कानपुर नगर निगम के अभियंत्रण विभाग में भ्रष्टाचार और कमीशनबाजी ने अब तूल पकड़ लिया है। विभाग के मुख्य अभियंता सैय्यद फरीद अख्तर जैदी के खिलाफ पुलिस में शिकायत पहुंचने के बाद अभियंताओं से लेकर लिपिक तक की भूमिका जांच के दायरे में आ गई है।
इनके ठेकेदारों के साथ मिलीभगत और कमीशन के खेल ने शहर के विकास कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यही वजह है कि शहर में जगह-जगह सड़कें टूटी हैं और गड्ढों की समस्या लगातार बढ़ रही है। डेढ़ साल पहले लखनऊ से आए थे मुख्य अभियंता नगर निगम सूत्रों के अनुसार, करीब डेढ़ साल पहले मुख्य अभियंता सैय्यद फरीद अख्तर जैदी लखनऊ से तबादले पर कानपुर आए थे। अपने साथ तीन चहेते ठेकेदारों को भी कानपुर लेकर आए थे। इसके बाद अभियंत्रण विभाग में उनके काम करने का रास्ता बनाया गया। सूत्रों का दावा है कि इन ठेकेदारों को छोटे से लेकर बड़े तक कई काम दिलाए गए और कमीशनबाजी का जबरदस्त खेल चलता रहा। इनकी शिकायतें आला अधिकारियों के साथ शासन तक भी पहुंचीं। इसी वजह से नगर आयुक्त ने शासन को पत्र लिखकर जांच प्रभावित न हो इसके लिए मुख्य अभियंता स्तर के एक अधिकारी की मांग की थी। पुलिस इन फर्मों की भी कर रही जांच पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मुख्य अभियंता के नजदीकी लोग चार फर्में चला रहे हैं। इसमें मेहताब इंटरप्राइजेज लखनऊ, बजरंग ट्रेडर्स, सैय्यद ट्रेडर्स और एसएस इंटरप्राइजेज शामिल हैं। शिकायत में इन फर्मों के पीछे मुख्य अभियंता का प्रभाव होने का आरोप लगाया गया है। पुलिस अब इन चारों फर्मों से जुड़े मामलों की जांच कर रही है। इसके चलते अभियंत्रण विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और अधिकारी-कर्मचारी खुलकर बोलने से बच रहे हैं। अभियंता से बाबू तक रडार पर सूत्रों के मुताबिक, अभियंत्रण विभाग के कई अभियंताओं और कर्मचारी भी ठेकेदारों के साथ कमीशनबाजी में शामिल हैं। कहीं रिश्तेदारों के नाम पर फर्में चल रही हैं तो कहीं चहेते ठेकेदारों को काम दिलाने में मदद की जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई अभियंत्रण विभाग में कमीशनबाजी और भ्रष्टाचार के आरोप नए नहीं हैं। लंबे समय से शिकायतें सामने आने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से विभाग में मनमानी बढ़ती गई। पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नगर निगम में वसूली टैक्स पूछने के बाद खलबली मची। इसके बाद ताबड़तोड़ कार्रवाई के साथ अलग-अलग मामलों की जांच के लिए समितियां गठित की गई हैं। अधिकारियों पर कब होगी कार्रवाई? नगर निगम में अब तक हुई कार्रवाई से ऐसा नजर आ रहा है कि निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई तेजी से हो रही है, लेकिन जिन अधिकारियों के स्तर पर टेंडर प्रक्रिया की निगरानी और स्वीकृति की जिम्मेदारी थी, उनकी जवाबदेही अभी तय नहीं हुई है। इससे कर्मचारियों के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि अगर भ्रष्टाचार के लिए जीरो टॉलरेंस नीति है तो इसकी आंच अधिकारियों तक कब पहुंचेगी।

