विस्थापित परिवारों को कम से कम 50 डिसमिल जमीन मिले:बाबूलाल मरांडी पहुंचे पाकुड़, अमड़ापाड़ा के विस्थापित गांवों में ग्रामीणों से सीधा संवाद

विस्थापित परिवारों को कम से कम 50 डिसमिल जमीन मिले:बाबूलाल मरांडी पहुंचे पाकुड़, अमड़ापाड़ा के विस्थापित गांवों में ग्रामीणों से सीधा संवाद

पाकुड़ के अमड़ापाड़ा प्रखंड में कोयला ब्लॉक से विस्थापित हुए परिवारों की समस्याओं को लेकर झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने गांवों का दौरा किया। उन्होंने चिलगो, विशनपुर और आलूबेड़ा समेत अन्य विस्थापित गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से सीधे बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। दौरे से पहले मरांडी प्रखंड मुख्यालय पहुंचे, जहां भाजपा जिलाध्यक्ष सरिता मुर्मू समेत पार्टी के अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। ग्रामीणों ने बताया कि विस्थापन के बाद उन्हें सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। जमीन से जुड़ी समस्याओं और रोजगार के अभाव का मुद्दा भी ग्रामीणों ने प्रमुखता से उठाया। कई विस्थापित परिवारों ने कहा कि पर्याप्त रोजगार नहीं मिलने से आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर भी इसका असर पड़ रहा है। 50 डिसमिल जमीन और 50 साल की योजना की मांग ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद बाबूलाल मरांडी ने कहा कि विस्थापित परिवारों को सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने सरकार से विस्थापित परिवारों के लिए कम से कम 50 डिसमिल जमीन उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना था कि बढ़ती आबादी को देखते हुए मौजूदा जमीन भविष्य के लिए पर्याप्त नहीं होगी। उन्होंने विस्थापित परिवारों के लिए 50 वर्ष की दीर्घकालिक योजना तैयार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि आने वाली पीढ़ियों को जमीन, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष नहीं करना पड़े। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया जायेगा और समाधान के लिए पहल की मांग की जाएगी। ग्रामीणों ने भी उनसे विस्थापन के बाद उत्पन्न समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए सरकार पर दबाव बनाने का आग्रह किया। कोयला उत्खनन के बीच मूलभूत सुविधाओं का सवाल गौरतलब है कि अमड़ापाड़ा प्रखंड के नॉर्थ एवं साउथ कोल ब्लॉक में बीजीआर और डीबीएल कंपनियां वर्षों से कोयला उत्खनन और परिवहन का काम कर रही हैं। कोयला परियोजनाओं के कारण कई गांवों के परिवार विस्थापित हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विस्थापन के बाद उन्हें जो जमीन मिली है, वह पर्याप्त नहीं है। रोजगार की समस्या भी बनी हुई है। उनका कहना है कि वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को लेकर भी चिंता है। ग्रामीणों ने बताया कि रोजगार का उचित अवसर नहीं मिलने से परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। वहीं बच्चों की शिक्षा के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। सड़क, बिजली, पेयजल और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं की कमी के कारण रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने विस्थापन से जुड़ी जमीन की समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग भी मरांडी के समक्ष रखी। पाकुड़ के अमड़ापाड़ा प्रखंड में कोयला ब्लॉक से विस्थापित हुए परिवारों की समस्याओं को लेकर झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने गांवों का दौरा किया। उन्होंने चिलगो, विशनपुर और आलूबेड़ा समेत अन्य विस्थापित गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से सीधे बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। दौरे से पहले मरांडी प्रखंड मुख्यालय पहुंचे, जहां भाजपा जिलाध्यक्ष सरिता मुर्मू समेत पार्टी के अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। ग्रामीणों ने बताया कि विस्थापन के बाद उन्हें सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। जमीन से जुड़ी समस्याओं और रोजगार के अभाव का मुद्दा भी ग्रामीणों ने प्रमुखता से उठाया। कई विस्थापित परिवारों ने कहा कि पर्याप्त रोजगार नहीं मिलने से आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर भी इसका असर पड़ रहा है। 50 डिसमिल जमीन और 50 साल की योजना की मांग ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद बाबूलाल मरांडी ने कहा कि विस्थापित परिवारों को सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने सरकार से विस्थापित परिवारों के लिए कम से कम 50 डिसमिल जमीन उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना था कि बढ़ती आबादी को देखते हुए मौजूदा जमीन भविष्य के लिए पर्याप्त नहीं होगी। उन्होंने विस्थापित परिवारों के लिए 50 वर्ष की दीर्घकालिक योजना तैयार करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि आने वाली पीढ़ियों को जमीन, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष नहीं करना पड़े। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया जायेगा और समाधान के लिए पहल की मांग की जाएगी। ग्रामीणों ने भी उनसे विस्थापन के बाद उत्पन्न समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए सरकार पर दबाव बनाने का आग्रह किया। कोयला उत्खनन के बीच मूलभूत सुविधाओं का सवाल गौरतलब है कि अमड़ापाड़ा प्रखंड के नॉर्थ एवं साउथ कोल ब्लॉक में बीजीआर और डीबीएल कंपनियां वर्षों से कोयला उत्खनन और परिवहन का काम कर रही हैं। कोयला परियोजनाओं के कारण कई गांवों के परिवार विस्थापित हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विस्थापन के बाद उन्हें जो जमीन मिली है, वह पर्याप्त नहीं है। रोजगार की समस्या भी बनी हुई है। उनका कहना है कि वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को लेकर भी चिंता है। ग्रामीणों ने बताया कि रोजगार का उचित अवसर नहीं मिलने से परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। वहीं बच्चों की शिक्षा के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। सड़क, बिजली, पेयजल और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं की कमी के कारण रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने विस्थापन से जुड़ी जमीन की समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग भी मरांडी के समक्ष रखी।  

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