बिहार में करीब 40 साल से से चली आ रही वित्त रहित शिक्षा नीति को समाप्त करने और शिक्षकों के समायोजन की मांग को लेकर शनिवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अस्पताल चौक पर एक दिवसीय धरना दिया। पूरे राज्य में चरणबद्ध तरीके से चल रहे आंदोलन की कड़ी में नालंदा 37वां जिला बना, जहां वित्त रहित शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के अधिकारों के समर्थन में जोरदार आवाज बुलंद की गई। इस प्रदर्शन के दौरान आगामी 5 सितंबर को राजधानी पटना में प्रस्तावित ‘कफन यात्रा’ को सफल और ऐतिहासिक बनाने के लिए बड़ी संख्या में लोगों से एकजुट होने का आह्वान किया गया। ‘वित्त रहित शिक्षा व्यवस्था का दंश झेलते हुए चार दशक से ज्यादा का वक्त गुजरा’ धरने को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष विवेक सिन्हा ने कहा कि राज्य में वित्त रहित शिक्षा व्यवस्था का दंश झेलते हुए कर्मियों को चालीस साल से अधिक समय बीत चुका है। सीमित संसाधनों और घोर अभावों के बीच वित्त रहित विद्यालयों, इंटर कॉलेजों और डिग्री महाविद्यालयों के हजारों शिक्षकों व कर्मचारियों ने लाखों विद्यार्थियों का भविष्य संवारने का काम किया है। इसके बावजूद सरकारों ने उन्हें नियमित वेतनमान, सेवा सुरक्षा, पेंशन, स्वास्थ्य सुविधा और सम्मानजनक जीवन से पूरी तरह वंचित रखा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस शोषणकारी नीति को तत्काल समाप्त कर सभी शिक्षण संस्थानों के कर्मियों के समायोजन के लिए ठोस नीति बनाई जाए। कांग्रेस सेवा दल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय यादव ने कहा कि 30 जून को अरवल जिले से इस राज्यव्यापी महाआंदोलन का बिगुल फूंका गया था, जो अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। यह आंदोलन केवल किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि हजारों पीड़ित शिक्षक परिवारों के आत्मसम्मान और जीवन रक्षा की लड़ाई है। उन्होंने सरकार से सभी वित्त रहित संस्थानों के समायोजन, कर्मियों को नियमित वेतनमान, सेवा सुरक्षा, सेवानिवृत्त शिक्षकों को पेंशन, दिवंगत कर्मियों के आश्रितों को सामाजिक सुरक्षा और कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ देने की मांग की। साथ ही प्रखंड स्तरीय डिग्री कॉलेज योजना में पूर्व से संचालित वित्त रहित कॉलेजों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। वक्ताओं ने जिले के तमाम प्राचार्यों, शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मियों, छात्रों और शिक्षा प्रेमियों से 5 सितंबर को पटना पहुंचने की अपील की। बिहार में करीब 40 साल से से चली आ रही वित्त रहित शिक्षा नीति को समाप्त करने और शिक्षकों के समायोजन की मांग को लेकर शनिवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अस्पताल चौक पर एक दिवसीय धरना दिया। पूरे राज्य में चरणबद्ध तरीके से चल रहे आंदोलन की कड़ी में नालंदा 37वां जिला बना, जहां वित्त रहित शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के अधिकारों के समर्थन में जोरदार आवाज बुलंद की गई। इस प्रदर्शन के दौरान आगामी 5 सितंबर को राजधानी पटना में प्रस्तावित ‘कफन यात्रा’ को सफल और ऐतिहासिक बनाने के लिए बड़ी संख्या में लोगों से एकजुट होने का आह्वान किया गया। ‘वित्त रहित शिक्षा व्यवस्था का दंश झेलते हुए चार दशक से ज्यादा का वक्त गुजरा’ धरने को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष विवेक सिन्हा ने कहा कि राज्य में वित्त रहित शिक्षा व्यवस्था का दंश झेलते हुए कर्मियों को चालीस साल से अधिक समय बीत चुका है। सीमित संसाधनों और घोर अभावों के बीच वित्त रहित विद्यालयों, इंटर कॉलेजों और डिग्री महाविद्यालयों के हजारों शिक्षकों व कर्मचारियों ने लाखों विद्यार्थियों का भविष्य संवारने का काम किया है। इसके बावजूद सरकारों ने उन्हें नियमित वेतनमान, सेवा सुरक्षा, पेंशन, स्वास्थ्य सुविधा और सम्मानजनक जीवन से पूरी तरह वंचित रखा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस शोषणकारी नीति को तत्काल समाप्त कर सभी शिक्षण संस्थानों के कर्मियों के समायोजन के लिए ठोस नीति बनाई जाए। कांग्रेस सेवा दल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय यादव ने कहा कि 30 जून को अरवल जिले से इस राज्यव्यापी महाआंदोलन का बिगुल फूंका गया था, जो अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। यह आंदोलन केवल किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि हजारों पीड़ित शिक्षक परिवारों के आत्मसम्मान और जीवन रक्षा की लड़ाई है। उन्होंने सरकार से सभी वित्त रहित संस्थानों के समायोजन, कर्मियों को नियमित वेतनमान, सेवा सुरक्षा, सेवानिवृत्त शिक्षकों को पेंशन, दिवंगत कर्मियों के आश्रितों को सामाजिक सुरक्षा और कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ देने की मांग की। साथ ही प्रखंड स्तरीय डिग्री कॉलेज योजना में पूर्व से संचालित वित्त रहित कॉलेजों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। वक्ताओं ने जिले के तमाम प्राचार्यों, शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मियों, छात्रों और शिक्षा प्रेमियों से 5 सितंबर को पटना पहुंचने की अपील की।

