ग्लेशियल झील फटने के बाद दरभंगा में भी अलर्ट:गंडक बराज से 86 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा, जलस्तर बढ़ने की है संभावना

ग्लेशियल झील फटने के बाद दरभंगा में भी अलर्ट:गंडक बराज से 86 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा, जलस्तर बढ़ने की है संभावना

तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियल झील (हिमनद झील) फटने के बाद बिहार में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। दरभंगा जिला प्रशासन ने भी जिलेवासियों को अलर्ट रहने की अपील की है। जिलाधिकारी कौशल कुमार ने बताया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और लोगों को किसी भी तरह की संभावित स्थिति के लिए सतर्क रहने की जरूरत है।
बताया गया कि भोटे कोसी नदी तिब्बत से निकलकर नेपाल में त्रिशूली नदी में मिलती है। गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि की संभावना जताई गई है। बुधवार दोपहर 12 बजे वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से 86 हजार क्यूसेक जलश्राव प्रवाहित हुआ, जिसकी प्रवृत्ति बढ़ने की बताई गई है। नेपाल क्षेत्र के नारायणी नदी के देवघाट गेज स्थल पर वर्तमान जलस्तर 4.77 मीटर दर्ज किया गया है। यहां खतरे का निशान 9 मीटर और चेतावनी स्तर 7.30 मीटर निर्धारित है। गंडक बराज के सभी 36 गेट खोले गए
जल संसाधन विभाग ने स्थिति को देखते हुए वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज के सभी 36 गेट खोल दिए हैं। बराज की स्थिति पर निगरानी के लिए मुख्यालय स्तर से अधीक्षण अभियंता के नेतृत्व में तकनीकी दल को भी भेजा गया है। गंडक नदी बेसिन में आने वाले सभी जिलों को चेतावनी संवाद जारी कर दिया गया है। विभागीय पदाधिकारियों को संभावित आकस्मिक स्थिति को देखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां करने, लगातार चौकसी बरतने और जलस्तर की निगरानी करने का निर्देश दिया गया है। संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक सामग्रियों के भंडारण के साथ तटबंधों के लगातार निरीक्षण की व्यवस्था की गई है।
जिले में बागमती, कमला-बलान, कोसी बहती
डीएम कौशल कुमार ने कहा कि दरभंगा जिले में बागमती, कमला-बलान, कोसी और अधवारा समूह सहित कई नदियां बहती हैं। गंडक नदी में जलस्तर बढ़ने की संभावना के साथ किसी अन्य स्रोत से भी पानी के प्रवेश की स्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में जिलेवासियों को अलर्ट मोड में रहने की जरूरत है।
उन्होंने लोगों से प्रशासन की ओर से जारी होने वाली सूचनाओं पर ध्यान देने और किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की।
स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने का निर्देश मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव, प्रधान सचिव आपदा प्रबंधन विभाग और सचिव जल संसाधन विभाग के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को हाई अलर्ट मोड में रहने, सभी आवश्यक कार्रवाई समय पर करने और स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने का निर्देश दिया है।
जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन पूरी तरह सतर्क रहें और नदी, तटबंध और निचले इलाकों की स्थिति को लेकर प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें। तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियल झील (हिमनद झील) फटने के बाद बिहार में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। दरभंगा जिला प्रशासन ने भी जिलेवासियों को अलर्ट रहने की अपील की है। जिलाधिकारी कौशल कुमार ने बताया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और लोगों को किसी भी तरह की संभावित स्थिति के लिए सतर्क रहने की जरूरत है।
बताया गया कि भोटे कोसी नदी तिब्बत से निकलकर नेपाल में त्रिशूली नदी में मिलती है। गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि की संभावना जताई गई है। बुधवार दोपहर 12 बजे वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से 86 हजार क्यूसेक जलश्राव प्रवाहित हुआ, जिसकी प्रवृत्ति बढ़ने की बताई गई है। नेपाल क्षेत्र के नारायणी नदी के देवघाट गेज स्थल पर वर्तमान जलस्तर 4.77 मीटर दर्ज किया गया है। यहां खतरे का निशान 9 मीटर और चेतावनी स्तर 7.30 मीटर निर्धारित है। गंडक बराज के सभी 36 गेट खोले गए
जल संसाधन विभाग ने स्थिति को देखते हुए वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज के सभी 36 गेट खोल दिए हैं। बराज की स्थिति पर निगरानी के लिए मुख्यालय स्तर से अधीक्षण अभियंता के नेतृत्व में तकनीकी दल को भी भेजा गया है। गंडक नदी बेसिन में आने वाले सभी जिलों को चेतावनी संवाद जारी कर दिया गया है। विभागीय पदाधिकारियों को संभावित आकस्मिक स्थिति को देखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां करने, लगातार चौकसी बरतने और जलस्तर की निगरानी करने का निर्देश दिया गया है। संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक सामग्रियों के भंडारण के साथ तटबंधों के लगातार निरीक्षण की व्यवस्था की गई है।
जिले में बागमती, कमला-बलान, कोसी बहती
डीएम कौशल कुमार ने कहा कि दरभंगा जिले में बागमती, कमला-बलान, कोसी और अधवारा समूह सहित कई नदियां बहती हैं। गंडक नदी में जलस्तर बढ़ने की संभावना के साथ किसी अन्य स्रोत से भी पानी के प्रवेश की स्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में जिलेवासियों को अलर्ट मोड में रहने की जरूरत है।
उन्होंने लोगों से प्रशासन की ओर से जारी होने वाली सूचनाओं पर ध्यान देने और किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की।
स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने का निर्देश मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव, प्रधान सचिव आपदा प्रबंधन विभाग और सचिव जल संसाधन विभाग के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को हाई अलर्ट मोड में रहने, सभी आवश्यक कार्रवाई समय पर करने और स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने का निर्देश दिया है।
जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन पूरी तरह सतर्क रहें और नदी, तटबंध और निचले इलाकों की स्थिति को लेकर प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें।  

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