रक्षाबंधन को लेकर औरंगाबाद शहर के बाजार में उत्सवी रंग चढ़ने लगा है। राखी की दुकानों के साथ मिठाई की दुकानों पर भी खरीदारों की भीड़ बढ़ गई है। बहनें भाइयों के लिए मनपसंद राखी खरीदने के साथ उनकी पसंद की मिठाइयां भी खरीद रही हैं। पर्व को देखते हुए मिठाई दुकानदारों ने पहले से ही अतिरिक्त तैयारी कर रखी है। शहर के विभिन्न बाजारों में गुरुवार को सुबह से ही मिठाई दुकानों पर खरीदारों की आवाजाही बनी रही। कोई घर ले जाने के लिए मिठाई खरीदता दिखा तो कोई रिश्तेदारों और परिचितों के यहां भेजने के लिए आकर्षक पैकिंग करा रहा था। दुकानों में रसगुल्ला, पेड़ा, बर्फी, काजू कतली, लड्डू समेत कई तरह की मिठाइयां सजाई गई हैं। पर्व को देखते हुए दुकानदारों ने आकर्षक पैकिंग वाले डिब्बे भी तैयार किए हैं। रक्षाबंधन शुक्रवार, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। पर्व को लेकर बाजार में एक दिन पहले से ही खरीदारी तेज हो गई है। राखी और मिठाई की दुकानों के अलावा गिफ्ट आइटम की दुकानों पर भी ग्राहकों की चहल-पहल बढ़ी है। काजू कतली 1000 से 1500 रुपये प्रति किलो, रसगुल्ला 15 से 18 रुपये पीस रक्षाबंधन को लेकर मिठाइयों की अलग-अलग कीमतें निर्धारित हैं। दुकानों पर काजू कतली 1,000 -1500 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है, जबकि गोंद और नारियल के लड्डू की कीमत 350 रुपये किलो है। बेसन और बूंदी के लड्डू 250 रुपये किलो उपलब्ध हैं। क्रीम सैंडविच 450 रुपये और क्रीम मिठाई 400 रुपये किलो की दर से बिक रही है। काला जामुन और गुलाब जामुन 350 रुपये किलो की दर से मिल रहे हैं। गोपाल भोग की कीमत भी 350 रुपये किलो है। पीस के हिसाब से बिक्री होने वाली मिठाइयों में गुड़ का रसगुल्ला 18 रुपये और चीनी का रसगुल्ला 15 रुपये पीस है। काला जामुन भी 15 रुपये पीस की दर से बिक रहा है। मिठाई दुकानदारों का कहना है कि रक्षाबंधन को लेकर सामान्य दिनों की तुलना में मांग बढ़ गई है। ग्राहकों की पसंद को देखते हुए अलग-अलग वैरायटी की मिठाइयां तैयार कराई गई हैं। कुछ दुकानों पर छोटे और बड़े आकार के पैकेट तैयार किए गए हैं, ताकि ग्राहक अपनी सुविधा और बजट के अनुसार मिठाई खरीद सकें। सड़क किनारे 10 से लेकर 200 रुपये तक की राखी, चांदी की राखी भी बनी पसंद रक्षाबंधन को लेकर शहर की सड़कों और बाजारों में राखी की अस्थायी दुकानें भी सज गई हैं। सड़क किनारे 10 रुपये से लेकर 200 रुपये तक की राखियां बिक रही हैं। बच्चों के लिए कार्टून और आकर्षक डिजाइन वाली राखियां उपलब्ध हैं, जबकि युवाओं के लिए अलग-अलग डिजाइन और रंगों की राखियां सजाई गई हैं। बाजार में चांदी की राखियों की भी मांग देखने को मिल रही है। कई ग्राहक चांदी की राखी बनवाने के लिए आभूषण दुकानों का रुख कर रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार चांदी की राखी की कीमत उसके वजन और डिजाइन के आधार पर तय की जाती है। ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार डिजाइन चुनकर राखी तैयार करा रहे हैं।रक्षाबंधन को लेकर बाजार में राखी, मिठाई और उपहार की खरीदारी एक साथ होने से दुकानदारों में भी उत्साह है। बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए पसंदीदा राखी के साथ मिठाई और उपहार भी खरीद रही हैं। इससे पर्व की पूर्व संध्या पर बाजारों में चहल-पहल और रौनक बढ़ गई है।
इस बार भद्रा की बाधा नहीं, सूर्योदय से पहले ही हो जाएगी समाप्त रक्षाबंधन पर राखी बांधते समय भद्रा काल का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भद्रा काल में राखी बांधने से बचा जाता है। इस साल राहत की बात यह है कि पंचांग की गणना के अनुसार भद्रा 28 अगस्त को सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए सुबह राखी बांधने के समय भद्रा की बाधा नहीं रहेगी। यही कारण है कि 28 अगस्त की सुबह का समय राखी बांधने के लिए सर्वोत्तम है। शास्त्रों के अनुसार, भद्रा का साया न होने के कारण वैकल्पिक तौर पर बहनें दिन में 12 बजकर 28 मिनट से 2 बजकर 2 मिनट तक अपने भाइयों की कलाई पर स्नेह का रक्षासूत्र बांध सकेंगी। पंडितों की मान्यता-तिथि और भद्रा, दोनों का ध्यान रखना जरूरी आचार्य नंदकुमार चौबे के अनुसार, रक्षाबंधन का पर्व श्रावण पूर्णिमा पर मनाया जाता है। राखी बांधने के समय दो बातों का ध्यान रखा जाता है पहला, पूर्णिमा तिथि हो और दूसरा, भद्रा काल न हो। इस साल 28 अगस्त की सुबह दोनों स्थितियां अनुकूल हैं और भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुकी है। इसलिए सुबह का समय राखी बांधने के लिए सबसे उपयुक्त माना जा रहा है। पूजा की थाली में रखें राखी, रोली, चावल और मिठाई राखी बांधने से पहले पूजा की थाली तैयार की जा सकती है। इसमें राखी, रोली या कुमकुम, अक्षत यानी चावल, दीपक, मिठाई और फूल रखे जाते हैं। कई परिवार अपनी परंपरा के अनुसार नारियल, मौली, फल और पानी का कलश भी रखते हैं। पहले भगवान की पूजा की जाती है। इसके बाद भाई को तिलक लगाया जाता है, चावल लगाए जाते हैं और आरती करने के बाद उसकी कलाई पर राखी बांधी जाती है। भारत में नहीं दिखेगा चंद्र ग्रहण,बेफिक्र होकर मनाएं त्योहार ज्योतिषाचार्य डॉ. नवीन चंद्र जोशी ने स्पष्ट किया कि 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण भी लग रहा है, लेकिन यह ग्रहण भारत में दृश्यमान (दिखाई देने योग्य) नहीं होगा। भारत में दिखाई न देने के कारण यहां इसका कोई सूतक काल या धार्मिक प्रभाव मान्य नहीं होगा। श्रद्धालु बिना किसी संशय के पूरे उत्साह और विधान के साथ रक्षाबंधन का पर्व मना सकते हैं। रक्षाबंधन को लेकर औरंगाबाद शहर के बाजार में उत्सवी रंग चढ़ने लगा है। राखी की दुकानों के साथ मिठाई की दुकानों पर भी खरीदारों की भीड़ बढ़ गई है। बहनें भाइयों के लिए मनपसंद राखी खरीदने के साथ उनकी पसंद की मिठाइयां भी खरीद रही हैं। पर्व को देखते हुए मिठाई दुकानदारों ने पहले से ही अतिरिक्त तैयारी कर रखी है। शहर के विभिन्न बाजारों में गुरुवार को सुबह से ही मिठाई दुकानों पर खरीदारों की आवाजाही बनी रही। कोई घर ले जाने के लिए मिठाई खरीदता दिखा तो कोई रिश्तेदारों और परिचितों के यहां भेजने के लिए आकर्षक पैकिंग करा रहा था। दुकानों में रसगुल्ला, पेड़ा, बर्फी, काजू कतली, लड्डू समेत कई तरह की मिठाइयां सजाई गई हैं। पर्व को देखते हुए दुकानदारों ने आकर्षक पैकिंग वाले डिब्बे भी तैयार किए हैं। रक्षाबंधन शुक्रवार, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। पर्व को लेकर बाजार में एक दिन पहले से ही खरीदारी तेज हो गई है। राखी और मिठाई की दुकानों के अलावा गिफ्ट आइटम की दुकानों पर भी ग्राहकों की चहल-पहल बढ़ी है। काजू कतली 1000 से 1500 रुपये प्रति किलो, रसगुल्ला 15 से 18 रुपये पीस रक्षाबंधन को लेकर मिठाइयों की अलग-अलग कीमतें निर्धारित हैं। दुकानों पर काजू कतली 1,000 -1500 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है, जबकि गोंद और नारियल के लड्डू की कीमत 350 रुपये किलो है। बेसन और बूंदी के लड्डू 250 रुपये किलो उपलब्ध हैं। क्रीम सैंडविच 450 रुपये और क्रीम मिठाई 400 रुपये किलो की दर से बिक रही है। काला जामुन और गुलाब जामुन 350 रुपये किलो की दर से मिल रहे हैं। गोपाल भोग की कीमत भी 350 रुपये किलो है। पीस के हिसाब से बिक्री होने वाली मिठाइयों में गुड़ का रसगुल्ला 18 रुपये और चीनी का रसगुल्ला 15 रुपये पीस है। काला जामुन भी 15 रुपये पीस की दर से बिक रहा है। मिठाई दुकानदारों का कहना है कि रक्षाबंधन को लेकर सामान्य दिनों की तुलना में मांग बढ़ गई है। ग्राहकों की पसंद को देखते हुए अलग-अलग वैरायटी की मिठाइयां तैयार कराई गई हैं। कुछ दुकानों पर छोटे और बड़े आकार के पैकेट तैयार किए गए हैं, ताकि ग्राहक अपनी सुविधा और बजट के अनुसार मिठाई खरीद सकें। सड़क किनारे 10 से लेकर 200 रुपये तक की राखी, चांदी की राखी भी बनी पसंद रक्षाबंधन को लेकर शहर की सड़कों और बाजारों में राखी की अस्थायी दुकानें भी सज गई हैं। सड़क किनारे 10 रुपये से लेकर 200 रुपये तक की राखियां बिक रही हैं। बच्चों के लिए कार्टून और आकर्षक डिजाइन वाली राखियां उपलब्ध हैं, जबकि युवाओं के लिए अलग-अलग डिजाइन और रंगों की राखियां सजाई गई हैं। बाजार में चांदी की राखियों की भी मांग देखने को मिल रही है। कई ग्राहक चांदी की राखी बनवाने के लिए आभूषण दुकानों का रुख कर रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार चांदी की राखी की कीमत उसके वजन और डिजाइन के आधार पर तय की जाती है। ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार डिजाइन चुनकर राखी तैयार करा रहे हैं।रक्षाबंधन को लेकर बाजार में राखी, मिठाई और उपहार की खरीदारी एक साथ होने से दुकानदारों में भी उत्साह है। बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए पसंदीदा राखी के साथ मिठाई और उपहार भी खरीद रही हैं। इससे पर्व की पूर्व संध्या पर बाजारों में चहल-पहल और रौनक बढ़ गई है।
इस बार भद्रा की बाधा नहीं, सूर्योदय से पहले ही हो जाएगी समाप्त रक्षाबंधन पर राखी बांधते समय भद्रा काल का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भद्रा काल में राखी बांधने से बचा जाता है। इस साल राहत की बात यह है कि पंचांग की गणना के अनुसार भद्रा 28 अगस्त को सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए सुबह राखी बांधने के समय भद्रा की बाधा नहीं रहेगी। यही कारण है कि 28 अगस्त की सुबह का समय राखी बांधने के लिए सर्वोत्तम है। शास्त्रों के अनुसार, भद्रा का साया न होने के कारण वैकल्पिक तौर पर बहनें दिन में 12 बजकर 28 मिनट से 2 बजकर 2 मिनट तक अपने भाइयों की कलाई पर स्नेह का रक्षासूत्र बांध सकेंगी। पंडितों की मान्यता-तिथि और भद्रा, दोनों का ध्यान रखना जरूरी आचार्य नंदकुमार चौबे के अनुसार, रक्षाबंधन का पर्व श्रावण पूर्णिमा पर मनाया जाता है। राखी बांधने के समय दो बातों का ध्यान रखा जाता है पहला, पूर्णिमा तिथि हो और दूसरा, भद्रा काल न हो। इस साल 28 अगस्त की सुबह दोनों स्थितियां अनुकूल हैं और भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुकी है। इसलिए सुबह का समय राखी बांधने के लिए सबसे उपयुक्त माना जा रहा है। पूजा की थाली में रखें राखी, रोली, चावल और मिठाई राखी बांधने से पहले पूजा की थाली तैयार की जा सकती है। इसमें राखी, रोली या कुमकुम, अक्षत यानी चावल, दीपक, मिठाई और फूल रखे जाते हैं। कई परिवार अपनी परंपरा के अनुसार नारियल, मौली, फल और पानी का कलश भी रखते हैं। पहले भगवान की पूजा की जाती है। इसके बाद भाई को तिलक लगाया जाता है, चावल लगाए जाते हैं और आरती करने के बाद उसकी कलाई पर राखी बांधी जाती है। भारत में नहीं दिखेगा चंद्र ग्रहण,बेफिक्र होकर मनाएं त्योहार ज्योतिषाचार्य डॉ. नवीन चंद्र जोशी ने स्पष्ट किया कि 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण भी लग रहा है, लेकिन यह ग्रहण भारत में दृश्यमान (दिखाई देने योग्य) नहीं होगा। भारत में दिखाई न देने के कारण यहां इसका कोई सूतक काल या धार्मिक प्रभाव मान्य नहीं होगा। श्रद्धालु बिना किसी संशय के पूरे उत्साह और विधान के साथ रक्षाबंधन का पर्व मना सकते हैं।

