लखनऊ के राजाजीपुरम स्थित पं. दीन दयाल उपाध्याय राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में मंगलवार को नारी की राजनीतिक चुनौतियां एवं नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ विषय पर संगोष्ठी हुई। उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान और महाविद्यालय के सहयोग में आयोजित कार्यक्रम में निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया। द्विदिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन 31 अगस्त को निबंध प्रतियोगिता कराई गई थी। इसमें करीब 75 छात्राओं ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता की शुरुआत प्राचार्य ने छात्राओं को कॉपी और पेन वितरित कर की थी। एमए प्रथम वर्ष की शिवानी रावत ने पहला स्थान हासिल किया। बीए तृतीय वर्ष की वसुधा यादव दूसरे और संजू तीसरे स्थान पर रहीं। विजेताओं को उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के निदेशक सर्वेश कुमार सिंह ने प्रमाण-पत्र, स्मृति-चिह्न और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। महिलाओं को निर्णय लेने का अवसर मिले सर्वेश कुमार सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति, सृजन और संवेदना की प्रतीक रही है। महिलाओं को केवल सम्मान देने या देवी मानने के बजाय निर्णय लेने, नेतृत्व करने और अपनी बात स्वतंत्र रूप से रखने का समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 को महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। कहा कि संविधान के 106वें संशोधन के माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान किया गया है। मानसिकता में बदलाव भी जरूरी कार्यक्रम संयोजक डॉ. रश्मिशील ने कहा कि अधिनियम आधी आबादी को राजनीतिक व्यवस्था में समान अवसर देने की दिशा में सार्थक कदम है। कानून के साथ परिवार, शिक्षण संस्थानों, राजनीति और समाज में सोच बदलना भी जरूरी है। प्रो. डॉ. संजीव कुमार अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा महिलाओं में अधिकार-बोध, निर्णय क्षमता और नेतृत्व कौशल विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने छात्राओं से अपने अधिकारों और संवैधानिक दायित्वों के प्रति सजग रहने की अपील की। प्राचार्य प्रो. डॉ. शिवानी श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ ज्ञान हासिल करना नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, संवैधानिक मूल्यों और जिम्मेदार नागरिकता का विकास करना भी है। महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ने से लोकतंत्र अधिक प्रतिनिधिक और मजबूत होगा।

