Nepal Flood में फंसे कुशीनगर के करन शर्मा, त्रिशूली प्रोजेक्ट से 76 कर्मी लापता

Nepal Flood में फंसे कुशीनगर के करन शर्मा, त्रिशूली प्रोजेक्ट से 76 कर्मी लापता

नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन से हुई तबाही में कुशीनगर निवासी करन शर्मा भी लापता हो गये हैं और परिवार का उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। शर्मा के परिवार से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि कप्तानगंज तहसील के मलूकही गांव निवासी शर्मा(34) नेपाल के रसुवा जिले के त्रिशूली क्षेत्र में स्थित 216 मेगावाट के अपर त्रिशूली-1 जल विद्युत परियोजना में ‘इलेक्ट्रिशियन फोरमैन’ के पद पर कार्यरत थे।

आपदा के बाद से उनका परिवार से संपर्क टूट गया है और उनका कोई पता नहीं चल पा रहा है। नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से रसुवा जिले का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है। कई जल विद्युत परियोजनाओं,सड़कों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचा है।

जल विद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले ऐसे कर्मचारियों की बड़ी संख्या है जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार 216 मेगावाट अपर त्रिशूली-1 परियोजना से जुड़े 76 कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। परिजनों के अनुसार करन शर्मा से घटना की रात 26 अगस्त को घर वालों की बातचीत हुई थी।

उस समय तक परिवार को किसी बड़े खतरे की जानकारी नहीं थी। इसके बाद नेपाल में अचानक आई बाढ़ और तबाही के बीच करन से संपर्क टूट गया। परिवार के लोग लगातार फोन पर संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनसे बात नहीं हो पा रही है।

परिजन लगातार नेपाल में परियोजना से जुड़े अधिकारियों और संबंधित हेल्पलाइन के माध्यम से उनकी जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहे हैं। परिवार की चिंता उस समय और बढ़ गई, जब जल विद्युत परियोजना की ओर से आपदा के बाद लापता कर्मचारियों की सूची जारी की गई। परिजनों के अनुसार करन शर्मा का नाम भी लापता लोगों की सूची में शामिल है।

इसके बाद परिवार ने स्थानीय स्तर पर प्रशासन से भी मदद की गुहार लगाई है। नेपाल के स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादक संघ के अनुसार रसुवा क्षेत्र की विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं में बड़ी संख्या में कर्मचारी बाढ़ के बाद संपर्क से बाहर हैं। अपर त्रिशूली-1 परियोजना में काम करने वाली एंड्रिट्ज हाइड्रो से जुड़े 76 कर्मचारियों का संपर्क टूटने की जानकारी सामने आई है।

परियोजना से जुड़े अन्य कर्मचारियों के भी लापता होने की सूचना है। इस संबंध में उपजिलाधिकारी आकांक्षा मिश्रा ने बताया कि देवकली के ग्राम प्रधान ने बीती रात सूचना दी थी। यह सूचना गोरखपुर आयुक्त को लिखित रूप में भेजी जा चुकी है।

परिजनों के मुताबिक करन लंबे समय से नेपाल में जल विद्युत परियोजना में काम कर रहे थे। नौकरी के सिलसिले में वह नेपाल के रसुवा जिले के त्रिशूली क्षेत्र में रह रहे थे। परिवार को अब भी उनके सकुशल होने की खबर मिलने की उम्मीद है।

अधिकारियों ने बताया कि नेपाल से सटे पड़ोसी महाराजगंज जिले में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और बचाव एवं राहत दलों को तैनात किया गया है। चौबीसों घंटे काम करने वाला नियंत्रण कक्ष भी चालू कर दिया गया है। जिले की सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं, जबकि तटबंधों और संवेदनशील इलाकों की निगरानी के लिए टीमें तैनात की गई थीं।

जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने कहा कि सभी तटबंध सुरक्षित हैं और सोहगीबरवा के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से 99,800 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सूचना मिली है और इसमें बढ़ोतरी का रुझान दिख रहा है। शनिवार को नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या 626 हो गई है जबकि लगभग 2,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

बुधवार को पानी, कीचड़ और मलबे के सैलाब ने कस्बों और गांवों को अपनी चपेट में ले लिया था, जिसके बाद से नेपाल हालात को संभालने की कोशिश कर रहा है। बचावकर्मी लापता लोगों की तलाश में दिन-रात काम कर रहे हैं, वे कहीं बारिश का सामना कर रहे हैं तो कहीं सूख चुके कीचड़ को खोदकर लोगों को ढूंढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। रात में नेपाल के गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने अपर त्रिशूली 3ए जल विद्युत परियोजना स्थल पर खुदाई करने वाली मशीनों से मिट्टी हटाए जाने के काम की निगरानी की।

यहां विनाशकारी बाढ़ के बाद सौ से अधिक लोग एक सुरंग में फंस गए थे। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई भीषण बाढ़ ने रसुवा क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। बाढ़ की तेज धारा और मलबे ने कई बस्तियों, सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाया है।

राहत और बचाव अभियान भी दुर्गम पहाड़ी इलाकों तथा क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों के कारण चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

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