बेतिया नगर निगम के वार्ड संख्या 37 के पार्षद शैलेश कुशवाहा ने उन पर लगाए गए गंभीर आरोपों को निराधार और साजिश बताया है। यह विवाद बेतिया के छठ घाट पर डॉग हाउस के निर्माण को लेकर शुरू हुआ है। पार्षद शैलेश कुशवाहा के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन जब वह अपनी बहन के घर से लौट रहे थे, तो ग्रामीणों ने उन्हें रोक लिया। ग्रामीणों ने उनसे धार्मिक स्थल पर आवारा कुत्तों का ठिकाना बनाने को लेकर सवाल किया और आपत्ति जताई। कर्मियों से मांगी गई थी जानकारी पार्षद ने बताया कि ग्रामीणों में इस बात को लेकर काफी आक्रोश था कि जिस कार्य के लिए पहले घुसुपुर में स्थान चयनित किया गया था, उसका निर्माण उनके वार्ड में कराया जा रहा है। उन्होंने मौके पर मौजूद कर्मियों से इस संबंध में जानकारी मांगी थी। पार्षद ने कर्मियों से स्पष्ट रूप से कहा था कि जब तक नगर निगम की ओर से निर्माण कार्य से संबंधित कोई लिखित आदेश या कागजात उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक काम बंद रखा जाए। उन्होंने दूरभाष पर घारी प्रभारी से भी बात की थी, जिन्होंने कार्य रोकने की पुष्टि की थी। हालांकि, पार्षद के वहां से जाने के बाद कथित तौर पर निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया। दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग शैलेश कुशवाहा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि पूरे मामले को साजिश के तहत तूल दिया जा रहा है। उन्होंने नगर निगम के वरीय अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। इधर, मामले की सूचना मिलने के बाद मुफस्सिल थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाकर घटना से संबंधित आवश्यक कागजात और साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा है। पुलिस द्वारा मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। इस मामले में नगर आयुक्त का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। बेतिया नगर निगम के वार्ड संख्या 37 के पार्षद शैलेश कुशवाहा ने उन पर लगाए गए गंभीर आरोपों को निराधार और साजिश बताया है। यह विवाद बेतिया के छठ घाट पर डॉग हाउस के निर्माण को लेकर शुरू हुआ है। पार्षद शैलेश कुशवाहा के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन जब वह अपनी बहन के घर से लौट रहे थे, तो ग्रामीणों ने उन्हें रोक लिया। ग्रामीणों ने उनसे धार्मिक स्थल पर आवारा कुत्तों का ठिकाना बनाने को लेकर सवाल किया और आपत्ति जताई। कर्मियों से मांगी गई थी जानकारी पार्षद ने बताया कि ग्रामीणों में इस बात को लेकर काफी आक्रोश था कि जिस कार्य के लिए पहले घुसुपुर में स्थान चयनित किया गया था, उसका निर्माण उनके वार्ड में कराया जा रहा है। उन्होंने मौके पर मौजूद कर्मियों से इस संबंध में जानकारी मांगी थी। पार्षद ने कर्मियों से स्पष्ट रूप से कहा था कि जब तक नगर निगम की ओर से निर्माण कार्य से संबंधित कोई लिखित आदेश या कागजात उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक काम बंद रखा जाए। उन्होंने दूरभाष पर घारी प्रभारी से भी बात की थी, जिन्होंने कार्य रोकने की पुष्टि की थी। हालांकि, पार्षद के वहां से जाने के बाद कथित तौर पर निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया। दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग शैलेश कुशवाहा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि पूरे मामले को साजिश के तहत तूल दिया जा रहा है। उन्होंने नगर निगम के वरीय अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। इधर, मामले की सूचना मिलने के बाद मुफस्सिल थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाकर घटना से संबंधित आवश्यक कागजात और साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा है। पुलिस द्वारा मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। इस मामले में नगर आयुक्त का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है।

