रायगढ़ में साइबर जागृति अभियान, बैंकों में पहुंची पुलिस:खाताधारकों को बताए साइबर ठगी से बचने के उपाय, कहा- सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव

रायगढ़ में साइबर जागृति अभियान, बैंकों में पहुंची पुलिस:खाताधारकों को बताए साइबर ठगी से बचने के उपाय, कहा- सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव

छत्तीसगढ़ पुलिस प्रदेशभर में साइबर अपराधों को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए साइबर जागृति अभियान चला रही है। इसी के तहत रायगढ़ में पुलिस टीमों ने जिले के अलग-अलग बैंकों में पहुंचकर खाताधारकों, आम लोगों और बैंक कर्मचारियों को साइबर अपराध से बचाव के उपाय बताए। सिटी कोतवाली पुलिस ने शहर के अलग-अलग बैंकों में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। पुलिस टीम ने कोटक महिंद्रा बैंक, यूको बैंक, ICICI बैंक, IDFC First बैंक और पंजाब नेशनल बैंक मिलूपारा में पहुंचकर लोगों और बैंक कर्मचारियों से चर्चा की। इस दौरान डिजिटल बैंकिंग में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी दी गई। पुलिस ने बताया कि डिजिटल भुगतान आज रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है, लेकिन साइबर ठग इसी सुविधा का फायदा उठाकर लोगों के बैंक खातों को निशाना बना रहे हैं। UPI PIN सिर्फ भुगतान करने के लिए दर्ज किया जाता है, पैसा प्राप्त करने के लिए नहीं। अगर कोई व्यक्ति पैसा भेजने या रिफंड देने के नाम पर UPI PIN डालने, QR कोड स्कैन करने या किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने के लिए कहता है तो सावधान रहें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर QR कोड स्कैन न करें। OTP, UPI PIN, ATM PIN और CVV साझा न करें जागरूकता कार्यक्रम में पुलिस ने बताया कि बैंक, पुलिस, RBI या किसी अधिकृत संस्था का अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति अगर OTP, UPI PIN, ATM PIN, CVV, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या कार्ड से जुड़ी गोपनीय जानकारी मांगता है तो उसे बिल्कुल साझा न करें। साइबर ठग अक्सर बैंक खाता बंद होने, KYC अपडेट नहीं होने, क्रेडिट कार्ड बंद करने, बिजली बिल बकाया होने, SIM बंद होने या खाते में संदिग्ध गतिविधि होने का डर दिखाकर लोगों से गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल करते हैं। फर्जी कॉल और मैसेज से रहें सतर्क पुलिस टीम ने बताया कि साइबर ठग कभी बैंक अधिकारी, कभी पुलिस अधिकारी, कभी कस्टमर केयर कर्मचारी तो कभी सरकारी अधिकारी बनकर फोन करते हैं। बातचीत के दौरान वे डर पैदा कर तत्काल कार्रवाई के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने या मोबाइल पर आया OTP बताने का दबाव बनाते हैं। ऐसे किसी कॉल पर घबराएं नहीं। फोन काट दें, संबंधित संस्था के आधिकारिक नंबर पर खुद संपर्क करें और सत्यापन के बाद ही कोई कदम उठाएं। KYC अपडेट के नाम पर ठगी से बचें साइबर ठग KYC अपडेट के नाम पर मोबाइल पर लिंक भेजकर उसे खोलने और व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी भरने के लिए कहते हैं। कई बार मोबाइल में कोई एप डाउनलोड करवाकर खाते की जानकारी हासिल करने का प्रयास भी किया जाता है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की कि KYC अपडेट कराने के लिए किसी अनजान व्यक्ति के भेजे लिंक पर क्लिक न करें। कोई संदिग्ध एप डाउनलोड न करें और स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस की अनुमति भी न दें। फर्जी कस्टमर केयर नंबर से रहें सावधान साइबर ठगी का एक तरीका फर्जी कस्टमर केयर नंबर के जरिए भी सामने आ रहा है। लोग किसी बैंक, ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म या दूसरी सेवा का कस्टमर केयर नंबर इंटरनेट पर खोजते हैं और फर्जी नंबर पर संपर्क कर बैठते हैं। इसके बाद ठग सहायता करने के नाम पर OTP, कार्ड डिटेल, UPI PIN या स्क्रीन शेयर करने के लिए कहते हैं। पुलिस ने सलाह दी कि किसी बैंक, एप या ऑनलाइन सेवा का हेल्पलाइन नंबर सिर्फ उसकी आधिकारिक वेबसाइट या आधिकारिक एप से ही प्राप्त करें। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराने वालों से बचें जागरूकता कार्यक्रम में पुलिस ने लोगों को बताया कि साइबर अपराधी वीडियो कॉल या फोन के माध्यम से पुलिस, CBI, ED, TRAI या किसी दूसरी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं। वे अपराध दर्ज होने और गिरफ्तारी का भय दिखाकर पैसे की मांग करते हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को फोन या वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ करके पैसे जमा कराने की कोई वैध पुलिस प्रक्रिया नहीं है। ऐसे कॉल आने पर घबराने के बजाय तुरंत कॉल काटें और पुलिस को सूचना दें। सोशल मीडिया पर भी बरतें सावधानी पुलिस ने सोशल मीडिया अकाउंट की सुरक्षा के लिए मजबूत पासवर्ड रखने और दो-स्तरीय सुरक्षा (2FA) का इस्तेमाल करने की सलाह दी। अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट, मैसेज और वीडियो कॉल से सावधान रहने को भी कहा गया। किसी व्यक्ति के साथ निजी फोटो, दस्तावेज, बैंक संबंधी जानकारी या पहचान से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा न करने की अपील की गई। ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 पर करें कॉल पुलिस टीम ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति के साथ साइबर वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है तो घबराएं नहीं और घटना को छिपाएं नहीं। ठगी के बाद जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, उतनी जल्दी संबंधित बैंक और वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से राशि को रोकने या होल्ड कराने का प्रयास किया जा सकता है। पीड़ित को तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। साथ ही संबंधित बैंक को तत्काल सूचना देकर खाते या लेनदेन के संबंध में जरूरी कार्रवाई करानी चाहिए। पीड़ित को स्क्रीनशॉट, मोबाइल नंबर, UPI ID, बैंक खाता विवरण, ट्रांजेक्शन आईडी और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों को भी सुरक्षित रखना चाहिए।

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