साइबर अपराधियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से सेवानिवृत्त एक महिला अधिकारी को एक सप्ताह तक डिजिटल अरेस्ट करके 30 लाख रुपये ठग लिए। जालसाजों ने महिला को कश्मीर में होने वाली आतंकवादी घटनाओं के लिए मनी लांड्रिंग मामलों में शामिल होने का आरोप लगाया। गिरफ्तारी का भय दिखाकर ठगी की। साइबर थाना पुलिस ने गुरुवार को केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ठगने अपने को बताया सीबीआई अधिकारी ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाली महिला ने पुलिस को बताया कि वह केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में कार्यालय अधीक्षक के पद पर थीं। सेवानिवृत्त होने के बाद परिवार के साथ रहती हैं। 10 जुलाई को उनके पास अंजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई का अधिकारी बताया। उसने कहा कि मनी लांड्रिंग मामले में सात युवकों को गिरफ्तार किया गया है। उनके पास से शिकायतकर्ता का आधार कार्ड मिला है। गिरफ्तार किए गए सभी युवक देशभर में होने वाली आतंकवादी घटनाओं के लिए मनी लांड्रिंग का काम करते हैं। गिरफ्तारी का दिखाया डर पूछताछ में शिकायतकर्ता का नाम भी बताया गया है। यह सुनकर पीड़िता भयभीत हो गईं। जालसाजों ने सीबीआई के कथित वरिष्ठ अधिकारियों से बात कराई। उसने पीड़िता पर आरोप लगाया कि वह रितेश मेहता के लिए मनी लांड्रिंग का काम करती हैं। अभी तक की जांच में उनका नाम सामने आया है। कभी भी सीबीआई की टीम उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। इसके बाद किया डिजिटल अरेस्ट गिरफ्तारी से बचने के लिए वह जालसाजों से मिन्नतें मांगने लगीं। आरोपियों ने पीड़िता के डरने का फायदा उठाते हुए जांच के नाम पर वीडियो कॉल करके डिजिटल अरेस्ट कर लिया। आरोपियों ने कहा कि वह किसी से भी संपर्क नहीं करेंगी। यदि उन्होंने किसी से संपर्क किया या किसी को बताया कि तो उन्हें कभी भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। टीमें उनके घर के आसपास ही हैं। इसलिए वह जैसा कहें, वैसा ही करना होगा। 30 लाख रुपए कर दिए ट्रांसफर यदि मामला यहीं रफा-दफा करना है तो उनकी बात माननी होगी। गिरफ्तारी के डर से पीड़िता ने जालसाजों द्वारा दिए निर्देश पर दिल्ली में जाकर अपने बैंक खाते से 30 लाख रुपये जालसाजों द्वारा बताए बैंक खाते में ट्रांसफर करा दिए। रुपये ट्रांसफर करने के बाद जब वह घर पहुंचीं तो परिवार के लोगों से मिलकर रोने लगीं। परिजन से बातचीत के बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ।

