द पुरानी पेंशन व्यवस्था को पुनः लागू करने की मांग की। अब समझिए, पुरानी पेंशन व्यवस्था क्या थी, उसके क्या फायदे थे? पुरानी पेंशन व्यवस्था में सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन अपेक्षाकृत निश्चित होती है, जबकि NPS में मिलने वाला अंतिम लाभ जमा अंशदान और निवेश से होने वाले रिटर्न पर निर्भर करता है। नई पेंशन योजना की सबसे बड़ी आलोचना यह है कि इसमें सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली आय निश्चित नहीं होती और वह निवेश के प्रदर्शन तथा लागू नियमों पर निर्भर करती है। 2004 के बाद बहाल समस्तीपुर के लगभग 17000 कर्मचारी इससे लाभान्वित होंगे।  

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