प्रयागराज मंडल के विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए कमिश्नर डॉ. लोकेश एम. ने शिक्षा अधिकारियों को 15 सितंबर तक का अल्टीमेटम दिया है। आयुक्त कार्यालय के गांधी सभागार में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मंडलायुक्त ने मंडल के चारों जनपदों के सीडीओ, बीएसए और सभी बीईओ को कागजी आंकड़ों और खानापूर्ति की संस्कृति को समाप्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों की उपस्थिति, स्कूलों की मूलभूत सुविधाओं और पठन-पाठन की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कमिश्नर ने निर्देश दिए कि जिन विद्यालयों में बेंच-डेस्क उपलब्ध नहीं हैं या दरी/मैट फटी हुई है, वहां 15 सितंबर तक आवश्यक व्यवस्थाएं हर हाल में दुरुस्त की जाएं। इसके अतिरिक्त, जलभराव, विद्युत कनेक्शन और संपर्क मार्ग की समस्या से जूझ रहे विद्यालयों की जनपदवार सूची 24 घंटे के भीतर उपलब्ध कराने को कहा गया है। केवल नामांकन के आंकड़ों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, स्कूलों में बच्चों की वास्तविक और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए, विद्यालय समय के बाद अपराह्न 2:30 बजे से प्रधानाध्यापक और शिक्षक आसपास के गांवों में जाकर कम उपस्थिति वाले क्षेत्रों के अभिभावकों से सीधे संपर्क करेंगे। प्रयागराज में संगम क्षेत्र और परेड ग्राउंड के आसपास विद्यालय न जाने वाले बच्चों को चिन्हित कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक विशेष टीम गठित करने का निर्देश दिया गया है। सीडीओ प्रयागराज को बीएसए व एबीएसए के समन्वय से अभिभावकों को प्रेरित कर बच्चों को स्कूल भेजने की प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। पीएम श्री योजना के तहत निर्धारित, पूर्ण और अवशेष कार्यों की आख्या 24 घंटे में तलब की गई है। वहीं, ऑपरेशन कायाकल्प के तहत सितंबर के अंत तक प्रत्येक विद्यालय में दिव्यांग शौचालय बनवाने के आदेश भी दिए गए हैं। डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से यूनिफॉर्म, जूता-मोज़ा, स्वेटर और स्टेशनरी क्रय के लिए प्रति छात्र 1,200 रुपए की धनराशि का शत-प्रतिशत हस्तांतरण सुनिश्चित करने और 15 दिनों में इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। मिड-डे-मील (एमडीएम) की गुणवत्ता पर भी पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

